"आंधी सी उड़ गई मस्ती ..
तूफ़ा से ख्वाब!
उम्र से मद्धिम मद्धिम ..
ज़िन्दगी मांगती ; हिसाब !!
तूफ़ा से ख्वाब!
उम्र से मद्धिम मद्धिम ..
ज़िन्दगी मांगती ; हिसाब !!
उतार दिए ...
समय की मार ने ..
सारे फितूर ..सारे नक़ाब !
सारे कसीदे ..सारे जवाब !
सामने है हक़ीक़त ;
और हम ..
नंगे है ;जनाब !
समय की मार ने ..
सारे फितूर ..सारे नक़ाब !
सारे कसीदे ..सारे जवाब !
सामने है हक़ीक़त ;
और हम ..
नंगे है ;जनाब !
ज़िन्दगी के आखिर में ...
यही है लब्बोलुआब !
क्षितिज से ...
जितनी रौशनी दिखती है ..
अब तुम उसी से चलाओ ;
अपनी जीवन नांव !
यही है लब्बोलुआब !
क्षितिज से ...
जितनी रौशनी दिखती है ..
अब तुम उसी से चलाओ ;
अपनी जीवन नांव !
खेते रहो ..खेते रहो ...
जब तक चले ..
अपनी नांव !
अब न लगाना कोई ..
नया दांव !
जब तक चले ..
अपनी नांव !
अब न लगाना कोई ..
नया दांव !
याद रखो ..बखुरदार !
कभी भी बुलावा ...
आ सकता है और ..
जाना पड़ जाएगा; तुम्हें ..
उस ऊपर वाले के
गाँव !!"
कभी भी बुलावा ...
आ सकता है और ..
जाना पड़ जाएगा; तुम्हें ..
उस ऊपर वाले के
गाँव !!"
(गर्वित गौरव !)
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