Sunday, April 27, 2014

Fly....

"परिंदो  को  नही  दी  जाती 
तालीम  उड़ानों  की-
वो  खुद  ही  तय  करता  है -
मंजिल  आसमानों  की!

रखता  है   जो  हौसला- 
आसमान  छूने  का!
उसको  नही  होती  है
परवाह  गिर  जाने  की!"

Monday, April 14, 2014

Dignity of Love!

"मोहब्बत के इम्तिहान में -
हम फेल हो गए ;तो क्या हुआ?
ज़िन्दगी के इम्तिहान में                            
हम पास तो हुए!
तू गुलज़ार है -अपनी ज़िन्दगी में!
और हम भी आबाद है -अपनी ज़िन्दगी में!
न तूने कभी अपनी मोहब्बत पे फिकरे कसे,
और..
न हमने कभी अपनी मोहब्बत के कसीदे पढ़े!
क्यों की -
हम दोनों जानते है की -
मोहब्बत रूहानी होती है;
जिस्मी नहीं!
असली मोहब्बत का इम्तिहान तो अब शुरू हुआ है जब -
हम दोनों की ख़ामोशी ही
हमारी मोहब्बत की
मिलकियत है! "
आमीन!

Friday, April 11, 2014

गुज़र और बसर

गुज़र  और बसर!

तुम अपनी राह पे हो और हम अपनी राह पे !  

तुम अपनी बसर कर रही हो और
हम अपनी गुज़र कर रहे हैं!

हमने अपनी ज़िन्दगी तुम्हें नज़र कर दी और
तुमने अपनी रुस्वाइयां हमें सितम कर दी!

इतना सब हो जाने के बाद भी...
भूले नहीं हैं हम दोनों वे मोहब्बत के रीति रिवाज जो इक दूसरे को हम दोनों ने पढ़ाये थे!

शयद अलविदा कहने की आदत अभी तुम्हारी
गई नहीं?
कितने धीरे से मुझे भी तो अलविदा कह कर
यही कहा था न -"मुझे भूल जाना! "

तभी तो कारवां गुजरने के बाद का गुबार देखने हर साल होली पे पीहर आती हो और -
फिर उस छत की मुंडेर पे जाती हो जहाँ से मेरे सपनों  का खंडहर दीखता है?

हर शाम अब भी डूबते सूरज को निहारती हो?
फलक से ओझल होते पंछिओं को देखती हो?
बदली नहीं हो न बिलकुल?
न बदलोगी
कभी!
क्यों की मोहब्बत मेरी थी!

इतने साल बाद इतना ही कहूँगा की -

"खंडहर में कुछ दिए हैं
टूटे हुए से....
उन्हीं से काम चलाओ प्रिय,
बहुत उदास है -रात! "

Monday, April 7, 2014

समय !



"समय के एक तमाचे की देर है प्यारे, 

 मेरी फ़क़ीरी भी क्या

,
तेरी बादशाही भी क्या....!!!!"

जिन्दगी!



"जिन्दगी को मंजिलों की जरुरत क्या है?

वक्त हर मंजिल आसान बना देता है!

खतम नही होता कोई किसी से जुदा होकर-


ये "वक्त" उसे भी जीना सिखा देता है..!

माँ ! आज तुम्हारी बरसी है !


माँ !आज तुम्हारी बरसी है !
                ( 08 अप्रैल 1971 )


क्या करूँ ?
कहाँ जाऊं ?
कुछ समझ नहीं आता !

आप ऐसे समय पे चली गईं जब -
आपके  शानू !
आपके आशीष !
बहुत छोटे थे।

इतने छोटे कि -मुझे नहीं याद -
तुम्हारा आँचल !
तुम्हारी ममता !
तुम्हारा वात्सल्य !
तुम्हारी डांट और
तुम्हारा आशीर्वाद  ……

बस एक 43  साल पहले की डायरी मिली है -
जिसमे -
आपने लिखा है -पापा के नाम कि -
"मेरे बच्चों को अच्छा बनाना
और
पापा ने आपसे वादा किया है कि -
"तुम्हारे दोनों निशानियों को अच्छा बना के
"मैं " भी वहीँ सोऊंगा
जहाँ 'तुम' सो रही हो !"
और सच माँ !
आज आप और पापा
वहीँ चिरनिंद्रा में लेटे हैं -
जहाँ -
आप दोनों ने उस डायरी में
वचन लिखा या दिया था !

जब कोई अपनी माँ के बारे में बताता है तो -
मन कहता है कि -काश तुम होतीं !

एक दिन आपकी प्यारी पोती ने अनायास बोल दिया कि -
पैर छुओ मैं तुम्हारी माँ हूँ तो
अनगिनित प्रश्न कालकलवित फिर जी उठे !

माँ !
सच मैंने तुम्हें 'तस्वीरों ' से अहसास किया है कि -
तुम मेरी माँ हो !
कभी सोचा है आपने -
कैसे जीता होगा वो बेटा जिसके पास अपनी माँ की-
माँ के साथ कोई तस्वीर न होगी ?
तुम्हारी कसम माँ !
पिछले कई सालों से -
दूसरों से -
तुम्हारी फोटो यदि हो तो देने का  आग्रह करता हूँ !

बस माँ  …
इतना कह सकता हूँ कि -
तमाम झंझावतों के बीच  ……
तमाम फ़ितरतों के बीच  …
तुम्हारे बेटे  …
सुखी है पर
ज़िंदगी में एक ऐसा दुःख है जो हमेशा हमेशा के लिए
दुःख ही रहेगा कि -
"आप और पापा"
हमारे साथ नहीं हैं पर शायद -
यही नियति है जो-
बदस्तूर अनवरत चल रही है ;
समय के साथ और आप दोनों की उस डायरी के साथ।

आंसुओं के साथ -
आपके और पापा के आशीर्वाद के साथ -
आपके नाती और नातिनों के साथ -
बहुओं के साथ -
आपके -
शानू /आशीष

Wednesday, April 2, 2014

8 superb sentences:

8 superb sentences:

Shakespeare:
Never play with the feelings
of others because you may
win the game but the risk is
that you will surely lose 
the person for a life time.

Napoleon:
The world suffers a lot. Not
because of the violence of
bad people, But because of
the silence of good people!

Einstein:I am thankful to all those
who said NO to me It's
because of them I did it
myself.

Abraham Lincoln:If friendship is yr weakest
point then you are the
strongest person in the
world.

Shakespeare:Laughing faces do not
mean that there is absence
of sorrow! But it means that
they have the ability to deal
with it.

William arthur:Opportunities are like
sunrises, if you wait too
long you can miss them.

Hitler:When you are in the light,
Everything follows you, But
when you enter unto the
dark, Even your own shadow
doesn't follow you.

Shakespeare:Coin always makes sound
but the currency notes are
always silent. So when yr
value increases keep quiet.

Zindagi!

Add caption
"बहुत करीब से देखा है ज़िन्दगी को 
ज़िन्दगी हमेशा मौका देती है! 

बहुत करीब से देखा है खुदा की बंदगी को -
मौला हमेशा रहम करता है! 

बहुत करीब से देखा है सादगी को -
हमेशा सुकून देती है! 

बहुत करीब से देखी है आवारगी -
हमेशा फितरत देती है!

बहुत करीब से देखा है गन्दगी को -
हमेशा दरिंदगी देती है!

और आखिर में -
बहुत करीब से देखा है दोस्ती को -
हमेशा ज़िन्दगी देती है! "

Ethics of War!


"मैं दुश्मनों से भी खुद्दारी की उम्मीद रखता हूँ।

 सर  किसी का भी हो ....

.
कदमो में झुका अच्छा नहीं लगता।।"



एक आम मतदाता जो साधारण किसान है -उसकी नज़र से मोदी :



एक आम मतदाता जो साधारण किसान है -उसकी नज़र से मोदी :

मुझे नहीं मालूम
मोदी  अच्छे है कि नहीं ?
मोदी सच्चे हैं कि नहीं ?

मैंने नहीं देखा मोदी को !
मैंने नहीं सोचा मोदी को !
मैंने नहीं चाहा मोदी को !

मैंने नहीं थोपा मोदी को!
मैंने नहीं रोपा मोदी को !
मैंने नहीं सौंपा मोदी को !

बस.…
मुझे इतना मालूम है कि -
उपलब्ध समसाम्यक परिस्थितयों में -
बनने वाले उपलब्ध प्रधानमंत्रिओं में -
मोदी !सबसे प्रासंगिक हैं !
मोदी सबसे उपयुक्त हैं !

मोदी -लगता है जीवट वाला है !
मोदी -लगता है हमारा नेता है !
मोदी -लगता है जब भी देश के लिए बोलेंगे तो आवाज़ दमदार होगी और लगेगा कोई देश का राजा बोल रहा है !
मोदी -सटीक ,स्पष्ट ,निर्भीक ,जांबाज़ और थोडा आम नेताओं से हटकर !

मुझे मालूम है और विश्वास है कि -
जब कभी पाकिस्तान पर बोलेंगे तो आवाज़ दमदार होगी !
जब कभी चीन की हरकतों पे आवाज़ उठाएंगे तो आवाज़ में दब्बू पन  या डरपोक पन नहीं होगा !
जब कभी अमरीका में बोलेंगे तो लगेगा कि -भारत की ताकत बोल रही है !

जब इतनो को देख लिया -
इतनो को सह लिया -
इतनों को झॆल लिया -
तो फिर -
मोदी क्यों नहीं ?

न कोई प्रेम कहानी ?
न कोई भ्रष्टाचार की कहानी ?
न कोई शकुनी जैसी हंसी ?
न कोई कौरवों जैसा षड्यंत्र ?
और  .......
न कोई पंडा न पुजारी ?
न कोई मौलवी न पादरी ?

फिर   .......
इस बार -
मोदी क्यों नहीं ?