Monday, April 7, 2014

माँ ! आज तुम्हारी बरसी है !


माँ !आज तुम्हारी बरसी है !
                ( 08 अप्रैल 1971 )


क्या करूँ ?
कहाँ जाऊं ?
कुछ समझ नहीं आता !

आप ऐसे समय पे चली गईं जब -
आपके  शानू !
आपके आशीष !
बहुत छोटे थे।

इतने छोटे कि -मुझे नहीं याद -
तुम्हारा आँचल !
तुम्हारी ममता !
तुम्हारा वात्सल्य !
तुम्हारी डांट और
तुम्हारा आशीर्वाद  ……

बस एक 43  साल पहले की डायरी मिली है -
जिसमे -
आपने लिखा है -पापा के नाम कि -
"मेरे बच्चों को अच्छा बनाना
और
पापा ने आपसे वादा किया है कि -
"तुम्हारे दोनों निशानियों को अच्छा बना के
"मैं " भी वहीँ सोऊंगा
जहाँ 'तुम' सो रही हो !"
और सच माँ !
आज आप और पापा
वहीँ चिरनिंद्रा में लेटे हैं -
जहाँ -
आप दोनों ने उस डायरी में
वचन लिखा या दिया था !

जब कोई अपनी माँ के बारे में बताता है तो -
मन कहता है कि -काश तुम होतीं !

एक दिन आपकी प्यारी पोती ने अनायास बोल दिया कि -
पैर छुओ मैं तुम्हारी माँ हूँ तो
अनगिनित प्रश्न कालकलवित फिर जी उठे !

माँ !
सच मैंने तुम्हें 'तस्वीरों ' से अहसास किया है कि -
तुम मेरी माँ हो !
कभी सोचा है आपने -
कैसे जीता होगा वो बेटा जिसके पास अपनी माँ की-
माँ के साथ कोई तस्वीर न होगी ?
तुम्हारी कसम माँ !
पिछले कई सालों से -
दूसरों से -
तुम्हारी फोटो यदि हो तो देने का  आग्रह करता हूँ !

बस माँ  …
इतना कह सकता हूँ कि -
तमाम झंझावतों के बीच  ……
तमाम फ़ितरतों के बीच  …
तुम्हारे बेटे  …
सुखी है पर
ज़िंदगी में एक ऐसा दुःख है जो हमेशा हमेशा के लिए
दुःख ही रहेगा कि -
"आप और पापा"
हमारे साथ नहीं हैं पर शायद -
यही नियति है जो-
बदस्तूर अनवरत चल रही है ;
समय के साथ और आप दोनों की उस डायरी के साथ।

आंसुओं के साथ -
आपके और पापा के आशीर्वाद के साथ -
आपके नाती और नातिनों के साथ -
बहुओं के साथ -
आपके -
शानू /आशीष

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