ये कल ही की तो बात थी .. जब ..
तुम्हारे बाबूजी ने ..
"गौरव संग मधुमिता"
लिखवा कर ..
अपने घर की दीवारें ..
सजवाई थी !
मैंने भी ..
बिन अपने प्यारे पापा के ..
इक छोटी सी ..
बारात ला कर ..
तेरी विदा ..
करवाई थी !
बिन अपने प्यारे पापा के ..
इक छोटी सी ..
बारात ला कर ..
तेरी विदा ..
करवाई थी !
हाँ !!
तेरे संग ...
ज़िन्दगी रचाई थी !
तेरे संग ...
ज़िन्दगी रचाई थी !
ये कल ही की तो बात है !
विदाई की आपा धापी में
डरी सहमी सी ..
नंगे पाँव ..तुम ..
मेरे घर आई थी !
विदाई की आपा धापी में
डरी सहमी सी ..
नंगे पाँव ..तुम ..
मेरे घर आई थी !
और फिर ...
गुज़र गए १९ बरस ...
यूँ ही ...साथ चलते चलते !
जीवन की आपा धापी में ...
यूँ ही ...बात करते करते !
गुज़र गए १९ बरस ...
यूँ ही ...साथ चलते चलते !
जीवन की आपा धापी में ...
यूँ ही ...बात करते करते !
बड़े सुकूँ से ...
बिताई है ज़िन्दगी ...
तेरे साथ ;इन गलियों में ...
जहाँ ..
तेरा-मेरा बचपन बीता ..
और अब ..
ज़िन्दगी भी गुज़र रही है ..
तेरे साथ ...सुकून से
उम्र के इस दोराहे पे ...
जीवन की ...
रात ढलते ढलते !
बिताई है ज़िन्दगी ...
तेरे साथ ;इन गलियों में ...
जहाँ ..
तेरा-मेरा बचपन बीता ..
और अब ..
ज़िन्दगी भी गुज़र रही है ..
तेरे साथ ...सुकून से
उम्र के इस दोराहे पे ...
जीवन की ...
रात ढलते ढलते !
कल ही की तो बात थी ;
जब तुम ..
इस घर की लक्ष्मी बन ..
लाखों सपनों को सच करने ..
रंगोली और गुलाल संग ..
बहुत सारे ख़्वाबों को ...
अपने साथ ..इस घर में
लाईं थी !
जब तुम ..
इस घर की लक्ष्मी बन ..
लाखों सपनों को सच करने ..
रंगोली और गुलाल संग ..
बहुत सारे ख़्वाबों को ...
अपने साथ ..इस घर में
लाईं थी !
एक छोटी सी आशा से ...
हम दोनों ने मिलकर ..
भगवान् और पूज्य पापा की ...
तस्वीर के सामने ...
ज्योति जलाई थी !
हम दोनों ने मिलकर ..
भगवान् और पूज्य पापा की ...
तस्वीर के सामने ...
ज्योति जलाई थी !
तेरा हाँथ थामे थामे ..
ज़िन्दगी संवारते संवारते ..और
तुझ पर अपनी पसंदें ..
थोपते थोपते ..
निकल आये हम ...
बहुत दूर ; बहुत आगे ..
नई मंज़िलों की आस लिए !
ज़िन्दगी संवारते संवारते ..और
तुझ पर अपनी पसंदें ..
थोपते थोपते ..
निकल आये हम ...
बहुत दूर ; बहुत आगे ..
नई मंज़िलों की आस लिए !
मुझे सार्थक करने के लिए ..
और निरर्थक से ..
बचाने के लिए ..
मेरा अस्तित्त्व बन ...
मुझे थामने के लिए ....
ऐ ज़िन्दगी !ऐ मोहब्बत !
ऐ मेरे जीवन साथी !
तेरा शुक्रिया ; ता उम्र ..
ता ज़िन्दगी !!
और निरर्थक से ..
बचाने के लिए ..
मेरा अस्तित्त्व बन ...
मुझे थामने के लिए ....
ऐ ज़िन्दगी !ऐ मोहब्बत !
ऐ मेरे जीवन साथी !
तेरा शुक्रिया ; ता उम्र ..
ता ज़िन्दगी !!
तू चिंता मत करना ..
ऐ मेरी हमदम !
हम पूरा करेंगे ;
मिलकर ..
अपने लक्ष्यों को और ..
साबित करेंगे कि -
ये हमारी ..
ज़िद्द नहीं थी बल्कि ...
उस ऊपर वाले ने ..
बहुत सोच समझ कर ..
हम दोनों को ..
एक दूसरे के लिए ही ..
बनाया था !!
ऐ मेरी हमदम !
हम पूरा करेंगे ;
मिलकर ..
अपने लक्ष्यों को और ..
साबित करेंगे कि -
ये हमारी ..
ज़िद्द नहीं थी बल्कि ...
उस ऊपर वाले ने ..
बहुत सोच समझ कर ..
हम दोनों को ..
एक दूसरे के लिए ही ..
बनाया था !!
(GAURAV! )
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