अच्छे दिन या बुरे दिन :
सोच सोच का फर्क है मेरे भाई!
१९४७ से २०१४ तक -
अंग्रेज़ों के भारत छोड़ने के बाद -
"हवाएँ वहीँ हैं,
हम वहीँ हैं और तुम वहीँ हो!
ज़िन्दगी वही है और दुःख -सुख वही हैं,
हिंदुस्तान वही है हिन्दोस्तानियत भी वही है!
बस.....
लार्ड मौन्टबैटन नहीं हैं, जनरल डायर नहीं है,
अँगरेज़ नहीं है उनकी हुकूमते बर्तानिया नहीं है!
हम स्वतंत्र हैं......
हमारी सांसें स्वतंत्र हैं......
रूह स्वतंत्र है -जज़्बात स्वतंत्र हैं!
ठीक वैसे ही -
हमारी ज़िन्दगी मैं कांग्रेस के जाने के बाद -
Feel Good है!
हुकूमते कांग्रेस नहीं है....
लेडी बेटन नहीं हैं......
जनरल राजुल नहीं हैं.....
कोमलसाथ का चेहरा नहीं है
रणविजय की खूंखार हसीं नहीं है........
हवाओं में अहसास है -
हमें विश्वास है -
अच्छे दिन शुरू हो गए हैं!
समय बताएगा -आगे आने वाला समय इस सरकार को बकवास नहीं कहेगा! "
Feel Good is there!
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