"तुम्हारे मौन का मै अर्थ क्या समझूँ ???
-कि तुम हूँ पाषण से भी दो चार डग आगे .....
अरे ;पाषण मे भी -
मिलन की चाह होती है,
अटल विश्वास होता है,
कहे कि लाज होती है,
अगर न हूँ विश्वास- तो पलट कर देख लो तिरछी निगाहों से--
आज भी ताज से मुमताज की आवाज आती है !!"
'HAPPY WORLD TOURISM DAY!'
"DEEP TRIBUTE TO SAHEED-E-AZAM BHAGAT SINGH WHOSE TODAY IS BIRTH-DAY!"
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