स्व.राजेश खन्ना के मृत्यु पूर्व अंतिम शब्द-
"अब टाइम हो गया ; पैक अप! "
आज ही के दिन सुपरस्टार @ राजेश खन्ना ;
धरती के ऊपर की यात्रा पूरी कर धरती के नीचे की अंतहीन यात्रा पर चले गए थे !
"नमन एक बेहतरीन कलाकार की बेहतरीन अदाकारी को और उनकी मुस्कान को !!"
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Tuesday, July 18, 2017
स्व.राजेश खन्ना के मृत्यु पूर्व अंतिम शब्द- अब टाइम हो गया ; पैक अप!
Saturday, July 15, 2017
खेते रहो ..खेते रहो ..जीवन की नांव !
तूफ़ा से ख्वाब!
उम्र से मद्धिम मद्धिम ..
ज़िन्दगी मांगती ; हिसाब !!
समय की मार ने ..
सारे फितूर ..सारे नक़ाब !
सारे कसीदे ..सारे जवाब !
सामने है हक़ीक़त ;
और हम ..
नंगे है ;जनाब !
यही है लब्बोलुआब !
क्षितिज से ...
जितनी रौशनी दिखती है ..
अब तुम उसी से चलाओ ;
अपनी जीवन नांव !
जब तक चले ..
अपनी नांव !
अब न लगाना कोई ..
नया दांव !
कभी भी बुलावा ...
आ सकता है और ..
जाना पड़ जाएगा; तुम्हें ..
उस ऊपर वाले के
गाँव !!"
Monday, July 3, 2017
ये कल ही की तो बात थी जब तेरे घर मेरी बरात थी !
ये कल ही की तो बात थी .. जब ..
तुम्हारे बाबूजी ने ..
"गौरव संग मधुमिता"
लिखवा कर ..
अपने घर की दीवारें ..
सजवाई थी !
बिन अपने प्यारे पापा के ..
इक छोटी सी ..
बारात ला कर ..
तेरी विदा ..
करवाई थी !
तेरे संग ...
ज़िन्दगी रचाई थी !
विदाई की आपा धापी में
डरी सहमी सी ..
नंगे पाँव ..तुम ..
मेरे घर आई थी !
गुज़र गए १९ बरस ...
यूँ ही ...साथ चलते चलते !
जीवन की आपा धापी में ...
यूँ ही ...बात करते करते !
बिताई है ज़िन्दगी ...
तेरे साथ ;इन गलियों में ...
जहाँ ..
तेरा-मेरा बचपन बीता ..
और अब ..
ज़िन्दगी भी गुज़र रही है ..
तेरे साथ ...सुकून से
उम्र के इस दोराहे पे ...
जीवन की ...
रात ढलते ढलते !
जब तुम ..
इस घर की लक्ष्मी बन ..
लाखों सपनों को सच करने ..
रंगोली और गुलाल संग ..
बहुत सारे ख़्वाबों को ...
अपने साथ ..इस घर में
लाईं थी !
हम दोनों ने मिलकर ..
भगवान् और पूज्य पापा की ...
तस्वीर के सामने ...
ज्योति जलाई थी !
ज़िन्दगी संवारते संवारते ..और
तुझ पर अपनी पसंदें ..
थोपते थोपते ..
निकल आये हम ...
बहुत दूर ; बहुत आगे ..
नई मंज़िलों की आस लिए !
और निरर्थक से ..
बचाने के लिए ..
मेरा अस्तित्त्व बन ...
मुझे थामने के लिए ....
ऐ ज़िन्दगी !ऐ मोहब्बत !
ऐ मेरे जीवन साथी !
तेरा शुक्रिया ; ता उम्र ..
ता ज़िन्दगी !!
ऐ मेरी हमदम !
हम पूरा करेंगे ;
मिलकर ..
अपने लक्ष्यों को और ..
साबित करेंगे कि -
ये हमारी ..
ज़िद्द नहीं थी बल्कि ...
उस ऊपर वाले ने ..
बहुत सोच समझ कर ..
हम दोनों को ..
एक दूसरे के लिए ही ..
बनाया था !!
Sunday, July 2, 2017
एक प्यारे से दोस्त को उसके जन्मदिवस पर न्योछावर चंद शब्द !
प्रिय राकेश!
शुभ जनमोत्स्व !!💐💐👍👍
समय बदलते ही ...
सफलता मिलते ही ...
"बंज़र ज़मीन भी ..
बारिश में ..
अंकुरित हो ..
हरीतिमा हो जाती है !
रोज़ शाम ढलते ढलते
फिर सुबह आ जाती है !
हर करवट ..
दुनिया बदल जाती है !
मायूसी ...
खुमारी बन जाती है !
चाहत ...
बहुत जल्द ...
शौक में बदल जाती है !
मधुशाला पढ़ते पढ़ते ही ... ज़िन्दगी की पाठशाला ..
बन जाती है !
कुछ कुछ ...
ऐसा ही होता है जब ...
सफलता पर ...
दौलत की ठनक ...
चढ़ जाती है !
लेकिन ;
तुम न बदले ..
मेरे दोस्त !
जैसे थे ; वैसे हो !
मेरे थे ; मेरे हो !
निश्छल थे ; मासूम हो !
और दोस्त थे ; दोस्त हो !
अक्सर तौलता रहता हूँ ..
मैं ; तुम्हें ....
समय के तराज़ू पर !
पर हर बार ..
वक़्त के पहिये की ..
तेज़ रफ्तार के बावजूद .. तुम्हारा वज़न ...
कभी भी मुझे ...
बढ़ा हुआ ...
दर्प से मढ़ा हुआ ...
और दौलत से ...
कढ़ा हुआ ...
नहीं दिखा !
तू हर बार ..
मेरा वही ...
पुराना राकेश बन ...
समेट लेता है ...
मेरा सम्पूर्ण वज़ूद ...
और मैं ;
निशब्द ..
ठहर जाता हूँ ...
तेरे आगोश में ...
तेरी सफलता के साथ ...
गर्वित होने के लिए !
खुश रहना ..
स्वस्थ्य रहना और सदा ऐसे ही अविरल धारा बन ...
बहते रहना !"
धन्यवाद!
मेरी ज़िन्दगी में ...
दस्तक बन कर आने का !
कभी कभी ...
विचारों को सुलगाने का !
और
सदा मुझे महकाने का !!
शुभ जनमोत्स्व !!
(गौरव !)😊💐💐👍