जब कुछ ले कर ...
जाना नहीं !
जब लौट कर ...
इस पते पर ...
दुबारा आना नहीं !
ये अरमाँ ...ये ख्वाब ..
ये फ़साने और मोहबत्तें ..
जन्मों जन्मों का ..
कोई तराना नहीं !
तो तू ..क्यों परेशां है ;
ऐ बन्दे !
इस मायाजाल से ?
"तुझे कुछ ...
ले जाना नहीं !
और ...
मालिक को ...
कुछ मंगाना नहीं !"
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