Wednesday, April 4, 2018

समय का हिसाब!

"उन पलों को सलाम ...
जो पल बन गए !
और ..हम जिनके सहारे जी गए !
वरना समय का हिसाब ...
कौन रख पाया है ?

समय ; यूँ ही गुज़र जाता हैं ..
मौसमों की मानिंद और ...
हम ठहरे पानी से ...
बुलबुले बन ...
उड़ जाते हैं ...
ज़िन्दगी की तपिश में !"

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