Thursday, January 1, 2015

उम्मीद!

गम के पास तलवार, मैं उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..!
ऐ जिंदगी ! तेरी हर चाल के लिए मैं एक चाल लिए बैठा हूँ..!!

लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख - मिचोली का..!
मिलेगी कामयाबी हौसला कमाल लिए बैठा हूँ..!!

चल मान लिया दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक..!
गिरेबान में अपने सुनहरे साल लिए बैठा हूँ..!!

ये गहराइयाँ, ये लहरें, ये तूफाँ, तुम्हे मुबारक..!
मुझे क्या फिक्र मैं कश्ती बेमिसाल लिए बैठा हूँ...!!

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