Wednesday, October 12, 2011

Tribute to Shri. Jagjeet Singh!


दुःख मे मलहम का नाम थे  जगजीत,
 सुख को बांटने का फलसफा थे जगजीत! 


वफाओं को निभाने का हमनाम थे जगजीत,
 बेवफाई को सहने की दवा और दुआ थे जगजीत! 


खत्म होते दीए कि लौ थे जगजीत! 
 अंधेरे मे टिमटिमाती ज़िन्दगी की रौशनी थे- जगजीत! 


उखड्ती साँसों का धीरज थे जगजीत!
 निकलते आसुओं का तजुर्बा थे जगजीत! 


अंधेरी रात की  करवट  और उसकी  सिलवटों के गवाह थे जगजीत! 
 सुनहरी यादों,वादों,प्रेम और उसके कथानक के अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर थे जगजीत! 


और अंत म़े-
जीवन म़े शब्दों के उतार-चड़ाव,धूप-छाओं,अनुलोम-विलोम का बेहतरीन पर्याय थे- जगजीत
 अमावस के रात म़े  दीए के  रात भर जलने  और रात से संघर्ष करने की अमिट ग़ज़ल थे-जगजीत!


जगजीत! तुझे सलाम !
तेरे गले के उस उतार-चढाव को सलाम!
तेरी सांसो के बंधन को सलाम !
तेरी उन आँखों को भी सलाम जिन्होने बयाँ करी इस दुनिया म़े महुब्बत की  कलाम!
तेरी वफाओं को सलाम !
तेरी इबादत्त को सलाम !
तेरी शोहरत को सलाम !
तेरी जुदाई को अंतिम सलाम !
तुझे अंतिम प्रणाम! 

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