दौड़!
कभी खत्म भी होगी ये दौड़ या ....
ऐसे ही दौड़ते दौड़ते ख़त्म हो जायेगा सब कुछ ....
और पता ही नहीं चलेगा ....
दौड़ का प्रतिफल या निष्कर्ष ?
बचपन में स्कूल की दौड़ में ....
जीत या हार कुछ पलों की होती थी … पर
यह ज़िन्दगी की अंतहीन दौड़ .... पता नहीं
कहाँ ख़त्म होगी …
और कौन- क्या पुरूस्कार देगा ?
पिता दौड़ दौड़े और पुरुस्कार बेटे को मिले ....
क्या यह तार्किक उत्तर है ....
नियति और उसके विधान का ?
धीरू भाई अम्बानी दौड़े … पुरूस्कार मुकेश को मिले ?
जवाहर लाल नेहरू दौड़े .... पुरूस्कार इंदिरा मिले ?
जमशेद जी टाटा दौड़े .... पुरूस्कार रतन टाटा को मिले ?
ऐसा क्यों है ?
और अगर ऐसा उचित है … तो फिर ....
भगत सिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद और सुखदेव की दौड़ का पुरुस्कार किसको मिला ?
महात्मा गांधी की दांडी से इंग्लैण्ड तक की दौड़ का पुरुस्कार किसको मिला ?
सुभाष चन्द्र बोस का देशप्रेम क्या अपना पुरूस्कार लेने स्वयं आया ?
या …
गुरुदत्त की अमर सृजनात्मक शैली का पुरूस्कार किसे मिला ?
रफ़ी साहिब की आवाज़ क्या अपना पुरूस्कार लेने फिर आई ?
या …
माननीय नरेंद्र मोदी के प्रयासों का प्रतिफल कौन लेगा ?
सब प्रश्न और उसके उत्तर
आपस में उलझे हुए हैं !
आप अपना कर्म करते हैं .... परन्तु
कर्म करवाता कोई और है।
कोई ताक़त है जो प्रेरित करती है -कर्म करने को …
और
प्रतिफल किसी और को मिलता है !
सोनिया जी को किस पुण्य का लाभ मिला ?
लालू को किस बलिदान का लाभ मिला ?
नितीश ने क्या अतुलनीय किया जो सत्ता की गद्दी तक पहुंचे ?
उमर अब्दुललह ,जयाललिता से लेकर अखिलेश यादव तक …
समझ नहीं आता ....
वो कौन सी काया कल्प की दवा पी थी इनसभी ने -जिसने
इन सभी को शीर्ष तक पहुँचाया ?
काश !वो तपस्या के दिन फिर वापस आ जाएँ ....
जब माला लेकर आसन जमाकर साधना करने से …
भगवान प्रसन्न हो कर …
वरदान दे देते थे ....
ऐसे ही …
काश! हमारे भी अच्छे दिन आ जाते …
बिना मेहनत किये ....
काश !… काश ! …
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