अपनी पटकथा के सत्रह वर्ष !
[Celebrating 17 Years Of Togetherness ]
पूरी फ़िल्मी है अपनी पटकथा :
माँ-पापा का बिछड़ना....
संघर्ष की मंझधार में तुम्हारा मिलना...
शादी में संघर्ष... उस दूरी के बीच हम दोनों की दीवानगी... और
अंततः मिलन!
शादी के बाद जीवन पथ की यात्रा -
माँ पापा का पितरो में मिलाना...
प्यारे से बेटे और बेटी का आँगन में आना और
मेरी छोटी सी नौकरी!
माँ पापा का पितरो में मिलाना...
प्यारे से बेटे और बेटी का आँगन में आना और
मेरी छोटी सी नौकरी!
इसी आपाधापी के बीच....
फुर्सत-सुकून के कुछ पल...
माँ वैष्णव, शिमला -कुल्लू -मनाली की यात्रा...
एम.बी.ए -की डिग्री और
बहुत दूर -दूर गगन की छावं में...
सफलता की तलाश...
फुर्सत-सुकून के कुछ पल...
माँ वैष्णव, शिमला -कुल्लू -मनाली की यात्रा...
एम.बी.ए -की डिग्री और
बहुत दूर -दूर गगन की छावं में...
सफलता की तलाश...
इस बीच...
तुम्हारी माँ का बिछड़ना...
तुम्हारे भाई का भी असमय जाना और
घर में दिलों का बंटवारा...
तुम्हारी माँ का बिछड़ना...
तुम्हारे भाई का भी असमय जाना और
घर में दिलों का बंटवारा...
पैसे के आगे रिश्तों को गिड़गिड़ाते हम दोनों ने देखा और देख भी रहे हैं...
तुम्हारे बाबूजी का हमारे लिए प्यार, दुलार और आशीर्वाद....
उस प्यार स्नेह पे लोगों का क्षोभ और हमारे लिए समस्या पैदा करना!
जीवन की आपाधापी... हताशा ... आत्मविश्लेषण... असंभव और ईश्वर जैसे जटिल शब्दों से साक्षातकार!
मेरा एक्सीडेंट...
तुम्हारी जीवटता से परिचय...
मेरी बैसाखियों को तुम्हारा सम्बल...
मेरे घिसटने को तुम्हारा सहारा...
मेरे आसुओं को तुम्हारी हथेली...
मेरी निराशा को तुम्हारी आशा और -
मेरी ज़िन्दगी को तुम्हारा साथ!
तुम्हारी जीवटता से परिचय...
मेरी बैसाखियों को तुम्हारा सम्बल...
मेरे घिसटने को तुम्हारा सहारा...
मेरे आसुओं को तुम्हारी हथेली...
मेरी निराशा को तुम्हारी आशा और -
मेरी ज़िन्दगी को तुम्हारा साथ!
एक्सीडेंट -इक "टर्निंग पॉइंट" ज़िन्दगी का...
लोगों का मुझे विकलांग समझना...
मुझे बैसाखियों के सहारे चलते देख फिंकरे कसना... घर में दूध शक्कर बाजार से लाने अथवा मंगवाने की जद्दो जहद...
लोगों का मुझे विकलांग समझना...
मुझे बैसाखियों के सहारे चलते देख फिंकरे कसना... घर में दूध शक्कर बाजार से लाने अथवा मंगवाने की जद्दो जहद...
मेरी निराशा... मेरा टूटना और तुम्हारी आशा तुम्हारा सम्बल...
मुझे चलना सिखाना..
मुझे दौड़ना सिखाना ...
ख्वाब को लक्ष्य बनाने को प्रेरित करना और
अमावस को फिर पूरनमासी करने की तुम्हारी कठिन जिजीविषा!
मुझे दौड़ना सिखाना ...
ख्वाब को लक्ष्य बनाने को प्रेरित करना और
अमावस को फिर पूरनमासी करने की तुम्हारी कठिन जिजीविषा!
खर्चों का बढ़ना..
विलासता और शौकों का सिमटना..
AC, RO, कार और बन्दूक की जद्दोजहद...
बड़े होते बच्चों की फरमाइशें.. उनके ख्वाब.. उनके सपने...
उनके प्रश्न हमारे उत्तर..
उनकी जिद्द हमारी डाट..
और
उनका इंटरनेट, टेबलेट, psp गेम और हमारी फटकार...
सौ अफ़साने सौ बहाने!
विलासता और शौकों का सिमटना..
AC, RO, कार और बन्दूक की जद्दोजहद...
बड़े होते बच्चों की फरमाइशें.. उनके ख्वाब.. उनके सपने...
उनके प्रश्न हमारे उत्तर..
उनकी जिद्द हमारी डाट..
और
उनका इंटरनेट, टेबलेट, psp गेम और हमारी फटकार...
सौ अफ़साने सौ बहाने!
हो सकता है.. यही ज़िन्दगी हो?
यही दाम्पत्य जीवन हो?
यही गृहस्थ का वानप्रस्थ से मिलन हो? या
यही नियति का दस्तूर अपने प्रबलतम रूप में हो.... हमें सशक्त हो कर उभारने के लिए?
इस जीवन समर की पदयात्रा में मेरा पल पल धुप में छाँव बन साथ देने का...
मेरी सांस बन आवाज़ देने का...
मेरी ज्योति बन जीवन देने का...
शुक्रिया! दिल से... दिल तक...
मेरी सांस बन आवाज़ देने का...
मेरी ज्योति बन जीवन देने का...
शुक्रिया! दिल से... दिल तक...
तुम्हारे जैसे हमसफ़र के साथ यात्रा जारी है...
जन्म जन्मान्तर तक!
(शानू!)
जन्म जन्मान्तर तक!
(शानू!)

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