खजुराहो! खजुराहो मे आयोजित पर्यटन से जुडी हुई 'इन्वेस्टर्स मीट' के दौरान जब प्रदेश के दिग्गज राजनीतिज्ञ एवं पर्यटन-विद-खजुराहो के इक पंच-सितारा होटल के प्रांगन मे प्रदेश एवं खजुराहो में पर्यटन के बढ़ावे तथा समाज के निचले तबके तक इसका लाभ पहुचाने पर चिंतन करेंगे तब इस नगर का आम आदमी अपनी रोज़-मर्रा की समस्याओं से जूझने मे परेशान होगा!पांच सितारा संस्कृति के होटलों मे विराजमान मध्य प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभागों के सरमाए-दारों एवं आला अफसरों तक इस बस्ती का आम आदमी तथा आम 'बिज़नस-मेन' अपनी आवाज़ कैसे भेजे; इस जुगत मे रहेगा!ऐसी अनेक समस्याएं हैं जिनसे यहाँ का आम आदमी रोज सुबह से शाम तक संघर्ष करता है पर महंगी कारों के नीचे उसकी आवाज पिस कर रह जाती है!इस आलेख की इतनी भूमिका बनाने के बाद जो समस्या सबसे ज्यादा मुखर रूप से उभरती है वह है -पश्चमी मंदिर समूह के चारों तरफ फ़ैली -'साइलेंट ज़ोन' की!मंदिरों का छरण रोकने के लिए इस समूह के सामने से निकली प्रमुख सड़क को पूरे दिन के लिए बंद कर दिया जाता है!रात को आम जनता जब अपने घोंसले में पहुँच जाती है तब नियम शिथिल कर के यह रास्ता खोल दिया जाता है कि खजुराहो के आम वाशिंदे को दिक्कत न हो!देखने की एवं काबिले-गौर बात यह होगी कि -'होटल ललित टेम्पिल' से आने-जाने के लिए जिला-प्रशासन पश्चमी मंदिरों के समूह के सामने की सड़क से- मंदिरों के छरण की चिंता किए बिना मुख्य-अतिथि तथा देश के बड़े बिज़नस-मैनो को गुजरने देते है या फिर औपचारिक 'बाई-पास ' का उपयोग करते है?आप खजुराहो के नागरिकों को पर्यावरण एवं अनुशासन का पाठ पढ़ा कर उनकी जीने एवं सांस लेने की आज़ादी नहीं छीन सकते!पर्यटकों से पहले खजुराहो उन आम नागरिकों का है जो यहाँ बसते हैं!उनकी सुख-सुविधाओं का ध्यान रखना प्रशासन का काम है और अतिथी को सौगात देने के लिए हम अपनी निजी ज़िन्दगी को आघात नहीं कर सकते!यह लोक-प्रशासन को ध्यान में रखना पड़ेगा!ऐसे अनेक अफसाने,मन्नत-मानौतिया,आरज़ू,आशाएँ इस मध्यकालीन गाँव की है जो मंदिरों-मस्जिदों तक तो जाती हैं पर प्रशासन के कानों तक शायद ही पहुँच पाती हों!अब समूचा खजुराहो सोच रहा है कि माननीय शिवराज जी का उड़नखटोला शायद कुछ ऐसी सौगात दे जाए जिसकी हमे जरुरत तो है पर पुलिस और प्रोटोकॉल के चक्कर मे हम उनके मंच तक अपनी खंखारती आवाज़ नहीं पंहुचा पाते!श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी ,उमा श्री भारती,रामकृष्ण कुसमारिया एवं वर्तमान सांसद श्री जीतेन्द्र सिंह की राजनैतिक उड़ानों का प्रथम साक्षी बना यह खजुराहो आज भी अपनी कुछ लटकी हुई योजनाओं का इंतज़ार कर रहा है जो इसके विकास मे अहम् किरदार अदा करेंगी!कुछ प्रमुख,सार्थक तथा जायज़ मांगे है:
- नवीन पुरातत्व संग्रहालय का उदघाटन!
- लटके यूथ हॉस्टल का कार्य पूरा करना!
- शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को शुरू करना!
- 'लपको' को पर्यटन की मुख्य धारा मे लाकर उन्हें 'पर्यटन मित्र' जैसे कार्ड जारी करना!
- एअरपोर्ट के रुके हुए कार्यो की गती तेज़ करना!
- ट्राफ्फिक पुलिस द्वारा 'चेक्किंग' के नाम से खजुराहो के चंदेला चौराहे के आस-पास 'एंट्री फी' के नाम से अवैध वसूली करने को रोकना!
- काले धन के निवेश के लिए खजुराहो सुरक्षित स्थान माना जा रहा है!ज़मीन की खरीद-फरोक्त के लिए खजुराहो काले धन के निवेशको का 'सोफ्ट-टार्गेट'बन रहा है!ऐसे प्रोत्साहन को रोकना!
- खजुराहो-झाँसी एवं खजुराहो-सतना के मध्य ए.सी वातान्कूलित 'एमपी टूरिस्म' की बसों का संचालन करना!
- श्रम विभाग द्वारा होटलों में सख्ती करना एवं कर्मचारियों के शोषण को रोकना!
- खजुराहो में स्थापित टूर-ट्रवेल एजेंट्स को उचित मंच एवं सम्मान प्रदान करना एवं उन्हें 'हेंडलिंग एजेंट्स' नुमा कठपुतली नाम तथा तमगा न देकर उचित संबोधन देना!
- मध्य प्रदेश पुलिस से हट के नवीन मध्य प्रदेश टूरिस्ट पुलिस संगठन की स्थापना के बारे में चिंतन करना!
शायद इस महत्व पूर्ण मेल-मिलाप का परिणाम कुछ ऐसा हो जाए जो आगे आने वाली पीढीयो के लिए इक वरदान से कम न हो!

