Sunday, July 26, 2015

Ten Best Quotes!

Ten best Indian Army quotes: Must read. Really felt proud just  dby reading them.

"Either I will come back after hoisting the tricolor, or I will come back wrapped in it, but I will be back for sure.” – and
Yeh Dil manage More. -Capt. Vikram Batra, PVC

“What is a lifetime adventure for you is a daily routine for us.” – Ladakh Leh highway sign board

“If death strikes, before I prove my blood, I swear I’ll kill death.” – Capt. Manoj Kumar Pandey PVC 1/11 Gorkha Rifles

“Our flag does not fly because the wind moves it, it flies with the last breath of each soldier who died protecting it.”

“To find us, you must be good, to catch us you must be fast, but to beat us…………you must be kidding.”

“May God have mercy on our enemies, because we won’t.”

“We live by chance, we love by choice, we kill by profession.” – Officers Training Academy, Chennai

“If a man says he’s not afraid of dying, he’s either lying, or he’s a Gorkha.” – Field Marshal Sam Manekshaw

“It is God’s duty to forgive the enemies, but it’s our duty to convene a meeting between the two.”

“I regret I have but one life to give for my country.”
Maj Parmashivam

इक चिट्ठी दिल से..!

इक शहीद की विधवा की
अपने पति को पाती  :

तुम कारगिल युद्ध में शहीद होकर...
बहुत दूर...
क्षितिज पे चमकते तारों  की तरह...

आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए -विचारों की तरह.... और...

मेरी तुम्हारी सात फेरों से बंधी..
ज़िन्दगी....
इक लम्बी जिरह!

मेरे बिछड़े साथी!
घटाटोप अँधेरी रात में -परमवीर चक्र के साथ तुम चस्पा हो ...
"ड्रॉयिंग रूम" में अकेले करीने से
और -

मैं यहाँ अकेली...
निर्जन काली रात में -
बड़ा करती.. तुम्हारे बच्चों को..
तुम्हारे सपनों को!

तुम्हारी कसम...
अकेले में -
रोती,सुबकती, कराहती हूँ और
दुनिया के सामने -
शाल ओढ़े...
हाथ में -तुम्हारा मेडल और प्रशस्ति पत्र लिए...
अपने पोरों के आसुओं को छुपाते...
भारी मन से -बैठी रहती हूँ -कुर्सी पे...
तुम्हारी वसीयत बनकर!

तुम्हारी ज़िन्दगी!
(गर्वित गौरव!)

Friday, July 24, 2015

कंप्यूटर सी ज़िन्दगी और प्यार!

ख्वाब अब जी रहे हैं - अपना निर्वासित जीवन.. उस ज़िन्दगी के समुन्दर किनारे....
जहाँ लहरें छोड़ गयी हैं,  अपना तमाम खारापन.... किनारों पर चट्टानों के लिए....
यादों  के बतौर!

आह! कितना मुश्किल  होता है...
अंतर्मन की "Hard Drive" से दिल,प्रेम और कसमों वादों की Basic Programming को Delete करना!

उन्हें क्या बताएं की... जब..
DNA में -
"वफ़ा और मोहब्बत" रचीबसी है-RAM में....
तो फिर...
system तो crash होगा ही न...
ज़िन्दगी के कम्प्यूटर का?

ऐसा  नहीं है की -
ज़िन्दगी के कंप्यूटर को -Refresh करने से... या
Reinstall करने से...
सबकुछ सही हो जाता है!

"Heart Drive" से कुछ नहीं मिटता... और
यदाकदा...
रात भारी होने पे..
बारिश होने से परदे उड़ने पर...
देवानंद और राजेश खन्ना के पुराने गाने सुनने पर... या... फिर
पुरानी डायरियों के पन्नों की धूल के प्रदुषण से...
ज़िन्दगी का system...
Hang कर Reviews दिखाने लगता है!

अब कोई कैसे समझाए इन विदेशी कंपनियों को की....
क्या होता है -
Indian Typical Love!

Lenovo, Samsung और  Compaq को भी -
"Indian Love Standards" को समझना होगा.... जहाँ
ज़िन्दगी की Hard Drive से "पहले प्यार" को कोई Delete नहीं कर सकता!

सच्ची...
उन्होंने बहुत कुछ खोया..
जिन्होंने अपनी रातों की नींद नहीं खोई...
मंदिरों की चौखट पर  प्यार की मन्नत नहीं मांगी.....या
घबराहट में खाना नहीं छोड़ा और..
किसी के साथ...
"साथ-साथ" रंगीन ख्वाब नहीं बुने!

समुन्दर की उथली चट्टानों में...
बहती नदी के पानी में...
बनते बिगड़ते इन्द्रधनुष में...
गुलाब.. गुलमोहर.. और अबीर गुलाल में...
चारों तरफ प्यार है...
बस...
कुछ ही ऐसे खुशनसीब होते है...
जिन्हें मिलता है...
यह ज़िन्दगी का खारापन अपनी कसैले फलसफे के साथ... उम्र भर के लिए!
(गौरव-गर्वित!)

Wednesday, July 15, 2015

अमिताभ ठाकुर (IPS)-प्रथम दृष्टिया !

अमिताभ ठाकुर (आई.पी.एस )!
प्रथम दृष्टिया :
ईमानदारी प्रस्फुटित होती है -व्यक्तित्व से।
चश्मा !बताता है  … थोड़ा सनकी खुद्दार किस्म के इंसान !
कपडे बताते हैं -सरल संजीदा किस्म का बंदा !
विशेष :कहीं से नहीं लगते पुलिसिया अंदाज़ वाले अफसर !
आई पी सी 376 :धारा कमजोर ,फीकी और झूठीं लगती है तुम्हारी शख्सियत के आगे !
कुलमिलाकर :
एक अच्छा इंसान जो संघर्ष कर रहा है -
काले बादलों से -जबकि बादल छटेंगे और सूरज निकलेगा।



Monday, July 6, 2015

बदलते लक्ष्य!

अब बदलना पड़ेगी अपनी धार..
ज़िन्दगी की रफ़्तार..
समय कर रहा खबरदार.. नहीं छोड़ सकता अपनों को बीच मंझधार... क्यों की -
मैं ही हूँ -अपनों का सिपहसालार!

जो पाया नहीं उसे छोड़ दो....
जो है -उसे रोपो और बोओ...
क्यों की ;
ख्वाब सपने और लक्ष्य..
समय और लम्हों के मोहताज हैं!
समय निकल जाने के बाद दूर गगन की छाँव में नक्षत्र ताकने से बेहतर है....
अपनों की बैसाखी बन उन्हें समर्पित कर दें ...  अपना अनुभव!

ये ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा...
वो ज़िन्दगी भी क्या ज़िन्दगी...
जिसने ;
अपनों को न संवारा!

नहीं सोच सकता...
मेरे ख्वाब..
हाथ जोड़ें किसी के सामने नौकरी के लिए...
बाट जोहें बंटवारे की जमीन बेचने की...
इंतज़ार अनुनय और विनय करें किसी के सामने -दया की!

हे भगवन!
इतनी ताक़त देना... की कुछ ऐसा पौधा रोप जाऊं अपने आँगन में...
जो कभी घना छायादार वृक्ष बन जाए और...
जब कभी जब हम दोनों न हों तो...
मेरे अनमोल रतन..
उस वृक्ष पे हाथ रख...
धीरे से बोलें...
पापा आप कहाँ हो?
I Love You!

Friday, July 3, 2015

अपनी पटकथा के सत्रह वर्ष ! [Celebrating 17 Years Of Togetherness ]


अपनी पटकथा के सत्रह वर्ष !
[Celebrating 17 Years Of Togetherness ]
पूरी फ़िल्मी है अपनी पटकथा :

माँ-पापा का बिछड़ना....
संघर्ष की मंझधार में तुम्हारा मिलना...
शादी में संघर्ष... उस दूरी के बीच हम दोनों की दीवानगी... और
अंततः मिलन!

शादी के बाद जीवन पथ की यात्रा -
माँ पापा का पितरो में मिलाना...
प्यारे से बेटे और बेटी का आँगन में आना और
मेरी छोटी सी नौकरी!

इसी आपाधापी के बीच....
फुर्सत-सुकून के कुछ पल...
माँ वैष्णव, शिमला -कुल्लू -मनाली की यात्रा...
एम.बी.ए -की डिग्री और
बहुत दूर -दूर गगन की छावं में...
सफलता की तलाश...

इस बीच...
तुम्हारी माँ का बिछड़ना...
तुम्हारे भाई का भी असमय जाना और
घर में दिलों का बंटवारा... 

पैसे के आगे रिश्तों को गिड़गिड़ाते हम दोनों ने देखा और देख भी रहे हैं... 

तुम्हारे बाबूजी का हमारे लिए प्यार, दुलार और आशीर्वाद....
उस प्यार स्नेह पे लोगों का क्षोभ और हमारे लिए समस्या पैदा करना!

जीवन की आपाधापी... हताशा ... आत्मविश्लेषण... असंभव और ईश्वर जैसे जटिल शब्दों से साक्षातकार!

मेरा एक्सीडेंट...
तुम्हारी जीवटता से परिचय...
मेरी बैसाखियों को तुम्हारा सम्बल...
मेरे घिसटने को तुम्हारा सहारा...
मेरे आसुओं को तुम्हारी हथेली...
मेरी निराशा को तुम्हारी आशा और -
मेरी ज़िन्दगी को तुम्हारा साथ!

एक्सीडेंट -इक "टर्निंग पॉइंट" ज़िन्दगी का...
लोगों का मुझे विकलांग समझना...
मुझे बैसाखियों के सहारे चलते देख फिंकरे कसना... घर में दूध शक्कर बाजार से लाने अथवा मंगवाने की जद्दो जहद... 

मेरी निराशा... मेरा टूटना और तुम्हारी आशा तुम्हारा सम्बल...
मुझे चलना सिखाना..
मुझे दौड़ना सिखाना ...
ख्वाब को लक्ष्य बनाने को प्रेरित करना और
अमावस को फिर पूरनमासी करने की तुम्हारी कठिन जिजीविषा!

खर्चों का बढ़ना..
विलासता और शौकों का सिमटना..
AC, RO, कार और बन्दूक की जद्दोजहद...
बड़े होते बच्चों की फरमाइशें.. उनके ख्वाब.. उनके सपने...
उनके प्रश्न हमारे उत्तर..
उनकी जिद्द हमारी डाट..
और
उनका इंटरनेट, टेबलेट, psp गेम और हमारी फटकार...
सौ अफ़साने सौ बहाने!

हो सकता है..
यही ज़िन्दगी हो?
यही दाम्पत्य जीवन हो?
यही गृहस्थ का वानप्रस्थ से मिलन हो? या
यही नियति का दस्तूर अपने प्रबलतम रूप में हो.... हमें सशक्त हो कर उभारने के लिए?

इस जीवन समर की पदयात्रा में मेरा पल पल धुप में छाँव बन साथ देने का...
मेरी सांस बन आवाज़ देने का...
मेरी ज्योति बन जीवन देने का...
शुक्रिया! दिल से... दिल तक...
तुम्हारे जैसे हमसफ़र के साथ यात्रा जारी है...
जन्म जन्मान्तर तक!
(शानू!)