Tuesday, November 14, 2017

बचपन के राजकुमार !

"वो मेरा बचपन था !
वो मेरा इलाका था!
जहां चलता था ...
सिर्फ मेरा हुकुम !
हाँ ! मैं तानाशाह था ...
अपने दौरे बचपन के ..
राजपाट का !

मैं ही नूरचश्म था और
मैं ही ..
चाँद के रथ पे सवार राजकुमार !

जरा सी ..
मौसम ने हवा क्या बदली ..
जरा सी चेहरे पे ..
झाईयां क्या आईं ..
न वो बचपन रहा न मैं ..
सरहदों का सुलतान !

बचपन तो बखूबी याद है !!
बेशरम जवानी ...
न जाने कब गुज़र गई ;
पता ही नहीं चला !

आज जब ..
शीशे में अक्स देखा तो झाईयों के साथ ..
चेहरे में दिखे ..
सैकड़ों नुक्स
और फिर याद आया ..
हक़ीक़तों का पुलिंदा ..
कि ..
बुढ़ापे ने अंगड़ाई ली है !

अब न वो ..
नूरचश्म का खिताब ..
नवाज़ने वाले ..
अपने रहे और ...
न वो दौर ए मोहब्बत !

बस ..
इक हलकी सी याद है ..
अपने बचपन की ..
जब माँ की गोद में ..
रो लेने से ..
पिताजी की ऊँगली पकड़ कर  ..
मुझे जलेबी की दूकान तक ...
ले जाया जाता था !"

Thursday, November 9, 2017

पिता ; कभी ख़त्म नहीं होते !

हक़ीक़त में-
'पिता' कभी ख़त्म नहीं होते !
खामोशी का लबादा ओढ़ ..
जुदा नहीं होते !
बस 'अंतर्ध्यान' हो जाते हैं; वो...
'ईश्वर' के वास्ते ..
और हम ..मान लेते हैं ;
उनका गुज़र जाना !

उनके न दिखने के बावजूद ..
वे अपनी खामोशियों के साथ ..
सदैव चलते रहते हैं ..
अपने बच्चों के इर्द गिर्द !
और बच्चे भी ..
अनुगमन करते रहते हैं ..
उन दिशाओं का ...
जो उनके पिता ने ...
चित्रित और चिन्हित की थीं !

गौर से सुनोगे तो ..
वे सारी कहानियां ..
मूर्त हो ..
पथप्रदर्शित करती दिखाई  देंगीं ..
जो जीवन अमृत सा ..
तुम्हें सुना गए हैं ;
अपने प्यारे पिता  ...
अपने अनुभवों का निचोड़ समझ !

समझ सको तो ..समझ लो !
जान सको तो ..जान लो !
पिता कहीं नहीं जाते !
वट वृक्ष बन ..
अपने बच्चों को ..
सदा सहलाते !
बस ...
रूप बदलने को ...
प्रकृति और मौसम जैसे ...
अदृश्य हो जाते !

(शानू और आशीष !)

वक़्त की अरदास !

मैं वक़्त हूँ !
"मुझे मोतीलाल-जवाहर मिले
फिर इंदिरा मिली !
फ़ीरोज़ भी दिखे !
फिर संजय-राजीव मिले!
मेनका वरुण भी दृष्टव्य हो जाते हैं!
अब राहुल के साथ ... चहलक़दमियों में व्यस्त हूँ ! रॉबर्ट-प्रियंका से भी मुलाक़ात हो चुकी है !
देखो अगर वह शादी कर लेगा तो आगे के लोगों से भी मुलाकतें चलतीं रहेंगी वर्ना क्या है ;
बस वक़्त हूँ ...
निकल जाऊँगा आगे ...
बहुत आगे ..
समय की सुर ताल और लय में !
पता है -
खानाबदोश वक़्त कभी रुकता नहीं !