प्रिय फौजी मित्रों !
"तुम बैठो हो ..
हिमाच्छादित बर्फ की -
तलहटी की खन्दकों में ..
बन्दूक और दूरबीन थामे ..
मातृभूमि और
हम सभी की
रक्षा करते !
"तुम बैठो हो ..
हिमाच्छादित बर्फ की -
तलहटी की खन्दकों में ..
बन्दूक और दूरबीन थामे ..
मातृभूमि और
हम सभी की
रक्षा करते !
और हम ..
अपने घरों की ..
छतों पर खा रहे हैं ..
तिल के लड्डू और गजक ..
धुप लेते हुए !
अपने घरों की ..
छतों पर खा रहे हैं ..
तिल के लड्डू और गजक ..
धुप लेते हुए !
सच ...
बहुत कुछ त्यागते हो तुम ..
हम सब के खातिर !
बहुत कुछ त्यागते हो तुम ..
हम सब के खातिर !
बेआवाज़ दरख्त बन ..
तुम कभी भी ..
दफन हो जाते हो ..
तिरंगे में लिपट कर ..
चन्द अखबारों के ..
पीछे के पन्नों की ..
सुर्खियां बन !"
तुम कभी भी ..
दफन हो जाते हो ..
तिरंगे में लिपट कर ..
चन्द अखबारों के ..
पीछे के पन्नों की ..
सुर्खियां बन !"
मकर संक्रांति पर ..
जीवट और जौहर को ..
सदर नमन !
जीवट और जौहर को ..
सदर नमन !
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