इक थका हुआ आदमी किससे कहे - शुभ रात्रि!
इक हारा हुआ जुआरी किस्से कहे -शब्बा खैर!
इक टूटा हुआ दिल किस्से कहे -कल फिर मिलेंगे!
इक बेसहारा बंदा किस्से कहे -अलविदा!
रिश्तों के इस मकड़जाल में,
ज़िन्दगी गुज़र गई ;
इक कन्धा तलाशते हुए
जिसपे सर रख कर
इत्मीनान से -
रो सकें!
या सो सकें!
खैर!
शुभ रात्रि उनको जिनकी रातें वाकई 'रातें ' हैं!
वरना.....
रूमानियत और रंगीनियों से परे
कैसी शुभ रात्रि!
ज़िंदा लाशों की रातें नहीं होती!
बस.......
तनहा दिन....
तनहा ज़िन्दगी......
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