Sunday, July 2, 2017

एक प्यारे से दोस्त को उसके जन्मदिवस पर न्योछावर चंद शब्द !

प्रिय राकेश!
शुभ जनमोत्स्व !!💐💐👍�👍�

समय बदलते ही ...
सफलता मिलते ही ...

"बंज़र ज़मीन भी ..
बारिश में ..
अंकुरित हो ..
हरीतिमा हो जाती है !

रोज़ शाम ढलते ढलते
फिर सुबह आ जाती है !

हर करवट ..
दुनिया बदल जाती है !

मायूसी ...
खुमारी बन जाती है !

चाहत ...
बहुत जल्द ...
शौक में बदल जाती है !

मधुशाला पढ़ते पढ़ते ही ... ज़िन्दगी की पाठशाला ..
बन जाती है !

कुछ कुछ ...
ऐसा ही होता है जब ...
सफलता पर ...
दौलत की ठनक ...
चढ़ जाती है !

लेकिन ;
तुम न बदले ..
मेरे दोस्त !
जैसे थे ; वैसे हो !
मेरे थे ; मेरे हो !
निश्छल थे ; मासूम हो !
और दोस्त थे ; दोस्त हो !

अक्सर तौलता रहता हूँ ..
मैं ; तुम्हें ....
समय के तराज़ू पर !

पर हर बार ..
वक़्त के पहिये की ..
तेज़ रफ्तार के बावजूद .. तुम्हारा वज़न ...
कभी भी मुझे ...
बढ़ा हुआ ...
दर्प से मढ़ा हुआ ...
और दौलत से ...
कढ़ा हुआ ...
नहीं दिखा !

तू हर बार ..
मेरा वही ...
पुराना राकेश बन ...
समेट लेता है ...
मेरा सम्पूर्ण वज़ूद ...
और मैं ;
निशब्द ..
ठहर जाता हूँ ...
तेरे आगोश में ...
तेरी सफलता के साथ ...
गर्वित होने के लिए !

खुश रहना ..
स्वस्थ्य रहना और सदा ऐसे ही अविरल धारा बन ...
बहते रहना !"

धन्यवाद!
मेरी ज़िन्दगी में ...
दस्तक बन कर आने का !
कभी कभी ...
विचारों को सुलगाने का !
और
सदा मुझे महकाने का !!
शुभ जनमोत्स्व !!
(गौरव !)😊💐💐👍

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