Wednesday, June 24, 2015

दौड़ ... The Race!

दौड़!
कभी कभी सोचता हूँ की दौड़ कहाँ तक की है ?
कभी खत्म भी होगी ये दौड़ या  .... 
ऐसे ही दौड़ते दौड़ते ख़त्म हो जायेगा सब कुछ  .... 
और पता ही नहीं चलेगा  .... 
दौड़ का प्रतिफल या निष्कर्ष ?

बचपन में स्कूल की दौड़ में  .... 
जीत या हार कुछ पलों की होती थी  … पर 
यह ज़िन्दगी की अंतहीन दौड़  .... पता नहीं 
कहाँ ख़त्म होगी  … 
और कौन- क्या पुरूस्कार देगा ?

पिता दौड़ दौड़े और पुरुस्कार बेटे को मिले  .... 
क्या यह तार्किक उत्तर है  .... 
नियति और उसके विधान का ?

धीरू भाई अम्बानी दौड़े  … पुरूस्कार मुकेश को मिले ?
जवाहर लाल नेहरू दौड़े  .... पुरूस्कार इंदिरा  मिले ?
जमशेद जी टाटा दौड़े  .... पुरूस्कार रतन टाटा को मिले ?
ऐसा क्यों है ?
और अगर ऐसा उचित है  …  तो फिर  .... 

भगत सिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद और सुखदेव की दौड़ का पुरुस्कार किसको मिला ?
महात्मा गांधी की दांडी से इंग्लैण्ड तक की दौड़ का पुरुस्कार किसको मिला ?
सुभाष चन्द्र बोस का देशप्रेम क्या अपना पुरूस्कार लेने स्वयं आया ?
या  … 
गुरुदत्त की अमर सृजनात्मक शैली का पुरूस्कार किसे मिला ?
रफ़ी साहिब की आवाज़ क्या अपना पुरूस्कार लेने फिर आई ?
या  … 
माननीय नरेंद्र मोदी के प्रयासों का प्रतिफल कौन लेगा ?

सब प्रश्न और उसके उत्तर 
आपस में उलझे  हुए हैं !

आप अपना कर्म करते हैं  .... परन्तु 
कर्म करवाता कोई और है। 

कोई ताक़त है जो प्रेरित करती है -कर्म करने को  … 
और 
प्रतिफल किसी और को मिलता  है !

सोनिया जी को किस पुण्य का लाभ मिला ?
लालू को किस बलिदान का लाभ मिला ?
नितीश ने क्या अतुलनीय किया जो सत्ता की गद्दी तक पहुंचे ?
उमर अब्दुललह ,जयाललिता से लेकर अखिलेश यादव तक  … 
समझ नहीं आता   .... 
वो कौन सी काया कल्प की दवा पी थी इनसभी ने -जिसने 
इन सभी को शीर्ष तक पहुँचाया ?

काश !वो तपस्या  के दिन फिर वापस आ जाएँ  .... 
जब माला लेकर आसन जमाकर साधना करने से  … 
भगवान प्रसन्न हो कर  … 
वरदान दे देते थे  .... 
ऐसे ही  … 
काश! हमारे भी अच्छे दिन आ जाते  … 
बिना मेहनत किये  .... 
काश  !… काश ! … 




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