Saturday, January 31, 2015

Bharat and India... The Difference!

भारत और इंडिया में अंतर.....

भारत में गॉंव है, गली है, चौबारा है.
इंडिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है.

भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है.
इंडिया में फ्लैट और मकान है.

भारत में काका है, बाबा है, दादा है, दादी है.
इंडिया में अंकल आंटी की आबादी है.

भारत में खजूर है, जामुन है, आम है.
इंडिया में मैगी, पिज्जा, माजा का नकली आम है.

भारत में मटके है, दोने है, पत्तल है.
इंडिया में पोलिथीन, वाटर व वाईन की बोटल है.

भारत में गाय है, गोबर है, कंडे है.
इंडिया में सेहतनाशी चिकन बिरयानी अंडे है.

भारत में दूध है, दही है, लस्सी है.
इंडिया में खतरनाक विस्की, कोक, पेप्सी है.

भारत में रसोई है, आँगन है, तुलसी है.
इंडिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है.

भारत में कथडी है, खटिया है, खर्राटे हैं.
इंडिया में बेड है, डनलप है और करवटें है.

भारत में मंदिर है, मंडप है, पंडाल है.
इंडिया में पब है, डिस्को है, हॉल है.

भारत में गीत है, संगीत है, रिदम है.
इंडिया में डान्स है, पॉप है, आईटम है.

भारत में बुआ है, मौसी है, बहन है.
इंडिया में सब के सब कजन है.

भारत में पीपल है, बरगद है, नीम है.
इंडिया में वाल पर पूरे सीन है.

भारत में आदर है, प्रेम है, सत्कार है.
इंडिया में स्वार्थ, नफरत है, दुत्कार है.

भारत में हजारों भाषा हैं, बोली है.
इंडिया में एक अंग्रेजी एक बडबोली है.

भारत सीधा है, सहज है, सरल है.
इंडिया धूर्त है, चालाक है, कुटिल है.

भारत में संतोष है, सुख है, चैन है.
इंडिया बदहवास, दुखी, बेचैन है.

क्योंकि …
भारत को देवों ने, वीरों ने रचाया है.
इंडिया को लालची, अंग्रेजों ने बसाया है....
“आओ हम सब मिलकर इस श्रेष्ठ राष्ट्र को फिर से विश्व-गुरू ‘भारत' बनाएं

Tuesday, January 27, 2015

"स्व.डॉ.रूपेंद्र खरे स्मृति प्रतिभा पुरूस्कार-2015"

छयाछठवे 66 th गणतंत्र दिवस पे आयोजित समारोह में "स्व.डॉ.रूपेंद्र खरे स्मृति प्रतिभा पुरूस्कार-2015" एवं  और समारोहपूर्वक आबंटित किये गए। पूज्य पापाजी की स्मृति में 1996 में स्थापित किये गए यह पुरूस्कार अनवरत रूप से पिछले 20 वर्ष से समर्पित किये जा रहे हैं। 
इक छोटी सी आदरांजली उन प्यारे से पापा को जो इक ममतामयी पिता थे और ज़िन्दगी का आयना थे। 


Thursday, January 8, 2015

सिलसिले.....


" गुज़र गयी मोहब्बत भरी ज़िन्दगी अपनी तमाम रौनके लेकर.
ज़िन्दगी ने वफ़ा की …
तो कल फिर सिलसिले होंगे...."








ऐ खुदा!

"नहीं मांगता - ऐ खुदा कि -जिंदगी सौ साल की दे...

दे भले चंद लम्हों की, लेकिन कमाल की दे...!!!"

शानू !

Thursday, January 1, 2015

उम्मीद!

गम के पास तलवार, मैं उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..!
ऐ जिंदगी ! तेरी हर चाल के लिए मैं एक चाल लिए बैठा हूँ..!!

लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख - मिचोली का..!
मिलेगी कामयाबी हौसला कमाल लिए बैठा हूँ..!!

चल मान लिया दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक..!
गिरेबान में अपने सुनहरे साल लिए बैठा हूँ..!!

ये गहराइयाँ, ये लहरें, ये तूफाँ, तुम्हे मुबारक..!
मुझे क्या फिक्र मैं कश्ती बेमिसाल लिए बैठा हूँ...!!