"अम्मा तुम्हारे जाने के इतने दिनों के बाद-
अब लगने लगी हूँ,
अपने ही घर मे अजनबी मै!
सोचती हूँ कि-
कभी यह घर मेरा ही था,
या आज भी मेरा है?
कितना बदल जाता है घर लड़की के लिए
माँ के जाने के बाद!
वो कमरे जहाँ मै अपनी बहनों के साथ रहती थी
आज अजनबी हो गए हैं !
वोह आँगन जहाँ मै कभी शरारत करती थी-
जिद्द से आसमान उठा लेती थी-
और वो तुलसी-घरा जहाँ धमा-चौकड़ी मचा कर सारा घर उठा लेती थी
आज ....
बहुत दूर चला गया है
तुम्हारे जाने के बाद!
अम्मा बहुत याद आती है तुम्हारी जब-
-तुम्हारी बेटी के -
सिर मै दर्द होता है,
मन घबराता है,
सुख-दुःख बांटना पड़ते हैं-
और....
जीवन के उतार-चड़ाव निराश करते है !
लगता है फिर वही पुराने दिन लौट आएँ-
जब संसार के सारे दुखों की दवा तुम थी.!
माता बम्बरबैनी से ओरछा के रामराजा सरकार तक-
छोटी भवानी से बड़ी भवानी तक -
पूजा वाली अटारी से अम्मा वाली अटारी तक-
इस अलमारी से उस अलमारी तक-
इस भगोने से उस कढ़ाई तक-
बड़ी गुड्डी से मंझली गुड्डी तक -
बड़े मुन्ना से बबलू तक -
और ....
इक छोटे से दुप्पट्टे से लेकर महंगे सलवार सूटों तक -
घर की चप्पलों से महंगी सेंडिलों तक -
और....
अपनी लक्का म़े-
लक्का कि बीमारी म़े-
लक्का के इलाज मे-
ईशु- ईशा के जन्म म़े-
हर कण कण म़े
अम्मा तुम्हारी यादें समाई हुई हैं !
बुड़की नजदीक आती है तो तुम्हारे हाथ के मंगोड़े और दाल के बरे याद कर आँखों म़े आंसू आ जाते है!
बात तुम्हारे हाथ के साथ उस प्यार और अधिकार की है जो जब तक तुम थीं तो हम जताते थे!
हमारी पूज्य प्यारी अम्मा!
आप के जाने के बाद हमने जाना
पीहर म़े माँ का क्या वजन होता है?
और माँ के रहते मायके से-
बेटी का रिश्ता कितना घना होता है!
अम्मा आप चिंता मत करना-
पूज्य बाबूजी की बाहें हम सब बहनों के लिए आज भी शाश्वत हैं!
उनका ढेर सारा प्यार आप दोनों की ढेर सारी घनी छाया का अहिसास आज भी कराता है!
बाबूजी ने आपके जाने के बाद
अपने आप को बदल लिया है!
अब वो आपके हिस्से का प्यार और दुलार भी हमे देने लगे है!
अम्मा आप चिंता मत करना ...
अम्मा आप चिंता मत करना....
अम्मा आप चिंता मत करना...
हम सब ठीक है,सुखी है!"
अब लगने लगी हूँ,
अपने ही घर मे अजनबी मै!
सोचती हूँ कि-
कभी यह घर मेरा ही था,
या आज भी मेरा है?
कितना बदल जाता है घर लड़की के लिए
माँ के जाने के बाद!
वो कमरे जहाँ मै अपनी बहनों के साथ रहती थी
आज अजनबी हो गए हैं !
वोह आँगन जहाँ मै कभी शरारत करती थी-
जिद्द से आसमान उठा लेती थी-
और वो तुलसी-घरा जहाँ धमा-चौकड़ी मचा कर सारा घर उठा लेती थी
आज ....
बहुत दूर चला गया है
तुम्हारे जाने के बाद!
अम्मा बहुत याद आती है तुम्हारी जब-
-तुम्हारी बेटी के -
सिर मै दर्द होता है,
मन घबराता है,
सुख-दुःख बांटना पड़ते हैं-
और....
जीवन के उतार-चड़ाव निराश करते है !
लगता है फिर वही पुराने दिन लौट आएँ-
जब संसार के सारे दुखों की दवा तुम थी.!
माता बम्बरबैनी से ओरछा के रामराजा सरकार तक-
छोटी भवानी से बड़ी भवानी तक -
पूजा वाली अटारी से अम्मा वाली अटारी तक-
इस अलमारी से उस अलमारी तक-
इस भगोने से उस कढ़ाई तक-
बड़ी गुड्डी से मंझली गुड्डी तक -
बड़े मुन्ना से बबलू तक -
और ....
इक छोटे से दुप्पट्टे से लेकर महंगे सलवार सूटों तक -
घर की चप्पलों से महंगी सेंडिलों तक -
और....
अपनी लक्का म़े-
लक्का कि बीमारी म़े-
लक्का के इलाज मे-
ईशु- ईशा के जन्म म़े-
हर कण कण म़े
अम्मा तुम्हारी यादें समाई हुई हैं !
बुड़की नजदीक आती है तो तुम्हारे हाथ के मंगोड़े और दाल के बरे याद कर आँखों म़े आंसू आ जाते है!
बात तुम्हारे हाथ के साथ उस प्यार और अधिकार की है जो जब तक तुम थीं तो हम जताते थे!
हमारी पूज्य प्यारी अम्मा!
आप के जाने के बाद हमने जाना
पीहर म़े माँ का क्या वजन होता है?
और माँ के रहते मायके से-
बेटी का रिश्ता कितना घना होता है!
अम्मा आप चिंता मत करना-
पूज्य बाबूजी की बाहें हम सब बहनों के लिए आज भी शाश्वत हैं!
उनका ढेर सारा प्यार आप दोनों की ढेर सारी घनी छाया का अहिसास आज भी कराता है!
बाबूजी ने आपके जाने के बाद
अपने आप को बदल लिया है!
अब वो आपके हिस्से का प्यार और दुलार भी हमे देने लगे है!
अम्मा आप चिंता मत करना ...
अम्मा आप चिंता मत करना....
अम्मा आप चिंता मत करना...
हम सब ठीक है,सुखी है!"

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