Tuesday, June 30, 2015

शिकायत ज़िन्दगी से!

☔☔☔
बचपन में हम बहुत अमीर हुआ करते थे!!

इस बारिश में 2-3 जहाज़ हमारे भी चला करते थे !!

काग़ज़ के ही क्यों नही पर हवा में हमारे भी विमान उड़ा करते थे !!

मिट्टी-गारे का ही क्यों ना हो...हमारे भी महल किले  हुआ करते थे !!!

अब कहा रही वो अमीरी...
अब कहा रहा वो बचपन...

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है
"किस्मत" महलों में राज करती है!!

"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हूँ कि
जो कुछ दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"...

Monday, June 29, 2015

ऐसा था... मेरा प्यार!

मेरे हाथ कभी तेरे गेसुओं से नीचे फिसले नहीं..
आंसू कभी तेरी चुनरी से नीचे लुढके नहीं...
और
जज्बात कभी तुझसे मिल बहके नहीं..
ऐसा था मेरा प्यार!

थोड़ा सा सहमा सा घबराया हुआ..
थोड़ा सा कस्बाई संस्कृति से जकड़ा हुआ.. थोड़ा गंवई या backward कह लो... और
थोड़ा सा गंभीर या भावुकता से ओतप्रोत..
ऐसा था मेरा प्यार!

थोड़ा सा पावन और पवित्र..
थोड़ा सा शाश्वत और निश्छल.. और थोड़ा सा
लोक लाज लज्जा सा बंधा  हुआ... सकुचाया सकुचाया  सा.. घबराता सा.. a bit nervous सा..
ऐसा था मेरा प्यार!

थोड़ा सा Black & White वाला..
थोड़ा सा -Archies Greetings Cards वाला.. और
थोड़ा सा चिट्ठी-पत्रि वाला..
थोड़ा सा मेले या मंदिरों में मिलने मिलाने वाला... और
थोड़ा सा -मन चाही मोहब्बत पाने की धुन में -सोमवार का शंकर जी का व्रत करने वाला...
सच्ची ऐसा था -मेरा प्यार!

थोड़ी सा...
चूड़ी बिंदी या रूमाल खरीदकर तुम्हें कभी मौका देख.. प्यार से देने वाला....
तुम्हारा नाम अपने नाम से जोड़ कर किताब में लिखने वाला..
थोड़ा सा कभी कभी तुम्हारा जूंठा खाने वाला चुपके से... और
हाँ कभी कभी तुम्हारा हाथ अपने हाथ में लेने वाला..
ऐसा था -मेरा प्यार!

कभी रोने वाला..
कभी बिछड़ने वाला..
कभी मरने वाला तो कभी भूल जाने वाला..
सच्ची..
ऐसा था -मेरा प्यार!

और आज २०१५-में -अपने प्यार को सोच कर चुपचाप मुस्कुराने वाला..
facebook पर तुम्हारे बच्चों में तुम्हारी छवि तलाशने वाला..
वादों वादियों और यादों को ज़िंदा दफ़न करने की कोशिश करता... हुआ
ऐसा है मेरा प्यार! 

अल्फाज़ों में क्या बयाँ करे अपनी मोहब्बत के अफसानें,हमारे दिल में तो वो ही वो है, उनके दिल की खुदाजाने...

(गौरव!)

Wednesday, June 24, 2015

दौड़ ... The Race!

दौड़!
कभी कभी सोचता हूँ की दौड़ कहाँ तक की है ?
कभी खत्म भी होगी ये दौड़ या  .... 
ऐसे ही दौड़ते दौड़ते ख़त्म हो जायेगा सब कुछ  .... 
और पता ही नहीं चलेगा  .... 
दौड़ का प्रतिफल या निष्कर्ष ?

बचपन में स्कूल की दौड़ में  .... 
जीत या हार कुछ पलों की होती थी  … पर 
यह ज़िन्दगी की अंतहीन दौड़  .... पता नहीं 
कहाँ ख़त्म होगी  … 
और कौन- क्या पुरूस्कार देगा ?

पिता दौड़ दौड़े और पुरुस्कार बेटे को मिले  .... 
क्या यह तार्किक उत्तर है  .... 
नियति और उसके विधान का ?

धीरू भाई अम्बानी दौड़े  … पुरूस्कार मुकेश को मिले ?
जवाहर लाल नेहरू दौड़े  .... पुरूस्कार इंदिरा  मिले ?
जमशेद जी टाटा दौड़े  .... पुरूस्कार रतन टाटा को मिले ?
ऐसा क्यों है ?
और अगर ऐसा उचित है  …  तो फिर  .... 

भगत सिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद और सुखदेव की दौड़ का पुरुस्कार किसको मिला ?
महात्मा गांधी की दांडी से इंग्लैण्ड तक की दौड़ का पुरुस्कार किसको मिला ?
सुभाष चन्द्र बोस का देशप्रेम क्या अपना पुरूस्कार लेने स्वयं आया ?
या  … 
गुरुदत्त की अमर सृजनात्मक शैली का पुरूस्कार किसे मिला ?
रफ़ी साहिब की आवाज़ क्या अपना पुरूस्कार लेने फिर आई ?
या  … 
माननीय नरेंद्र मोदी के प्रयासों का प्रतिफल कौन लेगा ?

सब प्रश्न और उसके उत्तर 
आपस में उलझे  हुए हैं !

आप अपना कर्म करते हैं  .... परन्तु 
कर्म करवाता कोई और है। 

कोई ताक़त है जो प्रेरित करती है -कर्म करने को  … 
और 
प्रतिफल किसी और को मिलता  है !

सोनिया जी को किस पुण्य का लाभ मिला ?
लालू को किस बलिदान का लाभ मिला ?
नितीश ने क्या अतुलनीय किया जो सत्ता की गद्दी तक पहुंचे ?
उमर अब्दुललह ,जयाललिता से लेकर अखिलेश यादव तक  … 
समझ नहीं आता   .... 
वो कौन सी काया कल्प की दवा पी थी इनसभी ने -जिसने 
इन सभी को शीर्ष तक पहुँचाया ?

काश !वो तपस्या  के दिन फिर वापस आ जाएँ  .... 
जब माला लेकर आसन जमाकर साधना करने से  … 
भगवान प्रसन्न हो कर  … 
वरदान दे देते थे  .... 
ऐसे ही  … 
काश! हमारे भी अच्छे दिन आ जाते  … 
बिना मेहनत किये  .... 
काश  !… काश ! … 




Tuesday, June 23, 2015

Facts of Life!

तेरे बिना भी -
बदस्तूर....
चलती जा रही है -ज़िन्दगी की रेलगाड़ी... अपनी नियत पटरियों पर - छुक छुक करते हुए...
अपनी  मंजिलों की ओर!

कल तक तुझे
चाँद के पार ले चलने का दम्भ भरने वाले बाजू..
आज अपनी पकी हुई सफ़ेद दाढ़ी पर -
खिजाब लगाने में
मशरूफ हैं!

वक़्त की मार ने... बड़े
होते बच्चों के साथ..... बदल दिए हैं -
मोहब्बत के मुहावरे!

तेरे दिल की गलियों की जगह ले ली है -
कोटा... IIT और PMT ने... जहाँ
इतिहास को दोहराते हुए मुझे फिर वही अपने बच्चों से कहना पड़ रहा है...
जो कभी मेरे पिता ने मुझसे कहा था की -
"मन लगाकर पढाई करना! "

चलो कोई बात नहीं...
तुम्हें तुम्हारी ज़िन्दगी  मुबारक...
और मुझे मेरी!

कभी मिले तो...
तुम आंटी बन नमस्ते जरूर करना और
मैं अंकल बन -नमस्कार!
शुभ रात्रि!

Friday, June 19, 2015

तितलियाँ ही तितलियाँ!

Good Night Zindagi ������
Few Lines dedicated to all the Women's in the World! ������

तितलियाँ हीं तितलियाँ....
आगे पीछे तितलियाँ..
आँख चुराती तितलियाँ..
दिल मचलाती तितलियाँ
ख्वाब दिखलाती- तितलियाँ..
ये रंगीन यौवन को उमगाती तितलियाँ...
ब्रह्मचर्य से वानप्रस्थ तक साथ निभाती तितलियाँ...

तितलियाँ हीं तितलियाँ..
हवा में उड़ती पंख फैलाती तितलियाँ...
ख़्वाबों और उमंगों के आकाश को छूती तितलियाँ....
नज़र मिलाती तितलियाँ...
बलखाती-हाथ मिलाती और दुपट्टा लहराती तितलियाँ...
अज़ब गज़ब ये तितलियाँ
यह इतराती,इठलाती तितलियाँ....
यह भारत की तितलियाँ
यह भारत भाग्य विधाता की जीवंत किश्तियाँ...
यह सुहानी तितलियाँ...
यह  रंग बिरंगी बिजलियाँ..
यह तीखी मिर्चियाँ...
हाय!गज़ब ये तितलियाँ!

यह पंख फ़ड़फ़ड़ातीं तितलियाँ...
यह शर्माती तितलियाँ..
आबरू बचाती तितलियाँ..
जल्दी ऑफिस से घर जाती तितलियाँ...
यह लजाती और घबराती तितलियाँ...
हाय बिचारी तितलियाँ!

यह संस्कार सिखाती तितलियाँ...
यह टीका अबीर और गुलाल लगातीं तितलियाँ..
यह सिन्दूर निभाती तितलियाँ..
यह आंसूं छुपाती तितलियाँ..
माँ बहिन और प्रियसी बनीं यह तितलियाँ...
मन वचन और कर्म निभाती -यह तितलियाँ...
मेरी प्यारी तितलियाँ..
मेरी अच्छी तितलियाँ..
(गौरव!) ������

Monday, June 15, 2015

बारिश में दिलों की खलिश!

बारिश में दिलों की खलिश!

"बारिश में अब नहीं जाती लाइट...अब नहीं होती वो
बचपन की बारिश... जब
तीन तीन दिन तक बाढ़  में बस नहीं आती थी..

अब नहीं कोई घूमता  - अँधेरे में ; माचिस ढूढ़ने की फ़िक्र में.. मोमबत्ती जलाने को... और तेज़ आंधी में उड़े उसकी चुनरिया और वो बेफिक्री
से संभाले अपनी उमरिया..

अब नहीं कोई टकराता या डर कर गले लगता.. अँधेरे में... बादल गरजने पर...

अब नहीं कोई नहाता छत पर अपनी जुल्फें बिखेर कर.. आँखें मींच कर.. चुनरी भिगो कर.. बारिश में... खुले आकाश में.. और हम निहारा करते थे दिल मसोस कर....

अब तो बारिश भी उस बेफिक्री से नहीं होती.. जब हम हाफ पैंट में कूद जाते थे सड़क के बहते बरसाती पानी में...

अब तो कोई बारिश में घर के बरामदे में सर छुपाने को भी नहीं आता... जिसे माँ बोलती... बेटी भीग जाओगी... अंदर आ जाओ...

अब तो बादलों ने भी गड़गड़ाने की आदत छोड़ दी है... जिसकी आवाज़ से हम सिमट जाते थे.. प्यारी माँ /पापा के गले से....

लगता है.. आँखों से बरसता पानी हरा देगा बारिश के पानी को.. तोड़
डालेगा भावनाओं और जज्बातों के सारे बांधों  और तूफानों को...

सच ज़िन्दगी की उठापटक में... बहुत पीछे छूट गई है.. बारिश की फुहार...
मिटटी की सोंधी खुशबू..
पंछिओं का हड़बड़ाहट में अपने घोंसले की और लौटना.. चूजों की चिंता में..
जैसे पापा आते थे ऑफिस से भीगते हुए.. जल्दी में.. की शानू स्कूल से आया?
सच बदलते वक़्त में बदल लिया है प्रकृति ने अपना -मिजाज...
यही ज़िन्दगी है..
यही फलसफा है...
यही बालों का सफ़ेद होना है...
यही हकीकत है और फ़साना है! "
मज़ा बारिश का चाहो..
तो मेरी आँखों में आ जाओ..
क्यों की..
वो (बादल!) बरसों में कभी बरसे... और
यह (आँखें!)..
बरसो से बरसती हैं!
(गौरव!)

Sunday, June 7, 2015

Good Day Zindagi!

उस अलसाई भोर को सलाम जिसने ज़िन्दगी में आशा दी...

उन दोपहरियों को सलाम जिन्होंने ज़िन्दगी में धुप-छाओं,लपट-आंधी और पसीने से तर-बतर कर जीना सिखाया और....

उन हसीं शामों को दिल से सलाम जिन्होंने -
डूबते हुए सूरज...
घोंसले में लौटते पंछी...
मंदिरों की शाम की आरती की घंटी...
और मोहब्बत में पाकीजगी का दीदार कराया!