Saturday, November 17, 2012

Shri. Bala Sahib Thakrey!



Shri. Bala Sahib Thakrey!

We will Miss U Sir!We will recall U Sir!We will Love U Sir!Bye.....Bye.....Bye.....



Lets pray to the all mighty to rest his "Soul" in Peace!
Long Live Bala Sahib!

B-Bold Personality.
A-Arrow & Straight forward Attitude.
L-Lion of Maharashtra.
A-Attitude always positive.

S-Secure Maharashtra Secure Hindu!
A-Arrogant for the Interest of the Hindus.
H-Hindu by Soul & Blood.
I-Intelligent Journalist & Cartoonist!
B-Bold for the Truth.

T-Truth Loving.
H-Honest.
A-Awesome Looks.
K-King Size Life
R-Royal till the End.
E-Elegant in Style.
Y-Youth Power.

Thursday, November 15, 2012

चित्र गुप्त दोज मिलन



आज लव कुश नगर में आयोजित चित्र गुप्त दोज मिलन एवम यम द्वितिया कार्यक्रम पुरानी तहसील में स्थित हनुमान जी के मंदिर में आयोजित किया गया!कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री देवी प्रसाद खरे ने की!कार्यक्रम सफल रहा और सभी ने मंदिर निर्माण  के विषय में चर्चा की !











Saturday, November 3, 2012

"सूरज को चुनौती देना?

"सूरज को चुनौती देना?
उसकी रौशनी को नापना?
उसके तेज़ को आंकना?
और उसकी उर्जा को जांचना?
सिर्फ एक विज्ञानिक क्रिया है
कोई-
सामाजिक,सांस्कृतिक या राजनैतिक प्रयोग नहीं
जिसके दम पर हम
कोई निष्कर्ष निकालने का प्रयास करें
और सन्देश दें-भावी मानवता को -
सूरज से बच कर रहने को!

आज हमारे देश में
सूरज-चन्द्रमा-और ध्रुव तारे पर  ;
सत्य-निष्ठां,ईमानदारी,कर्तव्य और जिम्मेदारी पर
 प्रश्न चिन्ह लगाना और
चुनौती देना इक आम बात हो गई है
और अगर हालात नहीं सुधरे तो वो दिन दूर नहीं
जब हम भगवान् पर भी प्रश्न -चिन्ह लगा देंगे
और
उसके अस्तित्व को ही चुनौती देने से भी नहीं डरेंगे ?

भ्रष्टाचार के तालाब में
अपनी अपनी जवानी के दिनों में
सभी ने गोता लगाया
किसी ने तर्क दिया कि -
वो डूबते को बचा रहा था
किसी ने कहा कि वो समुन्दर में गहरे पानी में गोता  लगा कर मोती ढूडने का प्रयास कर रहा था
और किसी ने कहा की-
वह तो बस खड़ा था;हवा कि  तेज़ आंधी आयी और पैर फिसल गया और तालाब में गिर गया

अपने अपने तर्क
अपनी अपनी सफाई

अपने अपने कुतर्क
अपनी अपनी जग-हंसाई

किसी ने इज्ज़त फंसाई
और किसी ने इज्ज़त गँवाई

हकीकत तो यह है कि -आजकल टीवी  पे
अपने देश के इन तथा-कथित कर्णधारों को देख कर बरबस याद आ जातें हैं-
महाभारत के शिखंडी और रामायण की शूर्पनखा और लगता है कि फिर कोई
श्री कृष्णा और श्री राम अवतरित हो कर -
इन सब को तार  कर -
पृथ्वी को प्रदुषण से मुक्त करें!

केजरीवाल को गाली देने से अथवा--
मनीष सिसोदिया को धमकाने से-
ख़त्म नहीं हो जाता-
इन कोरवों का पाप!
और देख लेना धरती माता अपने वजूद की रक्षा के लिए -
खुद थोडा सा हिलेंगी और-
भूकंप तथा सुनामी की आंधी ख़त्म कर देगी-
इन वजनदार सज्जन बोझिल लोगों को !"
  

Friday, November 2, 2012

शाश्वत? निर्मल? अमर? पावन? या पवित्र?

 "तुम हमेशा मुझ से आगे रहती हो-
प्रेम में,समर्पण में और पूजा में। 

क्यों कि -

तुम्हारा प्यार मेरे प्यार से ज्यादा है। 
और- 
तुम बहुत आगे हो -बहुत आगे .......
भगवान् और पूज्य पापा से बातें करने में-
और-
उनसे मेरे लिए सब-कुछ मांगने में।।

यही कुछ चिरंतन सत्य हैं जो बनाते हैं तुम्हें -
दुनिया से बिलकुल अलग और अजब।

तुम्हारे प्यार को क्या कहूं???
शाश्वत? निर्मल? अमर? पावन? या पवित्र?

कुछ समझ नहीं आता क्यों कि -
मै ठहरा टेढ़ा-मेढ़ा "complicated" इन्सान और कहाँ तुम?
 मेरी सिर्फ मेरी ......
इस जन्म में मेरी .........
उस जन्म में भी मेरी ...........
और अगले जन्म जन्मान्तरों में भी सिर्फ मेरी!

मै इस लायक नहीं था कि -तुम मुझे मिलो-या 
तुम मुझे सिलो ........
तुम मुझे लिखो
या जन्मो-जन्मो तक 
मुझे हर जन्म में मिलो।।
पर .....
तुम मुझे मिलीं;
और ....
यही बात कहती है कि -
जीवन कर्म के साथ भाग्य प्रधान भी होता है।
जीवन जन्म-जन्मान्तरों से बंधा हुआ है।
और-
भगवान सबका है!!"