Saturday, April 7, 2018

शिकार!

उम्र के इक पड़ाव पर ..
इक शिकार हमने भी किया था !
गोली यहां से भी चली थी ; 
गोली वहां से भी ! 
दोनों मारे गए थे ! 
सजा दोनों को मिली ! 
ज़िंदा दोनों हैं !

Wednesday, April 4, 2018

समय का हिसाब!

"उन पलों को सलाम ...
जो पल बन गए !
और ..हम जिनके सहारे जी गए !
वरना समय का हिसाब ...
कौन रख पाया है ?

समय ; यूँ ही गुज़र जाता हैं ..
मौसमों की मानिंद और ...
हम ठहरे पानी से ...
बुलबुले बन ...
उड़ जाते हैं ...
ज़िन्दगी की तपिश में !"