मेरे दिल की ज़मीन को ख्वाबों का आकाश चाहिए, उड़ान भर सकूँ या नही , किंतु पँखो के होने का अहसास चाहिए......
यू ही रात और दिन में -मौसम दर मौसम बीत रही है यह जिंदगानी ,
मेरे अनसुलझे जीवन के प्रेम पुष्पों को एक अहेसास चाहिए।
मेरी अनबुझी प्यास को बस एक "मधुमास" चाहिए.
लेकर तेरा हाथ, हाथो में काट सकूँ बाक़ी ज़िंदगी का सफ़र.
मेरे डग-मग करते क़दमो को बस तेरा विश्वास चाहिए.
एक दूसरे की उँगलियाँ गुथीं हों एक दुसरे के हाथों में
और हम दोनों के कदम भी उठें एक ही दिशा की ओर
बस ऐसा मन में आत्म -विश्वास चाहिए।
साँझ होते ही तन्हा उदास हो जाती है मेरी ज़िंदगी,
अब उन्ही तन्हा शामों को तेरे प्यार की बरसात चाहिए.
खो जाना चाहता हूँ तेरे चुनरी की सोंधी खुशबू में
जहाँ तेरी जुल्फों की सरसराहट सोने न दे मुझे
मै ऐसी शिकवा शिकायतों की रात चाहता हूँ।
कट चुका है अब तो मेरा" बनवास" बहुत ,,,,,,,
मेरे बनवास को अब "अयोध्या का वास" चाहिए. !!
मै इतनी ताक़त और बाहुपाश से तुझे थामना चाहता हूँ
मै तुझे अपने से बांधना चाहता हूँ!
मै तुझे अपने जीवन से थामना चाहता हूँ!
