Sunday, February 26, 2017

हेरिटेज चिंतन ! आज खजुराहो में दुनियाँ दौड़ी पर बेचारा खजुराहो नहीं दौड़ा !

आज खजुराहो में हेरिटेज रन का आयोजन हुआ।
बड़ी ही मेहनत और मशक़्क़त से उक्त कार्यक्रम को सफल बनाया गया।
हरी झंडियां दिखाई गयीं और खजुराहो दौड़ पड़ा।
खजुराहो दौड़ा  .... बहुत तेज़ दौड़ा  .... लेकिन बहुत तेज़ दौड़ते बिचारे खजुराहो को पता ही नहीं चला कि -इस दौड़ का वाज़िब हक़ीक़त का अंत कहाँ है ?
हर बार खजुराहो दौड़ पड़ता है इस भावना के साथ कि -"उसके दिन बहुरेंगे !" 
लेकिन दौड़ के बाद वही "ढाक के तीन पात" जैसी स्थिति होती है ?
रंग बिरंगी टीशर्टें पहन चन्द घण्टों के लिए बेचारा खजुराहो खो जाता है दुनिया की रंगीनियों में  .... लेकिन उसके बाद की सुबह बहुत कष्टदायक होती है।
लोग आते हैं  ... खजुराहो के विषय में बेहतरीन बड़ी बड़ी बातें होती हैं  ... ऐसा कर देंगे ; वैसा कर देंगे ;ऐसा होना चाहिए;वैसा होना चाहिए  ... और फिर सुबह जब कठोर धरातल पर कदम पड़ते हैं तो बिचारा खजुराहो बड़े लोगों का रमणीक पिकनिक पॉइंट बन कर रह जाता है।
करोङो नहीं बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा रूपया अभी तक खजुराहो के तथाकथित उद्धार पर झोंका जा चूका है परंतु कोई यह बताये कि -उससे खजुराहो को क्या मिला ?

मैं नीचे कुछ तथ्य दे रहा हूँ जिनका जवाब हर खजुराहो के भाग्यउदय से जुड़ा हुआ इंसान चाहता है ?

१) यदि हेरिटेज यानि विरासत का इतना ही ख्याल था तो फिर चन्द वर्ष पहले अपने ही मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने "खजुराहो टेंपल व्यू होटल"- ललित ग्रुप को क्यों बेचा /दिया /लीज किया था ?
२) अभी कुछ बरसों पहले मध्य प्रदेश सरकार के एक और बेहतरीन "राहिल होटल" को भी "सायना ग्रुप" को दे दिया गया !क्यों ? किस हेरिटेज प्लान या दौड़ के अन्तर्गत ?
३) खजुराहो में भारत सरकार के पर्यटन विभाग का कार्यालय था जिसे शायद किसी हेरिटेज दौड़ में भाग लेने इंदौर भेज दिया गया और अब वह कार्यालय वहीँ बस गया है !
४) करोड़ों रुपए की लागत से बन कर तैयार खजुराहो का अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा आज भी अपनी हेरिटेज उड़ान का इन्तिज़ार कर रहा है !
५) रेलवे स्टेशन में काश कभी शताब्दी या ताज़ एक्सप्रेस स्तर की ट्रेनें अपना-"हेरिटेज चक्कर" लगाने लगें तो शायद बेचारा दीनहीन खजुराहो अपने भाग्य का रोना छोड़ कर टूरिस्टों का स्वागत करना शुरू कर दे और होटलों के खाली कमरें भी आमदनी देने लगें !
६ ) सड़कों का क्या कहना !वह समस्या तो अंग्रेजी भाषा के "टेन्स" सीखने में मदद करने लगी है !
उदहारण के लिए -"खजुराहो में सड़कें खराब थीं ;ख़राब है और खराब रहेंगी !"
७ ) उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाली महोबा लवकुशनगर राजनगर खजुराहो सड़क तो इतनी बदतर स्तिथि में है कि -इस मार्ग से खजुराहो जाने वाले पर्यटकों को ७० किलोमीटर के सफर में साढ़े चार घंटे लगते है। कभी कभी तो लगता है कि -शासन इस सड़क को ही -"हेरिटेज मार्ग " घोषित कर दे जिससे कम से कम आने वाले पर्यटकों को शासन के "हेरिटेज चिंतन" के विषय में काफी कुछ समझ में आ जाएगा।
८) खजुराहो स्थित युथ हॉस्टल भी अपनी चन्द अंतिम साँसें गईं रहा है। काश कभी कोई -"हेरिटेज दौड़ " इस युथ हॉस्टल को भी बचाने के लिए निकल पड़ती तो वाकई इसका और खजुराहो का उद्धार हो जाता !
९) खजुराहो आने वाला हर हवाई जहाज दिल्ली से बनारस जाता है और फिर खजुराहो आता है। ऐसे ही दिल्ली जाते समय भी पर्यटक को जबरदस्ती पहले खजुराहो से बनारस जाना पड़ता है और फिर वह दिल्ली पहुँचता है। ऐसा क्यों ?? इससे उस टूरिस्ट को बेफालतू में लंबे मार्ग का किराया देना पड़ता है। इस कारण दिल्ली में बैठे ट्रेवल एजेंट या टूर ओपेरटर टूरिस्ट के नाहक लगने वाले पैसे को बचाने के चक्कर में -बेचारे खजुराहो के भ्रमण को काट देते हैं ! और खजुराहो अपनी पलक पावणें बिछा कर सुनी आँखों से पर्यटकों का इन्तिज़ार करता रहता है। शासन /प्रशासन /राज्य /केंद्र सरकार एक सख्त आदेश से सब कुछ संभल सकता है और हमारे खजुराहो के आम जनमानस को ऐसी बीस किलोमीटर की हेरिटेज दौड़ों की जरुरत ही नहीं पड़ेगी।
१०) हक़ीक़त में -:हेरिटेज दौड़ " की जरुरत उन स्थलों को होती है जहाँ आम जनमानस के भीतर उस स्थल के प्रति जागरूकता या प्रेम की कमी पाई जाती है। वास्तविकता में खजुराहो के आम जन के भीतर खजुराहो की विरासत और स्थापत्य के प्रति ज़बरदस्त शृद्धा एवम नैतिकता कूट कूट कर भरी हुई है। एक ड्राइवर से लेकर गाइड या जनरल मेनेजर अथवा विधायक और सांसद महोदय तक खजुराहो की रक्षा और उसके उन्नयन के प्रति प्रतिबद्ध है और रहेंगे। जरुरत है-सिर्फ केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा कठोर निर्णयों के क्रियान्यवन की। 
अंत में क्या कहूँ ???
आज खजुराहो नहीं दौड़ा !
वह तो किसी कौने में बैठ कर दुखी मन से देख रहा था इस हेरिटेज दौड़ के खेल को !!
दौड़े सिर्फ होटल वाले  ...
दौड़े सिर्फ सरकारी वर्दी वाले  ....
दौड़े सिर्फ सत्ता के आदरणीय  ....
दौड़े सिर्फ बिचारे नगर निकाय के कर्मचारीगण  ...
कुछ स्कूलों के बच्चे और कुछ थोपे हुए आदेश  की तीमारदारी करते बिचारे कर्मचारी !
चलो बधाई हो !
आज चंदेल दौड़े !
आज बुन्देल दौड़े !
आज मतंगेश्वर दौड़े !
आज खजुराहो दौड़ा !
चलो फिर बनाते है -एक बेहतरीन "बाईलाइन !




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