Tuesday, April 16, 2013

"अयोध्या का वास"



मेरे दिल की ज़मीन को ख्वाबों  का आकाश चाहिए, 
उड़ान भर सकूँ या नही , किंतु पँखो के होने का अहसास चाहिए...... 

यू ही रात और दिन में -मौसम दर मौसम बीत रही है यह जिंदगानी ,
मेरे अनसुलझे जीवन के प्रेम पुष्पों को एक अहेसास चाहिए।

मेरी अनबुझी प्यास को बस एक "मधुमास" चाहिए. 



लेकर तेरा हाथ, हाथो में काट सकूँ बाक़ी ज़िंदगी का सफ़र.
 मेरे डग-मग करते क़दमो को बस तेरा विश्वास चाहिए. 

एक दूसरे की उँगलियाँ गुथीं हों एक दुसरे के हाथों में 

और हम दोनों के कदम भी उठें एक ही दिशा की ओर 
बस ऐसा मन में आत्म -विश्वास चाहिए।

साँझ होते ही तन्हा उदास हो जाती है मेरी ज़िंदगी, 

अब उन्ही तन्हा शामों को तेरे प्यार की बरसात चाहिए. 

खो जाना चाहता हूँ तेरे चुनरी की सोंधी खुशबू में 

जहाँ तेरी जुल्फों की सरसराहट सोने न दे मुझे 
मै ऐसी शिकवा शिकायतों की रात चाहता हूँ।

कट चुका है अब तो मेरा" बनवास" बहुत ,,,,,,,

 मेरे बनवास को अब "अयोध्या का वास" चाहिए. !! 

जहाँ मिल जाए तेरी भाग्य की रेखाएँ मेरी किस्मत की लकीरों से 
मै इतनी ताक़त और बाहुपाश से तुझे थामना चाहता हूँ 
मै तुझे अपने से बांधना चाहता हूँ!
मै तुझे अपने जीवन से थामना चाहता हूँ!

राम मिलाई जोड़ी पंडित जी राम मिलाई जोड़ी!

राम मिलाई जोड़ी पंडित जी राम मिलाई जोड़ी!

लवकुश नगर के सिजई ग्राम पंचायत से लगे हुए ग्राम बेहटा निवासी रजुआ पुत्र स्व.मैकू अहिरवार जन्म से नेत्रहीन है।गरीबी और जीवन यापन की मजबूरियों के चलते इस 25 वर्षीय युवा ने कुछ वर्ष पहले पलायन कर दिल्ली में रोजगार पाया और मोमबत्ती बनाने लगा।इसे किस्मत का लिखा कहेंगे की इलाहाबाद निवासी जन्म से नेत्रहीन शिवानी रजुआ को मिली और "तेरे सुख अब मेरे -मेरे दुःख अब तेरे "की तर्ज पे दोनों ने सात जन्मों का रिश्ता सात फेरों को अपना कर स्वीकार कर लिया।आज जब पहली बार वह अपनी धर्म पत्नी को गाँव-ससुराल की सरजमीं पे लाया तो गाँव वालों ने आत्मीय स्वागत किया व सिजई सरपंच संजय सिंह एवम सचिव सुरेश बिदुआ ने बताया कि रजुआ को अति गरीबी की सहायता प्रति माह मिलती है जो उसके खाते में जमा है व प्रयास किया जायगा की धर्म पत्नी शिवानी को भी सहायता मिल सके।दोनों पति पत्नी उत्साहित है कि मुख्यमंत्री जी चंदला आ रहे है और उनसे बताएँगे कि 150/-रूपए प्रति माह की सहायता बहुत कम है और नेत्रहीनों के लिए कुछ ऐसी घोषणा करें कि ये सहायता दया बन कर न रह जाये।

सात हज़ार रूपए में मक्का और मदीना शरीफ .......

सात हज़ार रूपए में मक्का और मदीना शरीफ .......
शेख मौला खान(89 वर्ष) ने बीते दिनों को याद करते हुए अपनी हज यात्रा को याद किया और पोरों पे ढलक आये आसूओं के सैलाब को पौंछ लिया।जब हमने पूंछा कि ये आंसूं किस बात के?तो जवाब मिला सात हज़ार रूपए में अल्लाह का दीदार करने की याद आ गई जब पानी के जहाज से वर्ष 1951 में मक्का-मदीना शरीफ का दीदार किया था।आज 90 वर्ष की आयु में सात हज़ार रूपए में हाजी बनाना असंभव है।जमाना कितना बदल गया है और अब तो हज करना बस गरीब का ख्वाब बन कर रह गया है।काश वह दिन लौट आयें जब गुढ़ा गाँव से महोबा बस से गया था एवम महोबा से झाँसी और झाँसी से बम्बई की रेल गाड़ी की यात्रा।फिर चालीस दिन की पानी के जहाज से मक्का-मदीना शरीफ की यात्रा।और मदीना शरीफ में 2 महीने रुकना फिर वतन वापसी।
अब तो बस रहमत की यादें है।आमीन आमीन आमीन।।
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केन की रेत का रंग लाल होने लगा है !

लवकुश नगर का माहौल बदल रहा है!कभी भी हो सकते है हादसे!

   केन की रेत का रंग लाल होने लगा है !

लवकुश नगर!विगत एक माह से नगर में माहौल तेज़ी से बदल रहा है।चूँकि लवकुश नगर करोड़ों रुपये की लागत की रेत खदानों को उत्तर प्रदेश पहुँचाने का प्रमुख मार्ग है एवम रेत की नीलामी ने जहाँ एक ओर शासन को रुपयों की बरसात कर दी  है वहीँ अपनी पूंजी निकालने व मुनाफे के लिए ठेकेदारों ने असामाजिक तत्वों की ब्रिगेड खडी करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं,ताकि साम दाम दण्ड और भेद से नीलामी से फ़ायदा उठाया जा सके।इस कड़ी में नगर में असामाजिक तत्वों का जमा वाडा होने की आशंका है एवम अवैध असलाहे भी आसानी से मिलने की सुगबुगाहट है।केन की रेत का रंग लाल होने लगा है और इसका खामयाजा समूचे गौरिहार-बारीगड़-सरवई एवम चंदला के नागरिकों को झेलना पड़ रहा है।सोलह चक्के का बड़ा ट्राला और बालू से भरे हुए ट्रकों के नीचे दुर्घटना ग्रस्त होना आम बात हो गई है।साईकिल-मोटर-साईकिल से सुरक्षित सलामत घर वापस आना अब मुश्किल लगने लगा है।अभी हाल में ही चंदला में पिता-पुत्र की दुर्घटना में अपनी आँखों के सामने पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को ट्रक से घिसट के प्राण त्यागते देखा।भारी वाहन के लाइसेंस धारी तो छूट जाते है और दे जाते है दर्द ज़िन्दगी भर सिसकने को!लवकुश नगर के नए बस स्टैंड के पीछे जटुआ मोहल्ला में अवैध हथियारों के सौदे होना आम बात बनती जा रही है।नगर पंचायत को चाहिए कि नए लोगों के बसने पे नजर रखे एवम पुलिस शांति समिति की बैठकों में आम जन मानस को उचित माध्यम से सन्देश दे कि असामाजिक तत्वों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जायगा।बिना टैक्सी परमिट के लगभग 50 बोलेरो-स्कार्पिओ व टाटा सूमो वाहन इस नगर में लापरवाही से बुकिंग कर रहें हैं एवम वह दिन दूर नहीं जब प्रशासन हादसा हो जाने के बाद -जाँच का आश्वाशन देगा एवम उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाएगा।गाँधी चबूतरे के पास अथवा महोबा रोड पर ऐसे वाहन देखना आम बात है और पुलिस को चाहिए कि ऐसे वाहनों को आम सड़क पे खड़ा न होने दे एवम सम्झायेश दे कि बिना टैक्सी परमिट के किराये पे वाहन चलाना अपराध है।आम जनता ने मांग की है कि भारी वाहनों की  "नो -एंट्री " का समय रात्रि साढ़े-दस बजे तक किया जाये क्यों कि शादियो का समय शुरू हो रहा है एवम अधिकतर मैरिज हाउस मुख्य मार्ग पे स्थित हैं व रात्रि में दुर्घटना का अंदेशा हमेशा अधिक रहता है।   

Monday, April 8, 2013

समय.....




समय के साथ सब कुछ बदल गया-
कल तक के हकीकत के सपने- 
आज उनीदीं आँखों के ख्वाब बन चुके है।


  • सबसे पहले कैरियर सवारने की कोशिश की-

          वो रेत की भांति फिसल गया।


  • फिर प्यार सँभालने की नटखट कोशिश की 

          वो भी कुछ खटकती आँखों द्वारा भटका दिया गया।


  • इतना सब झेल चुकने के बाद अपने पापा के लिए कुछ करने की सोची 

          पर……
          ईश्वर ने उन्हें ही हमसे छीन लिया
          और हमे मिली बचपन में माँ से बिछड़ने के बाद
          प्यारे पापा से बिछड़ने की सजा-

रह गए दो भाई-
बस….
पापा की फोटो पे माला अर्पित करने को।

पर यकीन रखो….
"हम दोनों टूटे नहीं है और हमारे पंख अभी भी परवाज़ बन उड़ रहें हैं।
देख लेना .....
हम सार्थक करेंगे ....
अपना जन्म,
अपनी परवरिश,
और…
अपना जीवट।"