Sunday, February 5, 2017

मेरी बन्दिगी!

प्रिये!
तुम बगल में हो तो ..
ज़िन्दगी गतिमान है !
आसमा,तारे,चाँद और ..
चलते बादलों से ...
बातें करते करते ...
बीत रही है ज़िन्दगी !

गर्दिशें और बन्दिशें भी ...
समझ आतीं हैं -बारिशें ;
क्योंकि ..
तू ही ...
गर्दिश के बाद की ...
आशा की ग़ज़ल और ...
बन्दिशों के बाद ....
मेरी बन्दिगी !

ऐ हमसफ़र!
यूँ ही ...
मेरी परछाईं बन ...
चलती जा ...
कदमों से ताल मिला कर ..
देखना ....
मैं तेरे "अक्सों" को ...
नई मन्ज़िलों के पार ...                           पहुंचा दूंगा .....                                            साथ चलते चलते !

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