Monday, April 8, 2013

समय.....




समय के साथ सब कुछ बदल गया-
कल तक के हकीकत के सपने- 
आज उनीदीं आँखों के ख्वाब बन चुके है।


  • सबसे पहले कैरियर सवारने की कोशिश की-

          वो रेत की भांति फिसल गया।


  • फिर प्यार सँभालने की नटखट कोशिश की 

          वो भी कुछ खटकती आँखों द्वारा भटका दिया गया।


  • इतना सब झेल चुकने के बाद अपने पापा के लिए कुछ करने की सोची 

          पर……
          ईश्वर ने उन्हें ही हमसे छीन लिया
          और हमे मिली बचपन में माँ से बिछड़ने के बाद
          प्यारे पापा से बिछड़ने की सजा-

रह गए दो भाई-
बस….
पापा की फोटो पे माला अर्पित करने को।

पर यकीन रखो….
"हम दोनों टूटे नहीं है और हमारे पंख अभी भी परवाज़ बन उड़ रहें हैं।
देख लेना .....
हम सार्थक करेंगे ....
अपना जन्म,
अपनी परवरिश,
और…
अपना जीवट।"


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