बहुत तेज़ी से बदल रही हैं मोहब्बतें मेरे दोस्त!
"अब दोपटटों ने खो दी है जगह आँचल से,
नज़रें हया बन कर नहीं झुकती.....
गाल शर्म से लाल नहीं होते.....
रूमाल भी अब उंगलिओं में नहीं लिपटते....
और
घबराहट में पसीना भी नहीं आता! "
शायद जो मोहब्बत का फलसफा मेरे ज़माने में था -
वह गुज़र गया!
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