Friday, January 25, 2013

"बुंदेलखंड बदल रहा है-


"बुंदेलखंड बदल रहा है-
कभी यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का मिला जुला रूप था पर आज  -
'बुंदेलखंड ' के रूप में आपके सामने सुसज्जित है।

बालू-रेत और ग्रेनाइट की खदानों के अवैध उत्खनन या दोहन ने-
बदल डाला है-
बुंदेलखंड की फिजाओं और हवाओं को-
और .........
लिख दी है
आगे आने वाली पीढियो के संघर्ष की कथा का मजमून।
क्यों कि ....
बाढ़,प्राकृतिक आपदाओं और जानलेवा बीमारियों का
हमला होना तय है।

धन्य हैं वे रेत-ग्रेनाइट माफिया जो-
इस भू-सम्पदा को निकल कर-पूरी रात हमारी छाती पे अपने ट्रक दौडाते हैं और -
दोहन कर रहें हैं-हमारी -
शारीरिक,मानसिक और प्राकृतिक शाक्तिओं का
पर बदले में-
दिखा रहें हैं वो दिवा-स्वप्न जो
इस जन्म में तो हम बुन्देल्खंडियो ने देखे ही नहीं थे।

अभी हाल में ही इक 20 लाख की चार पहियों वाली गाड़ी-फोर्ड एंडीवर और लांस क्लूसनर
बुंदेलखंड की लवकुश नगर तहसील के कंठी-मोहल्ले में रुकी
कुछ बच्चों ने उसे छू के देखा और अल्हड किशोरों ने अपने मोबाइल से फोटो खींची
हमने पूंछा-क्या हुआ ?ये गाड़ी किसकी हैं?क्यों खड़े हो?हटो भीड़ मत लगाओ?
तो उन किशोरों ने जवाब दिया-
दादा !ये गाड़ी रेत माफ़िओं की हैं और हम इनका स्वागत कर रहें है क्यों कि -
पता नहीं इस जन्म में इतनी महंगी गाड़ी देखने और छुने को मिले या न मिले?

हाल हे में कराए गए इक प्राइमरी सर्वे में-
75%बच्चों ने संविदा शिक्षक या पटवारी बनने की इक्छा जताई है !
और 10% ने ठेकेदार या रेत और गिट्टी का थोक कम करने की बात कही!
ये अच्छी बात है -आत्मनिर्भर होने की।
परन्तु दुःख इस बात का है कि -
हमारे किसी भी बच्चे ने -आईएएस,आईपीएस या आईएफएस बनने की बात नहीं कही?
जरा सोचिये-
हम तो हम अब अगली पीढ़ी भी दूषित हो रही है!
आईए इस गणतंत्र दिवस पे-
उन सपनों को बचाने की शपथ लें-
जो हमारे कर्ण धारों ने कभी देश को स्वतंत्र कराते वक़्त देखे थे!

आओ बचा लें अपने बुंदेलखंड  को ........
आओ बचा लें अपने बच्चों के स्वप्नों की उड़ान को ........

आओ बचा लें चरण पादुका के शहीदों के बलिदान को ....
आओ बचा लें शहीद भगत सिंह की शान को !"

"हवाओं से कह दो अपनी औकात में रहें-
हम बुंदेलखंड  के वाशिन्दें हैं-
हम पैरों से नहीं ........
होंसलों से उड़ान भरते हैं!"







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