Monday, April 14, 2014

Dignity of Love!

"मोहब्बत के इम्तिहान में -
हम फेल हो गए ;तो क्या हुआ?
ज़िन्दगी के इम्तिहान में                            
हम पास तो हुए!
तू गुलज़ार है -अपनी ज़िन्दगी में!
और हम भी आबाद है -अपनी ज़िन्दगी में!
न तूने कभी अपनी मोहब्बत पे फिकरे कसे,
और..
न हमने कभी अपनी मोहब्बत के कसीदे पढ़े!
क्यों की -
हम दोनों जानते है की -
मोहब्बत रूहानी होती है;
जिस्मी नहीं!
असली मोहब्बत का इम्तिहान तो अब शुरू हुआ है जब -
हम दोनों की ख़ामोशी ही
हमारी मोहब्बत की
मिलकियत है! "
आमीन!

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