Tuesday, February 24, 2015

एक दोस्त है!

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झूठ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो पास हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं

एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं

Wednesday, February 18, 2015

सुख की तलाश!

ऐ सुख तू कहाँ मिलता है
क्या तेरा कोई स्थायी पता है

क्यों बन बैठा है अन्जाना
आखिर क्या है तेरा ठिकाना।

कहाँ कहाँ ढूंढा तुझको
पर तू न कहीं मिला मुझको

ढूंढा ऊँचे मकानों में
बड़ी बड़ी दुकानों में

स्वादिस्ट पकवानों में
चोटी के धनवानों में

वो भी तुझको ढूंढ रहे थे
बल्कि मुझको ही पूछ रहे थे

क्या आपको कुछ पता है
ये सुख आखिर कहाँ रहता है?

मेरे पास तो दुःख का पता था
जो सुबह शाम अक्सर मिलता था

परेशान होके रपट लिखवाई
पर ये कोशिश भी काम न आई

उम्र अब ढलान पे है
हौसले थकान पे है

हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास
अब भी बची हुई है आस

मैं भी हार नही मानूंगा
सुख के रहस्य को जानूंगा

बचपन में मिला करता था
मेरे साथ रहा करता था

पर जबसे मैं बड़ा हो गया
मेरा सुख मुझसे जुदा हो गया।

मैं फिर भी नही हुआ हताश
जारी रखी उसकी तलाश

एक दिन जब आवाज ये आई
क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई

मैं तेरे अन्दर छुपा हुआ हूँ
तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ

मेरा नही है कुछ भी मोल
सिक्कों में मुझको न तोल

मैं बच्चों की मुस्कानों में हूँ
हारमोनियम की तानों में हूँ

पत्नी के साथ चाय पीने में
परिवार के संग जीने में

माँ बाप के आशीर्वाद में
रसोई घर के महाप्रसाद में

बच्चों की सफलता में हूँ
माँ की निश्छल ममता में हूँ

हर पल तेरे संग रहता हूँ
और अक्सर तुझसे कहता हूँ

मैं तो हूँ बस एक अहसास
बंद कर दे मेरी तलाश

जो मिला उसी में कर संतोष
आज को जी ले कल की न सोच

कल के लिए आज को न खोना

मेरे लिए कभी दुखी न होना।
मेरे लिए कभी दुखी न होना!

Sunday, February 15, 2015

बचपन!

बचपन...
कभी जाता नहीं...
ज़िंदा रहता है -दिल के किसी कौने कतरे में... अपनी मासूमियत को तलाशता हुआ...

बचपन...
बरबस याद दिल देता है -
रेत के घरोंदे.... जो
असल ज़िन्दगी में सीमेंट और कंक्रीट तक का सफर तय कर दिलों को रेत के महलों सा ढेर कर देता है...

बचपन....
पंख लगाता है -
ऊंची उड़ान का....
सुनहरे ख़्वाबों का.... और
बिना डरे कुछ कर गुजरने की उम्मीद का....

बचपन....
याद दिलाता है -
प्यारी माँ के प्यार को....
पूज्य पापा की फटकार को....
बहिन की मनुहार को...
दादा-दादी की स्नेह फुहार को... और
दोस्तों की ललकार को....

बचपन....
भीनी भीनी खुशबू देता है -
संस्कारों की...
अनुशासन की...
जज़्बातों की.... और
सपनों की उड़ान की....

बचपन...
फिर लौट के आजा -
वो क्लासरूम में कॉपी के पेज फाड़ कर राकेट बना कर उड़ाना...
वो होली में किसी को रंग और कीचड़ से भिड़ाना...
वो पेट दर्द और स्कूल न जाने का बहाना...

ओह मेरे बचपन...
हमेशा याद आना! "
(शानू!)

Black and White!

"क्यों लगता है सबकुछ "ब्लैक एंड वाइट " -अच्छा?
-उम्र का तकाज़ा या कुछ और?

ब्लैक एंड वाइट - पुराने फोटो एल्बम
ब्लैक एंड वाइट -पुरानी फिल्में
ब्लैक एंड वाइट -पुरानी फ़िल्मी जोड़ियां?
ब्लैक एंड वाइट -पुरानी यादें
ब्लैक एंड वाइट -बचपन
और...
ब्लैक एंड वाइट -वो कॉलेज के ज़माने की सलवार -सूट और काले दुपट्टे वाली -वो पहली इकतरफा अनकही  मोहब्बत?

ओह! खुदा! कहाँ गई वो ब्लैक एंड वाइट ज़िन्दगी?
जहाँ सब कुछ 'रंगीन' जरूर नहीं था पर -सच्चा था.. पाक था... पावन था... पवित्र था... और मासूम था!

काश!आ सकती वो ज़िन्दगी फिर वापस... जहाँ...
यादें धरती पर फिर सजती और कहती- "शानू! उठो -मैं हूँ न? चलो ज़िन्दगी जीते हैं... एक बार फिर! "
चलो...
Review - का बटन दबा कर फिर एक बार झलकियाँ देख आते हैं... उस ज़िन्दगी की... जब हम.... किसी की ज़िन्दगी थे!