Sunday, February 26, 2017

हेरिटेज चिंतन ! आज खजुराहो में दुनियाँ दौड़ी पर बेचारा खजुराहो नहीं दौड़ा !

आज खजुराहो में हेरिटेज रन का आयोजन हुआ।
बड़ी ही मेहनत और मशक़्क़त से उक्त कार्यक्रम को सफल बनाया गया।
हरी झंडियां दिखाई गयीं और खजुराहो दौड़ पड़ा।
खजुराहो दौड़ा  .... बहुत तेज़ दौड़ा  .... लेकिन बहुत तेज़ दौड़ते बिचारे खजुराहो को पता ही नहीं चला कि -इस दौड़ का वाज़िब हक़ीक़त का अंत कहाँ है ?
हर बार खजुराहो दौड़ पड़ता है इस भावना के साथ कि -"उसके दिन बहुरेंगे !" 
लेकिन दौड़ के बाद वही "ढाक के तीन पात" जैसी स्थिति होती है ?
रंग बिरंगी टीशर्टें पहन चन्द घण्टों के लिए बेचारा खजुराहो खो जाता है दुनिया की रंगीनियों में  .... लेकिन उसके बाद की सुबह बहुत कष्टदायक होती है।
लोग आते हैं  ... खजुराहो के विषय में बेहतरीन बड़ी बड़ी बातें होती हैं  ... ऐसा कर देंगे ; वैसा कर देंगे ;ऐसा होना चाहिए;वैसा होना चाहिए  ... और फिर सुबह जब कठोर धरातल पर कदम पड़ते हैं तो बिचारा खजुराहो बड़े लोगों का रमणीक पिकनिक पॉइंट बन कर रह जाता है।
करोङो नहीं बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा रूपया अभी तक खजुराहो के तथाकथित उद्धार पर झोंका जा चूका है परंतु कोई यह बताये कि -उससे खजुराहो को क्या मिला ?

मैं नीचे कुछ तथ्य दे रहा हूँ जिनका जवाब हर खजुराहो के भाग्यउदय से जुड़ा हुआ इंसान चाहता है ?

१) यदि हेरिटेज यानि विरासत का इतना ही ख्याल था तो फिर चन्द वर्ष पहले अपने ही मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने "खजुराहो टेंपल व्यू होटल"- ललित ग्रुप को क्यों बेचा /दिया /लीज किया था ?
२) अभी कुछ बरसों पहले मध्य प्रदेश सरकार के एक और बेहतरीन "राहिल होटल" को भी "सायना ग्रुप" को दे दिया गया !क्यों ? किस हेरिटेज प्लान या दौड़ के अन्तर्गत ?
३) खजुराहो में भारत सरकार के पर्यटन विभाग का कार्यालय था जिसे शायद किसी हेरिटेज दौड़ में भाग लेने इंदौर भेज दिया गया और अब वह कार्यालय वहीँ बस गया है !
४) करोड़ों रुपए की लागत से बन कर तैयार खजुराहो का अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा आज भी अपनी हेरिटेज उड़ान का इन्तिज़ार कर रहा है !
५) रेलवे स्टेशन में काश कभी शताब्दी या ताज़ एक्सप्रेस स्तर की ट्रेनें अपना-"हेरिटेज चक्कर" लगाने लगें तो शायद बेचारा दीनहीन खजुराहो अपने भाग्य का रोना छोड़ कर टूरिस्टों का स्वागत करना शुरू कर दे और होटलों के खाली कमरें भी आमदनी देने लगें !
६ ) सड़कों का क्या कहना !वह समस्या तो अंग्रेजी भाषा के "टेन्स" सीखने में मदद करने लगी है !
उदहारण के लिए -"खजुराहो में सड़कें खराब थीं ;ख़राब है और खराब रहेंगी !"
७ ) उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाली महोबा लवकुशनगर राजनगर खजुराहो सड़क तो इतनी बदतर स्तिथि में है कि -इस मार्ग से खजुराहो जाने वाले पर्यटकों को ७० किलोमीटर के सफर में साढ़े चार घंटे लगते है। कभी कभी तो लगता है कि -शासन इस सड़क को ही -"हेरिटेज मार्ग " घोषित कर दे जिससे कम से कम आने वाले पर्यटकों को शासन के "हेरिटेज चिंतन" के विषय में काफी कुछ समझ में आ जाएगा।
८) खजुराहो स्थित युथ हॉस्टल भी अपनी चन्द अंतिम साँसें गईं रहा है। काश कभी कोई -"हेरिटेज दौड़ " इस युथ हॉस्टल को भी बचाने के लिए निकल पड़ती तो वाकई इसका और खजुराहो का उद्धार हो जाता !
९) खजुराहो आने वाला हर हवाई जहाज दिल्ली से बनारस जाता है और फिर खजुराहो आता है। ऐसे ही दिल्ली जाते समय भी पर्यटक को जबरदस्ती पहले खजुराहो से बनारस जाना पड़ता है और फिर वह दिल्ली पहुँचता है। ऐसा क्यों ?? इससे उस टूरिस्ट को बेफालतू में लंबे मार्ग का किराया देना पड़ता है। इस कारण दिल्ली में बैठे ट्रेवल एजेंट या टूर ओपेरटर टूरिस्ट के नाहक लगने वाले पैसे को बचाने के चक्कर में -बेचारे खजुराहो के भ्रमण को काट देते हैं ! और खजुराहो अपनी पलक पावणें बिछा कर सुनी आँखों से पर्यटकों का इन्तिज़ार करता रहता है। शासन /प्रशासन /राज्य /केंद्र सरकार एक सख्त आदेश से सब कुछ संभल सकता है और हमारे खजुराहो के आम जनमानस को ऐसी बीस किलोमीटर की हेरिटेज दौड़ों की जरुरत ही नहीं पड़ेगी।
१०) हक़ीक़त में -:हेरिटेज दौड़ " की जरुरत उन स्थलों को होती है जहाँ आम जनमानस के भीतर उस स्थल के प्रति जागरूकता या प्रेम की कमी पाई जाती है। वास्तविकता में खजुराहो के आम जन के भीतर खजुराहो की विरासत और स्थापत्य के प्रति ज़बरदस्त शृद्धा एवम नैतिकता कूट कूट कर भरी हुई है। एक ड्राइवर से लेकर गाइड या जनरल मेनेजर अथवा विधायक और सांसद महोदय तक खजुराहो की रक्षा और उसके उन्नयन के प्रति प्रतिबद्ध है और रहेंगे। जरुरत है-सिर्फ केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा कठोर निर्णयों के क्रियान्यवन की। 
अंत में क्या कहूँ ???
आज खजुराहो नहीं दौड़ा !
वह तो किसी कौने में बैठ कर दुखी मन से देख रहा था इस हेरिटेज दौड़ के खेल को !!
दौड़े सिर्फ होटल वाले  ...
दौड़े सिर्फ सरकारी वर्दी वाले  ....
दौड़े सिर्फ सत्ता के आदरणीय  ....
दौड़े सिर्फ बिचारे नगर निकाय के कर्मचारीगण  ...
कुछ स्कूलों के बच्चे और कुछ थोपे हुए आदेश  की तीमारदारी करते बिचारे कर्मचारी !
चलो बधाई हो !
आज चंदेल दौड़े !
आज बुन्देल दौड़े !
आज मतंगेश्वर दौड़े !
आज खजुराहो दौड़ा !
चलो फिर बनाते है -एक बेहतरीन "बाईलाइन !




Saturday, February 25, 2017

पुर सुकून!

"बहुत सालों तक ..
वीरान रातों में ..
सताया है तूने ..
ऐ रातकली !

हमने भी अब ..
तेरी यादों की बेल पर ..
आंसुओं का पानी सींचना ..
छोड़ दिया है ...और ;
तेरी कसम ;
तेरे बिन ;
मुर्दा बन पड़ा रहता हूँ ..
पुर सुकून से !!"

समय और गुज़रती उम्र !

"ढूंढते ढूंढते खुद को
मैं भटक गया हूँ ;
खुद से !

अब जब ..
उम्र का कारवाँ गुज़र गया ..
खाली पसीने से भरी ..
हथेलियों से रगड़ कर ..
उंगलियां ;
उकेरता हूँ ..
खोये हुए समय के वज़ूद को !

क्यों नहीं समझ पाया
उम्र,समय और उसके तिलिस्म को ?
और
चन्द सोहबतों के आगोश में
झोंक दी एक ज़िन्दगी !

और आज जब ..
देखा अपने अक्स को ..
बेटे के रूप में ; तो ..
नज़र आ गया मुझे ...
अपना वही अक्स और ..
लगा कि -
मैं न सही ....
मेरा बेटा सही ...
और
अब न भटकने दूंगा उसे ...
उन रास्तों से ..
जिन रास्तों से ...
कभी मैं गुज़रा था !!"

"समय जख्म कभी नहीं भरता बल्कि देता है ; सिर्फ घाव असफलता और बिछोह के !"

Friday, February 24, 2017

महाशिवरात्रि!

आज महाशिवरात्रि पर -
हम एक ऐसे शिव मन्दिर में  गए ...
जहां कभी ...
प्रकृति ने बिजली गिरा दी थी !

थोड़ा मुख्य धारा से हट कर ...
थोड़े सहमे से भगवन ...
थोड़ा संकोची संकोची सा माहौल था !
क्योंकि ..अब ...
बिजली गिर जाने से ...
खण्डित से थे ...
देवों के देव ;महादेव !

हमने मोबाइल से शिव चालीसा सुनी  और उपासना की !

सच ..
मेरे शंकर मेरे भोलेनाथ कितने अच्छे हैं !
न कोई कठिन पूजा न विधि ..
बस ...
साधारण सी पूजा ..
और आगाध श्रद्धा निधि !

बस ....मिलजाएँगे भोलेनाथ! कर लो तनिक ;यह विधि !

Thursday, February 16, 2017

कटी पतंग !

वाहियात ख़ुशबुओं से ..
रूबरू होने की ..
आदतें छोड़ दे ..
ऐ कटी पतंग !
क्यों ???
भूल जाता है तू कि ..
मुद्दतों पहले ..
तेरी जो कटी डोर थी ..
वो आज भी ..
भटक रही है ..
उलझी उलझी !
"कभी कभी
जख्मों को हरा रखना
खुशगवार होता है ;
ऐ मेरे बदनसीब शौक़ीन !"                  











Wednesday, February 15, 2017

बेटे ; हम शर्मिंदा हैं ...कि हमारे बीच नरभक्षी लोग भी रहते हैं !

बुन्देलखण्ड में अमानवीय समाचार मिलते ही रहते हैं !कभी भूंख से कोई मर जाता है तो कभी इलाज़ न करवा पाने के कारण ;
गरीबी से !
अभी मैं एक कार्यक्रम में दिल्ली आया हुआ हूँ ! यहां शाम को पार्क में बैठे हुए बुजुर्गों की चर्चा का विषय -"बुंदेलखंड की गरीबी और अपराध है!"
जब मैंने उन्हें दखल दे कर बताया कि -
"मैं बुन्देलखण्ड का हूँ तो- उन्होंने मुझे इस आश्चर्य से देखा कि मैं इतना शिक्षित कैसे हो गया और इतने आत्मविश्वास से कैसे उनसे बातें कर रहा हूँ ?"
अभी खजुराहो के चार-पांच वर्षीय मासूम बालक की हत्या हो गई और उसका शरीर खजुराहो से लगभग ६५ किलोमीटर दूर कुए में मिला है !
पुलिस की क्षमताओं पर पूरा यकीन और विश्वास करते हुए उनसे निवेदन है कि -
वह देखे कि -
जो मोबाइल नम्बर खजुराहो के स्कूल के आसपास सक्रीय था क्या वह धमोरा के आसपास सक्रीय हुआ ?
खजुराहो से धमोरा के बीच रास्तों में लगे कैमरों में शायद कोई सुराग मिल जाए ?
कोई दुश्मनी ?
कोई बलि वगैरह ?
कुए तक पहुँचने वाली गाड़ी के पहियों के निशान वगैरह या किसी ने कोई संदिग्ध गतिविधि देखी हो ?
धमोरा ही क्यों ??? चुना गया वारदात के लिए ???
सम्भवतः धमोरा में ही कुछ न कुछ पुलिस को मिल सकता है !
स्कूल की छुट्टी होने से पहले स्कूल के बाहर की गतिविधियों को शायद किसी ने देखा हो ? जो अव्यवहारिक या संदिग्ध किसी को लगी हों ?
यदि दुश्मनी उसी बच्चे से होगी तो शायद अपराधियों ने माता पिता के घर में चक्कर लगाया हो ?
सैकड़ो शंकाएं सैकड़ों बातें पर जीवन भर का दर्द और आंसू सिर्फ परिवार जनों को !
सारा खजुराहो और छतरपुर जिला स्तब्ध है इतनी विदारक घटना से !
सच निवाला नहीं जा रहा है ....आज की रात मुँह में !
दुश्मनी , अपराध और बर्बरता तो बहुत देखी लेकिन इस घटना ने तो इंसानियत और मनुष्यता को तार तार कर के रख दिया !
सच कभी कभी लगता है की ...हम पुनः जानवर बनने की और चल पड़े हैं !
निवेदन है कि माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय अपनी पूरी प्रवणता और अनुभव को दांव पर लगाते हुए उन आताताइयों को उनके लिए नियत स्थान पर पहुंचाएंगे !
भगवान् उस निरीह बालक की आत्मा को शांति प्रदान करे और ....
बस क्या कहें ...
बेटे ; हम शर्मिंदा हैं ...कि ...
हमारे बीच नरभक्षी लोग भी रहते हैं !
तुम्हें ...नमन दिल से !

Monday, February 13, 2017

इस वेलेंटाइन ; प्लाश सी ... दो बातें ..तुम्हें समर्पित !!

पतझड़,आंधी और तूफानों का तो ...
ता उम्र अहसास रहा ...
बसन्त और सावन का भान ..
तेरे मोहपाश से हुआ !

कुछ कुछ ..
नन्ही गौरैयों की मानिंद ...
तुम आ गईं ....
मेरे आँगन में चहचहाने और ..
जीवन यज्ञ की ....
सारी बगिया ...
चन्दन सी महक उठी ...
तेरे साथ !

मुझे कभी ....
गुलाब अच्छे नहीं लगे ...
क्योंकि ;
न मैं कभी गुलाब हुआ और ...
न कभी ज़िन्दगी गुलाबी !!

कल भी और आज भी ...
सिर्फ पलाश के फूल ही ...
तुम्हारे जैसे ...
मन को भाते रहे हैं !

कुछ कुछ ...
प्लाश सी ज़िन्दगी ...
बहुत सुकून देती है !

बसन्ती-बसन्ती ...
भीनी-भीनी ...
पेड़ से गिर कर ...
मिटटी में धीरे से ...
ठहरी ठहरी ...
उड़ती उड़ती और ...
दूसरों को सुख देती ...
प्लाश के फूलों जैसी पवित्र ..
सोंधी सोंधी ज़िन्दगी ...
तुम्हारे साथ होने का ..
अहसास कराती रहती है ;
पल पल !

इस वेलेंटाइन ;
ऐ मेरी प्लाश !
बस इतनी ही ...प्लाश सी ...
दो बातें ..तुम्हें समर्पित !!

Saturday, February 11, 2017

श्री.अजातशत्रु श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ सेवा पदक दे कर किया सम्मनित !

छतरपुर में एक लम्बे अंतराल तक लोकप्रिय जिला अध्यक्ष /कलेक्टर रहे श्री.अजातशत्रु श्रीवास्तव को विगत दिनांक ११/२/१७ को मुख्यमंत्री श्री.शिवराज सिंह चौहान ने सिंहस्थ सेवा पदक से सम्मानित किया !
सिंहस्थ के दौरान उनके आयुक्त पुरातत्व रहते उनकी अति विशिष्ट सेवाओं हेतु उन्हें यह सम्मान दिया गया !
हम प्रफुल्लित एवम गर्वित हैं ;आपकी इस उप्पलब्धि से !
बधाई एवम नमन!

Thursday, February 9, 2017

आह !सब कुछ गुज़र गया !



वो भी क्या रातें थीं ...

जब हम ;
अंधेरों से बतियाते थे !
चन्दा मामा के साथ साथ ..
चलते थे और ...
टूटते तारों से ...
तेरा संग और साथ मंगाते थे !
हां !
सब कुछ गुज़र गया ...
गुज़रे ज़माने की तरह !
जरा सा वक़्त ने ....
पहलू क्या बदला ;
जरा सी काया ने ....
उमर क्या दिखाई और
जुल्फों ने ....
सफेदी की रंगत क्या चढाई ..
सब कुछ ख़तम हो गया !
वो भी क्या दिन थे ...
जब तेरी याद में हम ...
रात रात भर नहीं सोते थे !
रातों में जागते थे और ...
दिन में फिर ...
तेरी यादों में खोते थे !
आह !
सब कुछ गुज़र गया !
पता ही नही चला ...
ज़िन्दगी ढोते ढोते !
तारे तो रोज़ निकलते होंगे ..
और चाँद भी रातों में ...
जम्हाई लेता ही होगा !
अब तो ...
बहुत बरसों से ....
तेरी कसम भी नहीं खाई है !
पर हाँ !!
इतना मालूम है कि -
समय के प्रवाह में ...
अब रातें मुझे घेरती नहीं हैं ..
और अँधेरे ....
मुझे सुलगाते नहीं हैं !
क्योंकि ...
अब "अपनी तपनी"
पिक्चर का "क्लाइमैक्स" ....
तो गुज़र चुका है और
तू अपने उजालों के साथ है ..
और मैं ;
अपने अंधेरों के तिलिस्म में ..
रौशनी तलाश रहा हूँ !
शब्बा खैर !

सुबह की मॉर्निंग वाक और लवकुशनगर !

बहुत से युवा एवम बुजुर्ग आजकल बदलते समय के साथ मॉर्निंग वाक पर  ....
महोबा,चंदला एवम छतरपुर रोड पर निकलते हैं। उनका उद्देश्य जहाँ अपने स्वास्थ्य को तंदुरुस्त रखना होता है वहीँ प्राकृतिक सौन्दर्य का भी लाभ लेना होता है। 

अभी कुछ दिनों से कुछ श्रवणकुमारों ने बताया है कि वे अपने पिताजी की मॉर्निंग वाक से बहुत चिंतित रहते हैं। ये बुजुर्ग जो सुबह सुबह अपनी मॉर्निंग वाक पर निकलते हैं वे मॉर्निंग वाक से ज्यादा लवकुशनगर के बनते बिगड़ते नक़्शे पर ध्यान देते हैं। जिसका असर उनके बनते बिगड़ते स्वास्थ्य पर हो रहा है।एक दम से बीपी का बढ़ या घट जाना ,सीने में घबराहट होना या सांस फूलना और अत्याधिक गुस्सा आने के कारणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो गया है।  
चलते चलते उन्हें पता हो जाता है कि किसने कितना अतिक्रमण किया और कौन करने वाला है !किसकी 'मयाड़' कहाँ से थी और अब कहाँ पहुँच गई है।आखिर लवकुशनगर के असली इतिहास के तो यही जानकार हैं चूँकि इन्होंने इस लौंडी को लवकुशनगर बनते भलीभांति देखा है। इनसे कुछ नहीं। इसी मॉर्निंग वाक में लाखों के जमीनों के सौदे भी हो जाते हैं। कुछ नेता टाइप के लोग तो मौका मुआयना भी कर लेते हैं और फिर काम आगे पीछे होते रहते हैं।  
चिंता कि  बात यह है कि -उम्र की संध्या की और गतिमान बुजुर्गों को कौन समझाए कि -"अब छोड़ो ये सब जी का जंजाल और मॉर्निंग वाक में -कमी झिन्नन के हनुमान जी या गायत्री माता के मंदिर में सुविचारों से अवगत हो और हमें करवाएं परंतु पूज्य पिताजी लोग मानते ही नहीं।
 फिर जब लौट कर आते हैं तो लवकुशनगर के  को लेकर झल्लाते हैं और कहते हैं कि -"इससे भली तो हमारे ज़माने की लौंडी थी जहां इतनीं उछल कूद नहीं थी और सभी प्रेम भाव से रहते थे। आज कल तो जहाँ देखो ज़मीनों की लड़ाई के अलावा कुछ नहीं है। "
खैर  .... ज़िन्दगी गतिमान है। आज ये अपने आदरणीय बुजुर्ग अपने वानप्रस्थ की और जा रहे हैं और कल हमारा भी नंबर आएगा। इसी को ज़िन्दगी कहते हैं।
नमन !

Wednesday, February 8, 2017

नगर उदय तो हो गया परंतु लवकुशनगर उदय कब होगा ?

नगर उदय तो हो गया परंतु लवकुशनगर उदय कब होगा ??????

आज लवकुशनगर में आदरणीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नगर उदय अभियान का समापन कार्यक्रम समारोह पूर्वक हो गया।
जिनका उदय होना था  ....
जो नारी शक्ति थी  ....
जिनके नाम से सम्पूर्ण प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किये गए ;
वे स्वर्गीय कवयित्री महादेवी वर्मा की अमर पंक्तियों को उदधृत्त करती हुई -:"अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी आँचल में है दूध और आँखों में पानी " की तर्ज पर  ...
जमीन पर बैठ कर अपनी बारी का इन्तिज़ार करती रहीं और हम सभी  ....
लाटसाहब बन कुर्सियों की शोभा बढ़ाते रहे !
बड़ी बड़ी बातें  ....बड़े बड़े ख्वाब  ... 
देश और दुनियाँ को बदलने की कवायदों के बीच लवकुशनगर का आम नागरिक बरसों से अपने उदय का इन्तिज़ार कर रहा है।
हक़ीक़त में अपना लवकुशनगर क़स्बा पहाड़ों के चारों तरफ बसा हुआ है। जो सक्षम थे जो बड़े आदमीं थे या जो ताक़तवर थे वे सड़कों पर पहाड़ों के किनारे बस गए और जो बिचारे ज़िन्दगी की दौड़ में थोड़ी पीछे रह गए वे आज भी इन पहाड़ों के पीछे -कंठीमोहल्ला में या चौरसिया मोहल्ले में या जटुआ मोहल्ले में अपनी बची खुची ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं।
अब उनके उदय की बात कौन करे ?

  • क्यों नहीं कोई सोचता लवकुशनगर की सब्ज़ी मंडी के बारे में ?
  • लवकुशनगर के मध्य में बसे चीड़घर के विषय में ?
  • सर्राफ सागर के सौन्दर्यकरण के विषय में ?
  • अथवा लवकुशनगर में रोज़ लग रहे ट्रैफिक जाम के विषय में ?
  • अरे कभी तो वो सुबह आएगी जब हमारे यहां भी बाईपास होगा और उसपर चोरी की बालू वाले डंफर नहीं बल्कि हमारी बसें चलेंगी?
  • कभी तो हमारे यहां ऑटो चलेंगे और हम या हमारे बच्चे ऑटो कर के घर आया करेंगे ?
  • मीट मंडी की योजना कौन बनाएगा ?
  • एटीएम की जरुरत क्या छतरपुर रोड में या चंदला रोड में नहीं है ?
  • रेस्ट हाउस के पास बने सुलभ काम्प्लेक्स का उद्द्घाटन कब होगा ?क्या यह सुलभ काम्प्लेक्स प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी के स्वच्छता अभियान का हिस्सा नहीं है ?
  • हायर सेकंडरी स्कूल के सामने से  जाने वाली टूटी फूटी सड़क जिसमें थाना ,बीआरसीसी कार्यालय ,एसडीओपी निवास एवम कार्यालय तथा एलआईसी कार्यालय स्थित है किसी को नहीं दिखती ?कौन बनवायेगा इस सड़क को जो हमारी ज़िन्दगी की आवश्यकता है ?
  • पुरे लवकुशनगर में सिर्फ एक पेट्रोल पंप?

कुछ पचता नहीं न??
देखो  ... गढ़ी मलहरा एवम महाराजपुर या खजुराहो राजनगर रोड़ों पर ????
बिजली के खम्बो की तरह खड़े है पेट्रोल पंप और हम लवकुशनगर के महान नगरवासी इन्तिज़ार कर रहे हैं अपने उदय का ?????
सच  .... दुःख होता है ये सोच कर कि  ...कौन होगा हमारा पालनहारी जो कभी हमारे नगर का उदय भी करेगा ?
बमबरबैनी माता  ....
लवकुश बब्बा  ....
झिन्नन के हनुमानजी  ....
छोटी भवानी ,बड़ी भवानी  .....
सबसे पुनः बोलना पडेगा की  ...हे भगवान् हमारा उदय करो !!

Sunday, February 5, 2017

मोह के .. ऐसे भी दिन आने थे !

माली बेरोज़गार हो गए अब ...
गुलाबों को लेने ...
मोहब्बतें ...
बगीचों में तशरीफ़ नहीं लातीं !

"आर्चीज़" की गैलरी भी अब ...
फीकी फीकी रहती है !
"ग्रीटिंग्स से डेटिंगस" की तरफ ...
मुड़ कर जो चली गईं मोहबतें !

मन्दिरों में भी अब ..
वैभव लक्ष्मी /सन्तोषी माता व्रत ...
रखने वालीं ...
उड़तीं ,लहरातीं -तितलियाँ ..
कम ही आतीं हैं !
अब मोहबतों का ...
मन्दिरों में टँगे घंटों को बजा कर ...
मन्नतें मांगने का चलन ...
जाता रहा !

अब चिट्ठी पत्री लिख कर ..
इज़हारे मोहब्बतों को ...
जाहिर करने की अगन भी ..
समय के प्रवाह में ...
बुझती गई !

गद्दों,रज़ाइयों और तकियों के नीचे ....
अब नहीं पकड़ी जाती ...
एक दिल और उसमें तीर से निकलते ...
मोहब्बतों के फलसफे और ..
शेर ओ श्यारी वालीं चिठियाँ !

अब माँ पिता और भाई भावजें भी ...
ऐतराज़ नहीं करते ..
नए लड़को लड़कियों के ..
फितूरपने की मोहबत्तों को !
और अब ...
घर की इज़्ज़तों को भी ...
बट्टे नहीं लगते ...
बेसिर पैर की मोहब्बतों से !

समय का पहिया ...
चलता जा रहा है और ...
ये दिल और दर्द के रिश्ते ...
अपनी मोहब्बत का ...
सलीका बदलते जा रहे हैं !

"अब न वो रंग है ..
न वो संग है ...
न हुनर है और ...
अब न वह ...
सच्ची तरंग है !

बस यह कह लो ..
बेशर्मियों का लबादा ओढ़ ..
निकल पड़ीं है मोहबत्तें ...
अपनी ही बनाई ...
जुस्तुजुओं को मिटाने !"

मेरी बन्दिगी!

प्रिये!
तुम बगल में हो तो ..
ज़िन्दगी गतिमान है !
आसमा,तारे,चाँद और ..
चलते बादलों से ...
बातें करते करते ...
बीत रही है ज़िन्दगी !

गर्दिशें और बन्दिशें भी ...
समझ आतीं हैं -बारिशें ;
क्योंकि ..
तू ही ...
गर्दिश के बाद की ...
आशा की ग़ज़ल और ...
बन्दिशों के बाद ....
मेरी बन्दिगी !

ऐ हमसफ़र!
यूँ ही ...
मेरी परछाईं बन ...
चलती जा ...
कदमों से ताल मिला कर ..
देखना ....
मैं तेरे "अक्सों" को ...
नई मन्ज़िलों के पार ...                           पहुंचा दूंगा .....                                            साथ चलते चलते !