Friday, June 27, 2014

Gulzar Sahib Quotes!

Gulzar sahab quotes,

जब मैं छोटा था,
शायद दुनिया
बहुत बड़ी हुआ करती थी..

मुझे याद है
मेरे घर से "स्कूल" तक का
वो रास्ता,

क्या क्या
नहीं था वहां,
चाट के ठेले,
जलेबी की दुकान,
बर्फ के गोले
सब कुछ,

अब वहां
"मोबाइल शॉप",
"विडियो पार्लर" हैं,

फिर भी
सब सूना है..

शायद
अब दुनिया
सिमट रही है...
.
.
.

जब
मैं छोटा था,
शायद
शामें बहुत लम्बी
हुआ करती थीं...

मैं हाथ में
पतंग की डोर पकड़े,
घंटों उड़ा करता था,

वो लम्बी
"साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल,

वो
हर शाम
थक के चूर हो जाना,

अब
शाम नहीं होती,

दिन ढलता है
और
सीधे रात हो जाती है.

शायद
वक्त सिमट रहा है..

जब
मैं छोटा था,
शायद दोस्ती
बहुत गहरी
हुआ करती थी,

दिन भर
वो हुजूम बनाकर
खेलना,

वो
दोस्तों के
घर का खाना,

वो
लड़कियों की
बातें,

वो
साथ रोना...

अब भी
मेरे कई दोस्त हैं,
पर दोस्ती
जाने कहाँ है,

जब भी
"traffic signal"
पर मिलते हैं
"Hi" हो जाती है,

और
अपने अपने
रास्ते चल देते हैं,

होली,
दीवाली,
जन्मदिन,
नए साल पर
बस SMS आ जाते हैं,

शायद
अब रिश्ते
बदल रहें हैं..
.ं
जब
मैं छोटा था,
तब खेल भी
अजीब हुआ करते थे,

छुपन छुपाई,
लंगडी टांग,
पोषम पा,
टिप्पी टीपी टाप.
अब
internet, office,
से फुर्सत ही नहीं मिलती..

शायद
ज़िन्दगी
बदल रही है.
.
.
जिंदगी का
सबसे बड़ा सच
यही है..
जो अकसर क़ब्रिस्तान के बाहर
बोर्ड पर
लिखा होता है...

"मंजिल तो
यही थी,
बस
जिंदगी गुज़र गयी मेरी
यहाँ आते आते"
.
ज़िंदगी का लम्हा
बहुत छोटा सा है...

कल की
कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल
सिर्फ सपने में ही है..

अब
बच गए
इस पल में..

तमन्नाओं से भर
इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं.

कुछ रफ़्तार
धीमी करो,

और
इस ज़िंदगी को जियो..
खूब जियो  ।।

Thursday, June 26, 2014

शोहरत और मोहलत!

रब ने नवाजा हमें जिंदगी देकर;
और हम शौहरत मांगते रह गये;

जिंदगी गुजार दी शौहरत के पीछे;
फिर जीने की मौहलत मांगते रह गये।

तेरी इस दुनिया में ये मंज़र क्यों है, कहीं ज़ख्म तो कहीं पीठ में खंजर क्यों है?
सुना है तू हर ज़र्रे में है रहता,
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद तो कहीं मंदिर क्यों है?

जब रहने वाले दुनियां के हर बन्दे तेरे हैं, फिर कोई किसी का दोस्त तो कोई दुश्मन क्यों है?

तू ही लिखता है हर किसी का मुक़द्दर, फिर कोई बदनसीब तो कोई मुक़द्दर का सिक्कंदर क्यों है..................!!!!

Wednesday, June 25, 2014

बूढ़े बाज़ की कहानी! "ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा! "

बूढ़े बाज की उड़ान
---------------------

बाज लगभग ७० वर्ष जीता है, पर अपने जीवन के ४०वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं। पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है और शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं। चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है। पंख भारी हो जाते हैं और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं। भोजन ढूढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना, तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं। उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे, या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे, या स्वयं को पुनर्स्थापित करे, आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में।

मन अनन्त, जीवन पर्यन्त
जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा। बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है। वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, अपना घोंसला बनाता है, एकान्त में और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया। सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है, अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं पक्षीराज के लिये। तब वह प्रतीक्षा करता है चोंच के पुनः उग आने की। उसके बाद वह अपने पंजे उसी प्रकार तोड़ देता है और प्रतीक्षा करता है पंजों के पुनः उग आने की। नये चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक एक कर नोंच कर निकालता है और प्रतीक्षा करता पंखों के पुनः उग आने की।

१५० दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा और तब कहीं जाकर उसे मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान, पहले जैसी नयी। इस पुनर्स्थापना के बाद वह ३० साल और जीता है, ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।

प्रकृति हमें सिखाने बैठी है, बूढ़े बाज की युवा उड़ान में जिजीविषा के समर्थ स्वप्न दिखायी दे जाते हैं।

अपनी हों उन्मुक्त उड़ानें पंजे पकड़ के प्रतीक हैं, चोंच सक्रियता की द्योतक है और पंख कल्पना को स्थापित करते हैं। इच्छा परिस्थितियों पर नियन्त्रण बनाये रखने की, सक्रियता स्वयं के अस्तित्व की गरिमा बनाये रखने की, कल्पना जीवन में कुछ नयापन बनाये रखने की। इच्छा, सक्रियता और कल्पना, तीनों के तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं, हममें भी, चालीस तक आते आते। हमारा व्यक्तित्व ही ढीला पड़ने लगता है, अर्धजीवन में ही जीवन समाप्तप्राय लगने लगता है, उत्साह, आकांक्षा, ऊर्जा अधोगामी हो जाते हैं।

हमारे पास भी कई विकल्प होते हैं, कुछ सरल और त्वरित, कुछ पीड़ादायी। हमें भी अपने जीवन के विवशता भरे अतिलचीलेपन को त्याग कर नियन्त्रण दिखाना होगा, बाज के पंजों की तरह। हमें भी आलस्य उत्पन्न करने वाली वक्र मानसिकता को त्याग कर ऊर्जस्वित सक्रियता दिखानी होगी, बाज की चोंच की तरह। हमें भी भूतकाल में जकड़े अस्तित्व के भारीपन को त्याग कर कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी, बाज के पंखों की तरह।

१५० दिन न सही, तो एक माह ही बिताया जाये, स्वयं को पुनर्स्थापित करने में। जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और नोंचने में पीड़ा तो होगी ही, बाज की तरह।

बूढ़े बाज तब उड़ानें भरने को तैयार होंगे, इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी, अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी।

Sunday, June 22, 2014

Feel Good is there! Achhe Din!

अच्छे दिन या बुरे दिन :
सोच सोच का फर्क है मेरे भाई!

१९४७ से २०१४ तक -
अंग्रेज़ों के भारत छोड़ने के बाद -

"हवाएँ वहीँ हैं,
हम वहीँ हैं और तुम वहीँ हो!

ज़िन्दगी वही है और दुःख -सुख वही हैं,
हिंदुस्तान वही है हिन्दोस्तानियत भी वही है!

बस.....
लार्ड मौन्टबैटन नहीं हैं, जनरल डायर नहीं है,
अँगरेज़ नहीं है उनकी हुकूमते बर्तानिया नहीं है!

हम स्वतंत्र हैं......
हमारी सांसें स्वतंत्र हैं......
रूह स्वतंत्र है -जज़्बात स्वतंत्र हैं!

ठीक वैसे ही -
हमारी ज़िन्दगी मैं कांग्रेस के जाने के बाद -
Feel Good है!

हुकूमते कांग्रेस नहीं है....
लेडी बेटन नहीं हैं......
जनरल राजुल नहीं हैं.....
कोमलसाथ का चेहरा नहीं है
रणविजय की खूंखार हसीं नहीं है........

हवाओं में अहसास है -
हमें विश्वास है -

अच्छे दिन शुरू हो गए हैं!

समय बताएगा -आगे आने वाला समय इस सरकार को बकवास नहीं कहेगा! "

Feel Good is there!

Happiness!

रुई का गद्दा बेच कर
दरी खरीद ली...!
ख्वाहिशो को कम किया
और ख़ुशी खरीद ली...!!

सबने ख़रीदा सोना ..!
मैने सुई खरीद ली ...!!
सपनो को बुनने जितनी
डोर खरीद ली ...

मेरी एक खवाहिश मुझसे
मेरे दोस्त ने खरीद ली..!
फिर उसकी हंसी से मैंने
अपनी ख़ुशी खरीद ली ..!!

इस ज़माने से सौदा कर
एक ज़िन्दगी खरीद ली ..!
दिनों को बेचा
और
शामें खरीद ली ...!!

रुई का गद्दा बेच कर
दरी खरीद ली ..!
ख्वाहिशो को कम किया
और ख़ुशी खरीद ली ..!!

Saturday, June 21, 2014

The God never sleeps!

The  PREGNANT DEER - such a beautiful story !

In a forest, a pregnant deer is about to give birth.
She finds a remote grass field near a strong-flowing river.
This seems a safe place.
Suddenly labour pains begin.

At the same moment, dark clouds gather around above & lightning starts a forest fire.
She looks to her left & sees a hunter with his bow extended pointing at her.
To her right, she spots a hungry lion approaching her.

What can the pregnant deer do?
She is in labour!

What will happen?
Will the deer survive?
Will she give birth to a fawn?
Will the fawn survive?
Or will everything be burnt by the forest fire?
Will she perish to the hunters' arrow?
Will she die a horrible death at the hands of the hungry lion approaching her?

She is constrained by the fire on the one side & the flowing river on the other & boxed in by her natural predators.

What does she do?
She focuses on giving birth to a new life.

The sequence of events that follows are:

- Lightning strikes & blinds the hunter.
- He releases the arrow which zips past the deer & strikes the hungry lion.
- It starts to rain heavily, & the forest fire is slowly doused by the rain.
- The deer gives birth to a healthy fawn.

In our life too, there are moments of choice when we are confronted on αll sides with negative thoughts and possibilities.

Some thoughts are so powerful that they overcome us & overwhelm us.

Maybe we can learn from the deer.
The priority of the deer, in that given moment, was simply to give birth to a baby.

The rest was not in her hands &  any action or reaction that changed her focus would have likely resulted in death or disaster.

Ask yourself,
Where is your focus?
Where is your faith and hope?

In the midst of any storm, do keep it on God always.
He will never ever dissapoint you. NEVER.

Remember, GOD neither slumbers nor sleeps...

Friday, June 20, 2014

Dream & Passion!

Good Morning Zindagi!

"कितना अधूरा लगता है...,
जब बादल हो और बारीश ना हो,
जब जिंदगी हो और प्यार ना हो,
आंखें हो पर ख्वाब ना हो!!!

चलो फिर पुराने सपनों को ढूढ़ें....
उन्हें ज़िंदा करें....
ख़्वाबों को लक्ष्य बनाएं....
और
बारिश की बूंदों सा बरस जाये,
अपनी भाग्य हथेली पे -और
समय पटल पे!

Life is like that also!

मिली थी जिन्दगी ,किसी के
काम आने के लिए...
पर वक्त बित रहा है , कागज के टुकड़े कमाने के लिए !

कभी मिल सको तो बेवजाह मिलना...
वजह से मिलने वाले तो ना जाने हर रोज़ कितने मिलते है...
"कदर और इज़्ज़त करनी है,
तो जीतेजी करो,
क्योंकि अरथी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते है..."

Tuesday, June 17, 2014

मेरे भगवन -इतनी शक्ति देना की बस...



बहुत साल बाद दो दोस्त
रास्ते में मिले .
धनवान दोस्त ने
उसकी आलिशान
गाड़ी पार्क की और
गरीब मित्र से बोला
चल इस गार्डन में बेठकर
बात करते है . चलते चलते
अमीर दोस्त ने गरीब
दोस्त से
कहा
तेरे में और मेरे में बहुत फर्क
है . हम दोनों साथ में पढ़े
साथ में बड़े हुए मै
कहा पहुच गया और तू
कहा रह गया ? चलते चलते
गरीब दोस्त अचानक रुक
गया .
अमीर दोस्त ने
पूछा क्या हुआ ? गरीब
दोस्त ने कहा तुझे कुछ
आवाज सुनाई
दी?
अमीर दोस्त पीछे
मुड़ा और पांच
का सिक्का उठाकर बोला
ये तो मेरी जेब से
गिरा पांच के सिक्के
की आवाज़ थी।
गरीब दोस्त एक कांटे के
छोटे से पोधे की तरफ गया
जिसमे एक तितली पंख
फडफडा रही थी . गरीब
दोस्त ने उस
तितली को धीरे से बहार
निकल और आकाश में आज़ाद
कर दिया .
अमीर दोस्त ने आतुरता से
पुछा तुझे
तितली की आवाज़ केसे
सुनाई दी? गरीब दोस्त ने
नम्रता से कहा " तेरे में और
मुझ में यही फर्क है तुझे
"धन" की सुनाई दी और मुझे
"मन" की आवाज़ सुनाई
दी .
"यही सच है "

.इतनी ऊँचाई न देना प्रभु
कि,
धरती पराई लगने लगे l
इनती खुशियाँ भी न
देना कि,
दुःख पर किसी के हंसी आने
लगे ।
नहीं चाहिए
ऐसी शक्ति जिसका,
निर्बल पर प्रयोग करूँ l
नहीं चाहिए ऐसा भाव
कि,
किसी को देख जल-जल मरूँ

ऐसा ज्ञान मुझे न देना,
अभिमान जिसका होने
लगे I
ऐसी चतुराई भी न
देना जो,
लोगों को छलने लगे ।




Monday, June 16, 2014

Uttarakhand Calamity -Rest in peace!

उत्तराखंड त्रासदी!
वो जो भोले के पास चले गए,
वो जो भोले अपने पास ले गए,

वो जो आसमान के टूटे तारे बन गए,
वो जो अविरल टपकते आंसू बन गए,

वो जो अब सिर्फ यादें हैं,
सिर्फ फोटो फ्रेम में क़ैद हैं,

उन्हें -
शत शत प्रणाम!
ईश्वर आपकी आत्मा को शांति प्रदान करे!

मेरी मौत!

Nice one must read

आज सवेरे,सवेरे,अख़बार मे
शोक समाचार के कालम मे,
अपनी फ़ोटो को देखँ हैरान था,
आश्चर्य,,क्या मैं मर गया हू,?
या किसी मसखरे का शिकार हो गया हू,

रुको,,थोड़ा सोचता हू,
पिछली रात ही तो
मेरे सीने में भारी दर्द उठा था,
और मैं पसीने से तरबतर हो गया था
फिर मुझे कुछ याद नही,
मैं शायद गहरी नींद में सो गया था,

और अब सुबह के ८ बज चुके है,
बिना चाय पिये मेरी आँख नहीं खुलती,
आज आफ़िस में फिर लेट होने वाला हू,
चिढचिढे बास का फिर भाषण सुनने वाला हू

पर ये क्या? क्यूँ मेरे घर मे भीड़ हो रही है,
सारी भीड़ क्यूँ रो रही है,
यहाँ बरामदे मे क्यूँ हाहाकार मचा पड़ा है
मेरा शरीर सफ़ेद कपड़ों में लिपटा,ज़मीन पर क्यूँ पड़ा है

मैं यहाँ हूँ, मैं चिल्लाता हू,
कोई इधर देखो,सुनो, मैं यहाँ हू
न कोई ध्यान देता है ,न कोई सुन पाता है,
हर कोई कातर नज़र से बस मेरे शरीर को निहारता है,

मैं अपने कमरे में वापस आ जाता हू,
बाहर कोहराम मचा है,
ये,क्या मेरी बीबी रो रही है,
बहुत दुखी और उजडी सी दिख रही है
मेरे बेटे को शायद नही कुछ एहसास है,
वह केवल इसलिये रो रहा है कि,
क्यूँकि उसकी माँ बदहवास है,
लगता है मैं मर गया हू,

मैं कैसे मर सकता हू,अपने बेटे से कहे बेगैर,
कि मैं उसे सच बहुत प्यार करता हू,
मैं उसका बेहद ख़्याल रखता हू,
मैं  कैसे मर सकता हू माँ ,बाप से कहे बग़ैर,
कि वे है तो ही ,मैं हू,
कैसे मर सकता हू अपने दोस्तों से कहे बग़ैर कि,
वे मेरे जीवन के सारे ग़लत फ़ैसलों पर भी वे मेरे साथ थे,
पर मैं ही अधिकान्शत: मैं वहाँ स्वयं नहीं पहुँच पाया था ,
जब उन्हें मेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत का वास्ता था
और वे ज़्यादा ज़रूरतमन्द थे

मैं एक बन्दे को देख रहा हू,
जो कोने में खड़ा आँसू छिपाने की कोशिश कर रहा है,
कभी हम अतिप्रिय अभिन्न मित्र थे,
छोटी सी ग़लतफ़हमी ने हमें जुदा कर दिया,
उन दिनों हम ईगो की पराकाष्ठा में थे,
हमने कभी एकदुसरे को माफ़ नहीं किया

मैं उसके पास जाता हू
अपने दोनो हाथों को आगे बढ़ाता हू
दोस्त मैं अपनी ग़लतियों के लिये क्षमा माँगता हू
हम आज भी अच्छे दोस्त है,
मुझे माफँ कर दो,
ये क्या उसके तरफ़ से कोई रिसपान्स ही नहीं मिलता,
क्या वह आज भी उसी ईगो में है,
मैं जबकि माफ़ी माँग रहा हू,
फिर भी,उसका मिज़ाज नहीं मिलता
पर वह निरन्तर रोता जा रहा है,
पर एक सेकेण्ड।
शायद वह मुझे और मेरे हाथ को नहीं देख पा रहा है,
तो क्या मैं सच में मर गया हू?

ज़मीन पर लेटे मैं अपने शरीर के पास बैठँ जाता हू,
क्या करूँ कैसे करु किसे पुकारू कुछ समझ नहीं पाता हू
दिल करता है कि मैं फूट,फूट के रोऊँ।
एकदम से हुई इस अनहोनी पर कहा अपना सिर धुनु और फोड़ू,,

ऐ खुदा ,मुझे कुछ समय और दो,
मैं अपने बेटे,माँ बाप दोस्तों को
बताना चाहता हू कि मैं उनसे कितना प्यार करता

ऐ खुदा
मुझे थोड़े दिन और दे केवल एक बार
क्यूँकि,,,

मैं अपने बेटे को अपने सीने से लगाना चाहता हू
अपनी माँ को मुस्कुराते देखना चाहता हू,
अपने पिता को अपने ऊपर गर्व करवाना चाहता हू,
केवल एक बार बस एक बार अपने दोस्तों को साँरी कहना चाहता हू,
मैं तो उन्हें कभी समय नहीं दे पाया, पर आज भी वे मेरे साथ है,
इसका शुक्रिया देना चाहता हू,

मैंने ऊपर देखा
मैं चिल्लाया
खुदा ,,
केवल एक मौक़ा और,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम सपने में चिल्ला रहे हो,
उठो,क्या तुमने कोई बुरा सपना देखा,
मेरी बीबी ने मुझे थपथपाया,
मेरा बेटा मेरी बग़ल में था,

मित्रों!अभी भी देर नहीं हुई है। अपने झूठे ईगो,अतीत के पुराने विवाद और मतभेदों को भुलाकर अपने रिश्तेदारो और मित्रों से खुलकर अपने प्यार को जतायें और झगड़े और मनमुटाव को भुलाकर नईं शुरुवात करें क्योंकि ज़िन्दगी में दूसरा अवसर नहीं मिलता है।
खुश रहें और सभी को भी खुश रखें।

Man & the God!

मनुष्य कितना मूर्ख है...!!
》प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान सब सुन
रहा है,
पर निंदा करते हुए ये भूल जाता है।
》पुण्य करते समय यह समझता है कि भगवान देख रहा है,
पर पाप करते समय ये भूल जाता है।
》दान करते हुए यह समझता है कि भगवान सब में बसता है,
पर चोरी करते हुए ये भूल जाता है।
》प्रेम करते हुए यह समझता है कि पूरी दुनिया भगवान ने
बनाई है,
पर नफरत करते हुए ये भूल जाता है।
और हम कहते हैं कि..
मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणी है।

Man & God!

मनुष्य कितना मूर्ख है...!!
》प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान सब सुन
रहा है,
पर निंदा करते हुए ये भूल जाता है।
》पुण्य करते समय यह समझता है कि भगवान देख रहा है,
पर पाप करते समय ये भूल जाता है।
》दान करते हुए यह समझता है कि भगवान सब में बसता है,
पर चोरी करते हुए ये भूल जाता है।
》प्रेम करते हुए यह समझता है कि पूरी दुनिया भगवान ने
बनाई है,
पर नफरत करते हुए ये भूल जाता है।
और हम कहते हैं कि..
मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणी है।

Sunday, June 15, 2014

Changes in Love Trend!

बहुत तेज़ी से बदल रही हैं मोहब्बतें मेरे दोस्त!

"अब दोपटटों ने खो दी है जगह आँचल से,
नज़रें हया बन कर नहीं झुकती.....
गाल शर्म से लाल नहीं होते.....
रूमाल भी अब उंगलिओं में नहीं लिपटते....
और
घबराहट में पसीना भी नहीं आता! "

शायद जो मोहब्बत का फलसफा मेरे ज़माने में था -
वह गुज़र गया!

Saturday, June 14, 2014

Reality is bitter then the Truth!

"वो मरने के बाद बनाते है माँ -बाप की याद में मंदिर और धर्मशाला ;
जिन्दा रहते जिन्होंने कभी -
माँ-बाप के पैर न दबाये थे,
मिठास से पूछा न था!
सर पे हाथ तक न फेरा था! "

वाह रे श्रवण कुमारो!
वाह रे ठेकेदारों!

Father's Day Flowers!

उन चरणों को  प्रणाम जिनका मैं बेटा  हूँ!

एक बुजुर्ग पिता का दर्द अपनी
औलादों से जो समाज के ठेकेदार बन गए -

"खद्दर का कुरता पहन कर वो अपने हाथों में अगरबत्ती लिए अक्सर निकल जाता है;मेरे बगल से ;ईश्वर की खोज में....
बिना बोले और बिना बतियाए मुझसे!

काश तनिक ठहर कर दो घडी बतिया लेता मुझसे तो मैं भी बता देता उसको....
भगवान कैसे मिलेंगे! "

किसी ज़माने में जब वह वो छोटा  बच्चा था ;मुझे बड़े प्यार और आदर से -पिताजी कहता था!
आज उम्र के इस पड़ाव पे शिथिल होने पर ढलती शाम में -
पहचान ही ले तो काफी है!

"ज़माने की फ़िक्र में वो आधे हुए जा रहे है,
तनिक अपने पिता के चरण पखार लेते तो समझ आ जाता की -
राम कहाँ बसते हैं! "

Maa!

"जब जब कागज पर लिखा
मैंने माँ का नाम,

कलम अदब से कह उठी
हो गए चारों धाम.....!
"............."माँ"............."

माँ- दुःख में सुख का एहसास है,
माँ - हरपल मेरे आस पास है ।
माँ- घर की आत्मा है,
माँ- साक्षात् परमात्मा है ।
माँ- आरती, अज़ान है,
माँ- गीता और कुरआन है ।
माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,
माँ- उस रब का ही एक रूप है ।
माँ- तपती धूप में साया है,
माँ- आदि शक्ति महामाया है ।
माँ- जीवन में प्रकाश है,
माँ- निराशा में आस है ।
माँ- महीनों में सावन है,
माँ- गंगा सी पावन है ।
माँ- वृक्षों में पीपल है,
माँ- फलों में श्रीफल है ।
माँ- देवियों में गायत्री है,
माँ- मनुज देह में सावित्री है ।
माँ- ईश् वंदना का गायन है,
माँ- चलती फिरती रामायन है ।
माँ- रत्नों की माला है,
माँ- अँधेरे में उजाला है,
माँ- बंदन और रोली है,
माँ- रक्षासूत्र की मौली है ।
माँ- ममता का प्याला है,
माँ- शीत में दुशाला है ।
माँ- गुड सी मीठी बोली है,
माँ- ईद, दिवाली, होली है ।
माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,
माँ- की याद हमें अति की आई है ।
माँ- मैरी, फातिमा और दुर्गा माई है,
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।

"अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ,
माँ को दंडवत प्रणाम करता हूँ ।
Happy mothers day
---माँ---
माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है
माँ जीवन के फूलों में, खूशबू का वास है
माँ रोते हुए बच्चे का, खुशनुमा पालना है
माँ मरूस्थल में नदी या मीठा-सा झरना है
माँ लोरी है, गीत है, प्यारी-सी थाप है
माँ पूजा की थाली है, मंत्रो का जाप है
माँ आँखो का सिसकता हुआ किनारा है
माँ ममता की धारा है, गालों पर पप्पी है,
माँ बच्चों के लिए जादू की झप्पी है
माँ झुलसते दिनों में, कोयल की बोली है
माँ मेंहँदी है, कुंकम है, सिंदूर है, रोली है
माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है
माँ फूंक से ठंडा किया कलेवा है
माँ कलम है, दवात है, स्याही है
माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है
माँ अनुष्ठान  है, साधना है, जीवन का हवन है
माँ जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है
माँ चूड़ीवाले हाथों के, मजबूत कंधो का नाम है
माँ काशी है, काबा है, और चारों धाम है||

माँ चिन्ता है, याद है, हिचकी है
माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है
माँ चूल्हा, धुँआ, रोटी और हाथों का छाला है
माँ जीवन की कड़वाहट में अमृत का प्याला है
माँ पृथ्वी है, जगत है, धूरी है
माँ बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है
माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता
माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता
HAPPY MOTHERSDAY 
जीवन के हर दिवस मातृ दिवस..
मातृ दिवस की शुभकामनाएं।

Great Words! Great Quotes!

I don't know who wrote them, but gems of words -
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***************
�� Never Tell Ur Problems to Anyone.  
17% will not Care
&
80% will be Glad that U have Them.

************************
�� Life is similar to Boxing Game.
Defeat is not Declared when U Fall Down.
It is Declared when U Refuse to Get Up.

************************
�� Always WRONG PERSONS Teach the
RIGHT LESSONS in Life.
That is called LIFE EXPERIENCE.

************************
�� Faith is taking the 1st Step,
even when U dont see the whole Staircase.

************************
�� Keep Ur Face to the Sun,
& U will not see the Shadow.

************************
�� Everything is Valuable only at 2 Times:
1: Before Getting It.
&
2: After Losing It.

************************
�� 2 Things brings Happiness & Success
in Life:
1: The way U Manage
when U have Nothing.
&
2: The way U Behave
when U have Everything.

************************
�� 2 Places are most Valuable in the World:
1: The NICEST Place is to be in
Someone's Thoughts.
&
2: The SAFEST Place is to be in
Someone's Prayers.

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�� 'FEAR' has 2 Meanings:
1: Forget Everything & Run.
&
2: Face Everything & Rejoice.
Choice is Ours.

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�� ATTITUDE at its Best:
"My BACK is not a VOICE MAIL.
Kindly Say whatever U have by FACING ME".

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�� What is SUCCESS ?
SUCCESS is, when Ur Photo's are Uploaded on 'GOOGLE' instead of FACEBOOK.

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�� 'EGO' is the only Requirement
to Destroy any Relationship.
Be a Bigger Person,
Skip the 'E' & let it 'GO'.

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�� Do U know why God did not give Us
the Gift to Read Other's Mind ?
So that, We could have the Chances to
'TRUST' & Privilege to be 'TRUSTED'.

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�� As long as We do not Forgive People
who have Hurt Us,
They Occupy a 'RENT-FREE-SPACE'
in our Mind.

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�� Always keep Hoping for Good.
Keep a Green Tree in Ur Heart.
The Singing Birds will Automatically come.

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�� If U Walk the Way guided by Humans,
U will find a Hopeless End.
BUT
If U will Walk the Way guided by GOD,
U will find Endless Hopes & Opportunities.

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�� GOD always likes to know again & again
what U want.
It is not that He Forgets Ur
Dreams & Prayers,
But He Loves to Check Ur Passion
towards Ur Desire.
That is why He wants U to have Ur
'QUIET TIME' which We call as
'PRAYER TIME' with Him everyday.

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�� I asked GOD: If everything is already Written in Destiny,
then why should I Pray ?
GOD Smiled & said: I have also Written
'CONDITIONS APPLY'.

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�� Empty Pockets Teach
Millons of Things in Life.
BUT
Full Pockets Spoil Us in Million Ways.

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�� TRUST is like a Sticker.
Once it is Removed, it may Stick again,
but not as Strong as it Holds
when U First Applied.

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�� Always take Care of RELATIONS.
Thats why they say, when U are in Doubt,
'SILENCE' is the Best Policy.

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�� Never Win People with Arguments.
rather Defeat Them with Ur Smile.
Because People who always Wish to
Argue with U, cannot Bear Ur SILENCE.

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�� If a Drop of Water falls on a Lake,
its Identity is Lost.
BUT
If a Drop of Water falls on a Lotus Leaf,
it Shines like a Pearl.
Drop is the Same,
but the 'COMPANY' matters.

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�� Our HOPES should be like HAIR & NAILS.
No matter how many times they get Cut,
but they never stop Growing.
That is why they say,
Always Hope for the Best,
however Bad the Situation may be.

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�� 'MEMORIES' are always Special.
Sometimes, We Laugh by
Remembering the days We Cried.
&
Sometimes, We Cry by
Remembering the days We Laughed.
Thats LIFE.

Friday, June 13, 2014

Radhe Radhe!

स्वर्ग में विचरण करते हुए
अचानक एक दुसरे के सामने आ गए

विचलित से कृष्ण ,प्रसन्नचित सी राधा...

कृष्ण सकपकाए, राधा मुस्काई
इससे पहले कृष्ण कुछ कहते राधा बोल उठी

कैसे हो द्वारकाधीश ?

जो राधा उन्हें कान्हा कान्हा कह के बुलाती थी
उसके मुख से द्वारकाधीश का संबोधन
कृष्ण को भीतर तक घायल कर गया
फिर भी किसी तरह अपने आप को संभाल लिया

और बोले राधा से .........
मै तो तुम्हारे लिए आज भी कान्हा हूँ
तुम तो द्वारकाधीश मत कहो!

आओ बैठते है ....
कुछ मै अपनी कहता हूँ कुछ तुम अपनी कहो

सच कहूँ राधा जब जब भी तुम्हारी याद आती थी
इन आँखों से आँसुओं की बुँदे निकल आती थी

बोली राधा ,मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ
ना तुम्हारी याद आई ना कोई आंसू बहा
क्यूंकि हम तुम्हे कभी भूले ही कहाँ थे
जो तुम याद आते

इन आँखों में सदा तुम रहते थे
कहीं आँसुओं के साथ निकल ना जाओ
इसलिए रोते भी नहीं थे

प्रेम के अलग होने पर तुमने क्या खोया
इसका इक आइना दिखाऊं आपको ?

कुछ कडवे सच ,प्रश्न सुन पाओ तो सुनाऊ?

कभी सोचा इस तरक्की में तुम कितने पिछड़ गए
यमुना के मीठे पानी से जिंदगी शुरू की
और समुन्द्र के खारे पानी तक पहुच गए ?

एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्रपर
भरोसा कर लिया और
दसों उँगलियों पर चलने वाळी
बांसुरी को भूल गए ?

कान्हा जब तुम प्रेम से जुड़े थे तो ....
जो ऊँगली गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों को विनाश से बचाती थी
प्रेम से अलग होने पर वही ऊँगली
क्या क्या रंग दिखाने लगी
सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम आने लगी

कान्हा और द्वारकाधीश में
क्या फर्क होता है बताऊँ
कान्हा होते तो तुम सुदामा के घर जाते
सुदामा तुम्हारे घर नहीं आता

युद्ध में और प्रेम में यही तो फर्क होता है
युद्ध में आप मिटाकर जीतते हैं
और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं
कान्हा प्रेम में डूबा हुआ आदमी
दुखी तो रह सकता है
पर किसी को दुःख नहीं देता

आप तो कई कलाओं के स्वामी हो
स्वप्न दूर द्रष्टा हो
गीता जैसे ग्रन्थ के दाता हो

पर आपने क्या निर्णय किया
अपनी पूरी सेना कौरवों को सौंप दी?
और अपने आपको पांडवों के साथ कर लिया
सेना तो आपकी प्रजा थी
राजा तो पालाक होता है
उसका रक्षक होता है

आप जैसा महा ज्ञानी
उस रथ को चला रहा था जिस पर बैठा अर्जुन
आपकी प्रजा को ही मार रहा था
आपनी प्रजा को मरते देख
आपमें करूणा नहीं जगी

क्यूंकि आप प्रेम से शून्य हो चुके थे

आज भी धरती पर जाकर देखो
अपनी द्वारकाधीश वाळी छवि को
ढूंढते रह जाओगे हर घर हर मंदिर में
मेरे साथ ही खड़े नजर आओगे

आज भी मै मानती हूँ
लोग गीता के ज्ञान की बात करते हैं
उनके महत्व की बात करते है

मगर धरती के लोग
युद्ध वाले द्वारकाधीश पर नहीं
प्रेम वाले कान्हा पर भरोसा करते हैं
गीता में मेरा दूर दूर तक नाम भी नहीं है
पर आज भी लोग उसके समापन पर

" राधे राधे" करते है