अगर ...
रहमत का असर ...
देखना हो तो ...
आ कर कुछ दिन ...
मेरे आंगन में ...
वक़्त गुज़ार कर देखो !
दुआओं की ...
बारिश होती है ;
हर रोज़ ...
मेरी धूसर ज़मीन पर !
और ...
मैं बागबान बन जाता हूँ ...
हर रोज़ ..
अपने गुज़रे पिता की ..
सीखों की बदौलत !
अरे ;
ज्यादा कुछ नहीं ..
प्यार के ...
दो मीठे बोल ही तो ...
बोल देता हूँ ...
मैं ;
उन सफेद पड़ चुके ....
बाल वालों से और .....
अपने बेटों से ....
चाहतों का इन्तिज़ार करते ...
ये ठूंठ होते वृक्ष ....
मुझे बेटा समझ ...
गले लगा लेते हैं !
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