मैने मुहब्बत की थी तेरी सूरत देख के-
तूने ठुकराया मुझे मेरा हुनर देख के !
काश ! मेरी मुहब्बत मे तुझे,मेरा हुनर दिखता?
तूने मुझे छोड़ा जब मेरा कोई नहीं था,
मै तुझे जब अपनाऊंगा जब मेरा सब कोई होगा !
कभी तो तुम भी समझोगी कि-
मुहब्बत मे हुनर नहीं गहराई देखी जाती है ,
सुन्दरता के साथ पवित्रता देखी जाती है !"
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