ऐ ज़िन्दगी !
तेरी पकाई रोटी ...
बहुत सोंधी सोंधी ...
चूल्हे से निकली ...बिलकुल ...
माँ के हाथों जैसी
तेरी पकाई रोटी ...
बहुत सोंधी सोंधी ...
चूल्हे से निकली ...बिलकुल ...
माँ के हाथों जैसी
फूली फूली !
और मैं भी ..
उसे खाकर ऐसे तृप्त..
उसे खाकर ऐसे तृप्त..
जैसे प्यारे पापा का गाना और
उनकी गोद में झूलती मेरी नींद !
बस तू -कभी कभी ...
सब्ज़ी में -
मिर्ची ज्यादा कर देती है ;
और मैं "सी - सी"
करने लगता हूँ !
सब्ज़ी में -
मिर्ची ज्यादा कर देती है ;
और मैं "सी - सी"
करने लगता हूँ !
प्लीज !
थोड़ा तीखापन कम कर दे ..
ऐ साथ साथ चलने वाली ..
मेरी राहगुज़र !
थोड़ा तीखापन कम कर दे ..
ऐ साथ साथ चलने वाली ..
मेरी राहगुज़र !
खट्टा मीठा तो -
अच्छा लगता है पर ;
देख इस "दौर ऐ मन्ज़िल" में
मेरे रायते में ...लाल मिर्च ;
कुछ ज्यादा ही ...
हो गई है !
अच्छा लगता है पर ;
देख इस "दौर ऐ मन्ज़िल" में
मेरे रायते में ...लाल मिर्च ;
कुछ ज्यादा ही ...
हो गई है !
ऐ ज़िन्दगी !
कम से कम राहत भरा ..
पानी ही पिला दे !
कुछ सुकून तो मिल ही जाएगा !
कम से कम राहत भरा ..
पानी ही पिला दे !
कुछ सुकून तो मिल ही जाएगा !
No comments:
Post a Comment