'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Wednesday, April 18, 2012
Friday, April 13, 2012
Thursday, April 12, 2012
मैं बुंदेलखंड हूँ-मेरा छोटा सा भूगोलिक परिचय!
तपते पर्वत,बंजर धरती,
लपट और तेज़ गर्मी और उमस से भरे दिन,
तीखी हाड कंपाती सर्द रातें,
मेरा छोटा सा भूगोलिक परिचय है!
मैं बहुत अभागा भी हूँ-
अलगात के विस्तृत रेत के समुद्र तटों से मैं परे हूँ !
हरियाली से हरी-भरी हसीन वादिओं से बहुत दूर हूँ!
सफ़ेद बर्फ से आच्छादित पर्वतों से कटा हूँ !
और .....
प्रकृति से थोड़ी अन-बन होने के कारण-
दिखने मे थोडा 'ठस' लगता हूँ और
देखने-सुनने मे गाँव का लगता हूँ !
शायद थोडा -'बैकवर्ड क्लास' का हूँ !
मेरे पथरीले रास्तों पर जो बस गए-वो-
मुश्किल भरी ज़िन्दगी गुजार रहे है-
- गरीबी,अशिक्षा से संघर्ष जारी है-
- टाटा-बिरला-अम्बानी के औद्योगिक प्रोजेक्टों का अभी भी इंतज़ार है-
- एम्स,बॉम्बे हॉस्पिटल,सहारा अस्पताल शायद ही यहाँ कभी स्थापित हों-
क्यों कि -हमारे हुक्मरानों की नजर मे-
- बुंदेलखंडियो की साँसों की डोर की कीमत थोडा कम है-
- वो मेहनत मैं थोडा संकोच करते हैं
और...
- पैसा खर्च करने मे थोडा कंजूस है!
कभी हम 'उमा श्री' में अपना अक्स देखतें हैं
कभी 'बाबूलाल गौर जी' को आका समझतें हैं
या 'शिव' में 'उद्धारक' का रूप' तलाशते हैं
अथवा
'सत्यव्रत' की बाट जोहते हैं!
पर इक ऐसी बात है जो शायद किसी ने गौर नहीं की-
दोस्तों!
- मैं भूकम्पों से बहुत सुरक्षित हूँ -
- जलजलों से अपने लोगों को हमेशा बचाता हूँ-
- बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से दूर हूँ -
और ....
- मन का साफ़ हूँ!
बस इक ही ख्वाब है-
कभी दिल्ली मे बैठे हुए लोग-
मेरे साफ़ मन को देखें और
शताब्दी एक्सप्रेस से खजुराहो आकर
मेरी मंगली कुंडली पे विचार करें!Sunday, April 8, 2012
माँ तुझे सलाम!
माँ तुझे सलाम!
"चालीस साल पहले-
जब हमारी नन्ही उम्र मे-
आपसे हमारा साथ छूटा,
पता नहीं लगा कि..
ज़िन्दगी मे सब-कुछ छुट गया!
पता इस लिए नहीं लगा क्यों कि -
हमारे पास पूज्य पापा थे!
और-
आज जब आपकी पुण्य-तिथि पे-
पहुंचा हूँ आपकी बहू और नाती-नातिन को लेकर-
आपकी समाधी पे............
लगा कि जैसे वक़्त ठहर गया है..
आज आपसे कहना चाहता हूँ
कि आपके "शानू-आशीष" अब बड़े हो गए है!
और आपके "ईशु-ईशा-यश" आपके ही आँगन मे खेलते है!
और-
आपका द्वारा बसाया हुआ आँगन-
आज बागबान है......."
माँ तुझे सलाम!
माँ तुझे सलाम!
"चालीस साल पहले-
जब हमारी नन्ही उम्र मे-
आपसे हमारा साथ छूटा,
पता नहीं लगा कि..
ज़िन्दगी मे सब-कुछ छुट गया!
पता इस लिए नहीं लगा क्यों कि -
हमारे पास पूज्य पापा थे!
और-
आज जब आपकी पुण्य-तिथि पे-
पहुंचा हूँ आपकी बहू और नाती-नातिन को लेकर-
आपकी समाधी पे............
लगा कि जैसे वक़्त ठहर गया है..
आज आपसे कहना चाहता हूँ
कि आपके "शानू-आशीष" अब बड़े हो गए है!
और आपके "ईशु-ईशा-यश" आपके ही आँगन मे खेलते है!
और-
आपका द्वारा बसाया हुआ आँगन-
आज बागबान है......."
माँ तुझे सलाम!
माँ तुझे सलाम!
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