ज़िन्दगी ....
चलती जा रही है ;
रफ्ता रफ्ता !
हम भी ...
मिलते,बिछड़ते और
हंसते मुस्कराते ...
चलते जा रहे हैं ...
रफ्ता रफ्ता !
माना कि -
मोहबतों के दरिया ..
न पार कर पाए हम ...
पर ..
बेवफ़ाई के छीटों से भी ...
हमें कोई ...
भिगो नहीं पाया ..
रफ्ता रफ्ता !"
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