Wednesday, October 23, 2013

ठोकर!

"ठोकर खा के अब समझ में आया 
वो सही थे जिन्होंने कहा था -
मत लिख मोहब्बत की दास्ताँ 
देखना 
एक दिन ये अधूरी रहेगी। "
और मुँह चिढ़ा कर 
तुझ से कहेगी -
मजा आया ?
"

Monday, October 21, 2013

काश!

"अजब रंगों में गुजरी है ज़िन्दगी अपनी! 
दिलों पे राज किया-
लेकिन……  
मोहब्बत से महरूम रहे। "



तारीफ


"उनको चाहा तो मोहब्बत की समझ आई वरना 
इस लफ्ज की तारीफ ही सुना करते थे !"



नफरत!


"इक नफरत ही है-
जिसे दुनियां चंद लम्हों में जान लेती है वरना  ……  
चाहत का यकीन दिलाने में तो -
ज़िन्दगी ही बीत जाती है !"



Tuesday, October 8, 2013

इश्क!

"कैसे लोग बिता देते है 
एक जिन्दगी किसी के नाम पे 
हमने तो कई ज़िन्दगियाँ बिता दीं 
किसी के नाम पे। "



सबक!

"हमने अपनी जिन्दगी को आसान कर लिया-
किसी से माफी मांग ली
और 
किसी को माफ कर दिया। "