विनम्र श्रद्धांजलि उस कांग्रेसी नेता को जो "गाँधी" नहीं है !
"जितना बौना कद उतनी ही ऊँची शख्सियत !"
"जब मैं पैदा हुआ था तब आप अपना कर्तव्य और "जय जवान जय किसान" का अमर जयघोष दे कर जा चुके थे। बुजुर्ग अध्यापकों ,किस्से कहानियों और यदा कदा सामान्य ज्ञान की प्रतियोग्यताओं में अवश्य आपका नाम आता रहा और हमने और हमारी पीढ़ी ने धीरे धीरे उपलब्ध साहित्य और समाचार पत्रों के माध्यम से आपको जाना और पहचाना। वाकई आप गज़ब के इंसान थे !"जितना बौना कद उतनी ही ऊँची शख्सियत !" आपने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रहते वर्ष १९६५ के युद्ध में न सिर्फ पाकिस्तानियों को उनकी औकात बताई वरन सादगी और सहज पन की एक ऐसी मिसाल और रेखा खींच गए जिसे आज भी कोई पार नहीं कर पाया। आज विश्वास नहीं होता कि बिना "गाँधी" टैग लगाए आप कैसे प्राचीन परंतु आधुनिक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए या बना दिए गए ?आप होते तो इस प्रश्न का जवाब जरूर पूंछता ?क्योंकि मेरे जीवन काल में जो भी कांग्रेस के प्रधानमन्त्री बने या बनाये गए हैं वे सदैव -"परिस्तिथि जन्य" उपज थे। मुझे पता है कि -उस समय आप एक "ज्वार" थे और समूचे हिंदुस्तान का जनसैलाब आपके पीछे खड़ा था। और शायद यही प्राकृतिक नैसर्गिक न्याय भी था जिसने आपको प्रधानमंत्री बना दिया। ताशकंद में आपकी मृत्यु और सैकड़ों अनुत्तरित प्रश्नों के जवाब तो अब नहीं मिलेंगे परंतु हम सदैव आपको आपकी सज्जनता तथा विनम्रता के लिए अपने दिलों में सहेजे रहेंगे। दुःख है कि -आज आपको उन लोगों ने याद बहुत कम किया जिनकी पार्टी के आप सिपहसलार थे !खैर ;वे भी परेशान हैं और अपनी अस्मिता और अस्तित्व की अंतिम लड़ाई के दौर से उनकी पार्टी और नेतागण गुज़र रहे हैं। कभी कांग्रेस में आप जैसे महान नेतृत्व ने भी पथसंचलन किया ;यकीन नहीं होता !"
यकीनन -आप माटी के -"लाल' थे !
यकीनन -आप भारत के "बहादुर" बेटे थे !
यकीनन -आप प्रखण्ड विद्वान् "शास्त्री" थे !
सदर नमन !
[असंख्य भारतवासी !]
"जितना बौना कद उतनी ही ऊँची शख्सियत !"
"जब मैं पैदा हुआ था तब आप अपना कर्तव्य और "जय जवान जय किसान" का अमर जयघोष दे कर जा चुके थे। बुजुर्ग अध्यापकों ,किस्से कहानियों और यदा कदा सामान्य ज्ञान की प्रतियोग्यताओं में अवश्य आपका नाम आता रहा और हमने और हमारी पीढ़ी ने धीरे धीरे उपलब्ध साहित्य और समाचार पत्रों के माध्यम से आपको जाना और पहचाना। वाकई आप गज़ब के इंसान थे !"जितना बौना कद उतनी ही ऊँची शख्सियत !" आपने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रहते वर्ष १९६५ के युद्ध में न सिर्फ पाकिस्तानियों को उनकी औकात बताई वरन सादगी और सहज पन की एक ऐसी मिसाल और रेखा खींच गए जिसे आज भी कोई पार नहीं कर पाया। आज विश्वास नहीं होता कि बिना "गाँधी" टैग लगाए आप कैसे प्राचीन परंतु आधुनिक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए या बना दिए गए ?आप होते तो इस प्रश्न का जवाब जरूर पूंछता ?क्योंकि मेरे जीवन काल में जो भी कांग्रेस के प्रधानमन्त्री बने या बनाये गए हैं वे सदैव -"परिस्तिथि जन्य" उपज थे। मुझे पता है कि -उस समय आप एक "ज्वार" थे और समूचे हिंदुस्तान का जनसैलाब आपके पीछे खड़ा था। और शायद यही प्राकृतिक नैसर्गिक न्याय भी था जिसने आपको प्रधानमंत्री बना दिया। ताशकंद में आपकी मृत्यु और सैकड़ों अनुत्तरित प्रश्नों के जवाब तो अब नहीं मिलेंगे परंतु हम सदैव आपको आपकी सज्जनता तथा विनम्रता के लिए अपने दिलों में सहेजे रहेंगे। दुःख है कि -आज आपको उन लोगों ने याद बहुत कम किया जिनकी पार्टी के आप सिपहसलार थे !खैर ;वे भी परेशान हैं और अपनी अस्मिता और अस्तित्व की अंतिम लड़ाई के दौर से उनकी पार्टी और नेतागण गुज़र रहे हैं। कभी कांग्रेस में आप जैसे महान नेतृत्व ने भी पथसंचलन किया ;यकीन नहीं होता !"
यकीनन -आप भारत के "बहादुर" बेटे थे !
यकीनन -आप प्रखण्ड विद्वान् "शास्त्री" थे !
सदर नमन !
[असंख्य भारतवासी !]

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