ऐ ज़िन्दगी !
जब जी चाहे ...
मेरा इम्तिहान ले लेना !
मैं तपाया गया हूँ ...
सोने की माफिक ;
जितना तू उलझाएगी ..
मैं सुलझता जाऊँगा !
मैं चमकता जाऊँगा !
जब जी चाहे ...
मेरा इम्तिहान ले लेना !
मैं तपाया गया हूँ ...
सोने की माफिक ;
जितना तू उलझाएगी ..
मैं सुलझता जाऊँगा !
मैं चमकता जाऊँगा !
मेरी रगों में और जड़ों में ..
पकड़ है ...
वटवृक्ष की मानिंद !
तू तूफ़ान भी लाएगी तो ..
कुछ पत्तियों के सिवा ...
कुछ न उड़ा पायेगी ...
और मैं ...
झेल जाऊँगा निर्भीक ...
तेरी हर चाल !
पकड़ है ...
वटवृक्ष की मानिंद !
तू तूफ़ान भी लाएगी तो ..
कुछ पत्तियों के सिवा ...
कुछ न उड़ा पायेगी ...
और मैं ...
झेल जाऊँगा निर्भीक ...
तेरी हर चाल !

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