अब बदलना पड़ेगी अपनी धार..
ज़िन्दगी की रफ़्तार..
समय कर रहा खबरदार.. नहीं छोड़ सकता अपनों को बीच मंझधार... क्यों की -
मैं ही हूँ -अपनों का सिपहसालार!
जो पाया नहीं उसे छोड़ दो....
जो है -उसे रोपो और बोओ...
क्यों की ;
ख्वाब सपने और लक्ष्य..
समय और लम्हों के मोहताज हैं!
समय निकल जाने के बाद दूर गगन की छाँव में नक्षत्र ताकने से बेहतर है....
अपनों की बैसाखी बन उन्हें समर्पित कर दें ... अपना अनुभव!
ये ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा...
वो ज़िन्दगी भी क्या ज़िन्दगी...
जिसने ;
अपनों को न संवारा!
नहीं सोच सकता...
मेरे ख्वाब..
हाथ जोड़ें किसी के सामने नौकरी के लिए...
बाट जोहें बंटवारे की जमीन बेचने की...
इंतज़ार अनुनय और विनय करें किसी के सामने -दया की!
हे भगवन!
इतनी ताक़त देना... की कुछ ऐसा पौधा रोप जाऊं अपने आँगन में...
जो कभी घना छायादार वृक्ष बन जाए और...
जब कभी जब हम दोनों न हों तो...
मेरे अनमोल रतन..
उस वृक्ष पे हाथ रख...
धीरे से बोलें...
पापा आप कहाँ हो?
I Love You!
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