हमने बदलते हुए खजुराहो को देखा है-
इक जंगल को शहर बनते देखा है-
इक पिछड़े गाँव को क़स्बा बनते देखा है-
हमने अपने खजुराहो को शनै शनै सवरते देखा है,
हमने अपने खजुराहो को शनै शनै मरते देखा है,
हमने खजुराहो को बदलते देखा है ll
टी.एस.बर्ट को खजुराहो खोजते देखा है,
मुन्ना राजा,नाती राजा को नेतृत्तव करते देखा है,
अपने ब्रिजेन्द्र सिंह मामाजी को मंदिरों पे बोलते देखा है,
स्व.महाराज जी को खजुराहो बसाते देखा है,
छोटे बच्चों को गाईड बनते देखा है ,उनका संघर्ष देखा है,
पांच सितारा होटलें बनते देखी है,
चंदेला होटल की नीव के पत्थर देखें है,
चार्टरड फ्लीट को उतरते देखा है,
हमने खजुराहो को बदलते देखा है ll
हमने खजुराहो को संवरते देखा है-
रैडिसन, क्लार्क्स और चंदेला को बनते देखा है,
शिल्पग्राम और कन्दारिया को सजते देखा है,
एअरपोर्ट पे हवाई जहाज उतरते देखा है,
साइलेंट जोन के लिए चारो दिशाओं से गेट बंद होते देखे हैं ,
टूरिस्ट पुलिस को मुस्तैद देखा है,
यहाँ की सूनी आँखों में विदेश जाने के सपने पलते देखा है,
हमने खजुराहो को संवरते देखा है ll
और अंत मे -
हमने अपने खजुराहो को शनै-शनै धीरे-धीरे मरते देखा है-
खजुराहो मे सड़को को उखड़ते देखा है,
शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का इंतज़ार करते यात्री देखें हैं,
रोजगार के लिए पलायन करते युवाओं को देखा है,
स्टेट बैंक मे ग्राहकों की भीड़ को देखा है,
ख़राब ए.टी .ऍम . मशीन को देखा है,
और अपनी मूछों को नुकीली कर बुन्देली जनता को पांच सितारा होटलों मे चौकीदार बन "सलाम-साहिब" बोलते देखा है,
सच म़े -
हमने अपने खजुराहो को शनै-शनै धीरे-धीरे मरते देखा है ll