Tuesday, January 29, 2013

अटल जी-कैसे हैं?

मुझे कोई बताये ?
मेरे अटल जी कैसे है?
उनका स्वस्थ्य कैसा है?
उनकी दिनचर्या कैसी है?

सुनते सुनते थक गया हूँ कि-
अटल जी के कार्य काल में ये हुआ था-वो हुआ था
पर .....
अरे कोई यह भी तो बताये ......
वो अब कैसे ज़िन्दगी गुजार रहें है?

इक बिना परिवार के शख्स की ज़िन्दगी कैसी होगी?
वो भी अपनी अस्ताचल की उम्र में?
यह हर भारतीय के मन का प्रश्न है क्यों की -
अटल जी आज भी हमारे मन में बसते है और सजते है!

हाँ यह सच है-कि -
अगर अटल जी लखनऊ लोकसभा से लेटे लेटे ही चुनाव का नामांकन पत्र दाखिल कर दें ....
तो भी--
वह जीत जायँगे क्यों की -
हम भारतीय आज भी भावुक किस्म के है और
अपनी इस विशिष्ट पहचान को हम बरक़रार रखें हैं।

आप दिल्ली में हो .....
पर आज भी आप हम सभी के मन में हो वचन में हो और कर्म में हो।
शत शत नमन!



Friday, January 25, 2013

स्वर्गीय डॉक्टर रूपेंद्र खरे स्मृति प्रतिभा पुरुस्कारों का आबंटन

स्वर्गीय डॉक्टर रूपेंद्र खरे स्मृति प्रतिभा पुरुस्कारों की स्थापना 1996 में के गई थी।तब से अनवरत यह पुरस्कार इस नगर की भावी पीढी से कदम से कदम मिला कर उनके स्वप्नों को हकीकत का जामा पहनाने की कोशिश में में लगा हुआ है!
हम इस बात पे हमेशा यकीन करते हैं की-"जो शख्स अपने पहले प्रयास में सफलता प्राप्त करता है वो ज़िन्दगी जीत सकता है परन्तु जो अपने पहले प्रयास में असफल होता है वो व्यक्ति पूरा विश्व जीत सकता है क्यों की-घायल और असफल दिमाग इक सरल दिमाग से ज्यादा शक्तिशाली होता है"!
हम डॉ अब्दुल कलम की इस बात पे यकीन करते हैं कि -सपने वो नहीं जो नींद में आयें बल्कि सपने वो हैं जिन्हें पूरा किये बिना नींद न आये।

  • इस पुरूस्कार को प्राप्त करने वाले नवयुवक आज ज़िन्दगी के दौड़ में सफलता के नए नए आयाम रच रहें है।    इस वर्ष 2011-12 में  लवकुश नगर की क्लास 12 में नगर में प्रथम आने का गौरव श्री विज्ञान स्कूल के छात्र चि .कपिल शर्मा पुत्र श्री योगेन्द्र प्रकाश शर्मा को मिला है जिन्होंने 90.8% अंक प्राप्त नगर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
  • क्लास 10 th में इस वर्ष नगर में प्रथम आने का गौरव दो विधालयों के दो छात्रों को प्राप्त हुआ है।

          ज्ञान भारती स्कूल के छात्र चि .सुजीत चौरसिया पुत्र श्री .राकेश चौरसिया ने 547/600(91.17%) अंक   प्राप्त कर नगर एवम विधालय का मान बढाया।
वहीँ श्री विज्ञान हायर सेकेंडरी स्कूल के होनहार छात्र चि .संजय सिंह पुत्र श्री .करन सिंह ने भी 547/600(91.17%) अंक प्राप्त कर अपने माता-पिता एवम विधालय का मान बढाया है।  

छात्रों से आग्रह है की मंच पे आकर पुरुस्कार ग्रहण करें।

"बुंदेलखंड बदल रहा है-


"बुंदेलखंड बदल रहा है-
कभी यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का मिला जुला रूप था पर आज  -
'बुंदेलखंड ' के रूप में आपके सामने सुसज्जित है।

बालू-रेत और ग्रेनाइट की खदानों के अवैध उत्खनन या दोहन ने-
बदल डाला है-
बुंदेलखंड की फिजाओं और हवाओं को-
और .........
लिख दी है
आगे आने वाली पीढियो के संघर्ष की कथा का मजमून।
क्यों कि ....
बाढ़,प्राकृतिक आपदाओं और जानलेवा बीमारियों का
हमला होना तय है।

धन्य हैं वे रेत-ग्रेनाइट माफिया जो-
इस भू-सम्पदा को निकल कर-पूरी रात हमारी छाती पे अपने ट्रक दौडाते हैं और -
दोहन कर रहें हैं-हमारी -
शारीरिक,मानसिक और प्राकृतिक शाक्तिओं का
पर बदले में-
दिखा रहें हैं वो दिवा-स्वप्न जो
इस जन्म में तो हम बुन्देल्खंडियो ने देखे ही नहीं थे।

अभी हाल में ही इक 20 लाख की चार पहियों वाली गाड़ी-फोर्ड एंडीवर और लांस क्लूसनर
बुंदेलखंड की लवकुश नगर तहसील के कंठी-मोहल्ले में रुकी
कुछ बच्चों ने उसे छू के देखा और अल्हड किशोरों ने अपने मोबाइल से फोटो खींची
हमने पूंछा-क्या हुआ ?ये गाड़ी किसकी हैं?क्यों खड़े हो?हटो भीड़ मत लगाओ?
तो उन किशोरों ने जवाब दिया-
दादा !ये गाड़ी रेत माफ़िओं की हैं और हम इनका स्वागत कर रहें है क्यों कि -
पता नहीं इस जन्म में इतनी महंगी गाड़ी देखने और छुने को मिले या न मिले?

हाल हे में कराए गए इक प्राइमरी सर्वे में-
75%बच्चों ने संविदा शिक्षक या पटवारी बनने की इक्छा जताई है !
और 10% ने ठेकेदार या रेत और गिट्टी का थोक कम करने की बात कही!
ये अच्छी बात है -आत्मनिर्भर होने की।
परन्तु दुःख इस बात का है कि -
हमारे किसी भी बच्चे ने -आईएएस,आईपीएस या आईएफएस बनने की बात नहीं कही?
जरा सोचिये-
हम तो हम अब अगली पीढ़ी भी दूषित हो रही है!
आईए इस गणतंत्र दिवस पे-
उन सपनों को बचाने की शपथ लें-
जो हमारे कर्ण धारों ने कभी देश को स्वतंत्र कराते वक़्त देखे थे!

आओ बचा लें अपने बुंदेलखंड  को ........
आओ बचा लें अपने बच्चों के स्वप्नों की उड़ान को ........

आओ बचा लें चरण पादुका के शहीदों के बलिदान को ....
आओ बचा लें शहीद भगत सिंह की शान को !"

"हवाओं से कह दो अपनी औकात में रहें-
हम बुंदेलखंड  के वाशिन्दें हैं-
हम पैरों से नहीं ........
होंसलों से उड़ान भरते हैं!"