Tuesday, May 7, 2019

Haters or lovers

If u follow your haters u will lose
your lovers
But..
If u follow your lovers u can
change your future.

Thursday, May 3, 2018

किसान की अरदास !

"तुम फरमाते रहो ..
कहानियां अपनी सफलता की ..
मुझे दो रोटी कमाने घर से निकलना है !

तुम सुनाते रहो ...
शोखियाँ मोहब्बतों की ...
मुझे दो रोटी कमाने घर से निकलना है !

तुम बताते रहो ..
बातें देश बदलने की ..
मुझे दो रोटी कमाने घर से निकलना है !

कभी मन करे तो ...
मेरे साथ खेत पे चलना !
दो रोटी कमाने का हुनर ..
तुम्हें भी सिखा दूंगा !! "

Saturday, April 7, 2018

शिकार!

उम्र के इक पड़ाव पर ..
इक शिकार हमने भी किया था !
गोली यहां से भी चली थी ; 
गोली वहां से भी ! 
दोनों मारे गए थे ! 
सजा दोनों को मिली ! 
ज़िंदा दोनों हैं !

Wednesday, April 4, 2018

समय का हिसाब!

"उन पलों को सलाम ...
जो पल बन गए !
और ..हम जिनके सहारे जी गए !
वरना समय का हिसाब ...
कौन रख पाया है ?

समय ; यूँ ही गुज़र जाता हैं ..
मौसमों की मानिंद और ...
हम ठहरे पानी से ...
बुलबुले बन ...
उड़ जाते हैं ...
ज़िन्दगी की तपिश में !"

Tuesday, March 27, 2018

साया!!

"न ये चाँद अपनी चांदनी देगा और न सूरज अपनी तपिश ! ये सब साजिशें हैं ... तुझे गिराने की ! तय कर ...अपनी आग और चांदनी !! वर्ना इस ज़िन्दगी की दौड़ में ... इस राख और बर्फ के खेल में ... कोई जीत नहीं पाया ! हर किसी ने अंततः खोया .. अपना साया !!"

Monday, March 26, 2018

पुच्छल तारा !

"अपनी ...
छुद्र आकाश गंगा का ..
मैं ; इक नन्हा सा पुच्छल तारा !
न चमक ..न रौशनी ...
बस यूँ ही ...
लुढ़कता ढुढ़कता ..
आवारा ..
बेसहारा बंजारा !

पता ही नहीं ...
किसी से रौशनी लेनी है या
किसी को देनी ??
बस गफलतों से भरा सफर ...
मैं इक सिमटता नज़ारा ...
आवारा ,
बेसहारा बंजारा !

अपने वज़ूद की गरमी को ...
समेट कर ..
अपने अंतर्मन की धूल धूसरित दीवारों में ..
एक दिन टकरा जाऊँगा ...
धरती से ...
ठीक उन पुच्छल तारों की मानिंद ...
जो कुछ पल की चमक को ..
पाने की खातिर ...
दो पल चमक कर ..
राख बन ..
बिछ जाते हैं ..
धरती की तलहटी में !

देखना ...मैं भी ;
बिछ जाऊँगा ; इक दिन ...
इसी बाँझ धरती पर और
उर्वरा बीज बनूँगा ...
नव सृजन की संरचना का !"

Friday, February 16, 2018

मोहताज़!

हर रात अकेला हो जाता हूँ ; ऐ चाँद !!
तेरी तरह ..सैकड़ो तारों के बीच !
अपने वज़ूद की तलाश में ;
सोचते सोचते ..

पता है ..मुझे यह अच्छे से !
निज रौशनी से ही प्रकाशित हूँ ; मैं !
वरना मैं भी ..तेरी तरह ..
तारों के रोशन होने का मोहताज़ नहीं !

शुभ रात्रि !
[गौरव !]