लहरों का ...
किनारे के पत्थरों से टकराना
और फिर लौट जाना !
यादों का ...
दिल ओ दिमाग से टकराना
और फिर ...
अनंत गहराई में खो जाना !
आंसुओं का ...
आँख में आना ...
और फिर .. लुढ़क कर ...
हवा में टपक जाना !
अगर ...
खोना या मिटना ही ...
ज़िन्दगी की सच्चाई है तो -
फिर पाना क्या है ?
खोना -क़ुर्बानी है तो -
पाना मेहनत ?
खोना -समझौता है तो -
फिर पाना भाग्य ?
खोना -दुःख तो ...
पाना सुख ?
क्या है -खोना और पाना ?
जो प्रयास करता है ...
वो भी खोता है और ...
जो नहीं करता ..
वो भी खोता है !
एक बात और -
जो कुछ नहीं करता ...
वो कभी कभी ...अपने ख्वाब ...
यूँ ही हथिया लेता है !
ऐसा क्यों होता है ???
कहाँ है वह निष्पक्षता ?
जिसके लिए भगवान् की रचना की गई ?
सूखे पेड़ ...
गिरते नहीं हैं और ...
हरे पेड़ सूख कर ...
फर्नीचर बन ....
किसी डॉइंग रूम की
शोभा बन जाते हैं ?
अच्छे लोग ...
जल्दी चले जाते हैं और ...
बुरे लोग ...
बहुत लम्बा जीते हैं ?
अच्छे लोग ...
मास्टरजी बन जाते हैं और ..
बुरे लोग नेताजी ?
कहाँ है -वह थर्मामीटर जो ...
नापता है -
किसी इंसा के जीवन मूल्य ?
और कौन है वो -
जो करता है ....दस्तखत ...
इंसान के ...
रिपोर्ट कार्ड पर ???
क्या ?
समझौता !खोना !धीरज!
कोई बात नहीं; फिर मिलेंगे!मुझे भूल जाना!
अपना ख्याल रखना!
और तुम्हें मेरी कसम रोना मत!
इस जन्म नहीं तो ...
अगले जन्म मिलेंगे!
कोई बात नहीं !
जैसे "जुमलों" का नाम ही ज़िन्दगी है ??
और यही -निचोड़ है -
जीवन मूल्यों का ???
क्या यही -
चिरपरिचित स्पंदन है -
ईश्वर की आस्था और विश्वास का ???
लहरों के -
चट्टानों पर उकेरे गए ...
निशाँ ही ...
प्रतिफल हैं -
प्रेम और विश्वास के???
कब तक ...
चलती रहेगी ...
ऐसी मशक्कत ?
जहाँ सत्य को हमेशा "हताशा" ही मिलेगी ?
अब ये न कहना कि -
"खंडहर में -
"दिए की बाती" की "लौ" है -
बहुत "मद्धिम" ;
उसी से काम चलाओ दोस्त!
" प्रेम और प्रयास " पर भगवान् अभी -
"पीएचडी या शोध" कर रहे है !