मिली थी जिन्दगी ,किसी के
काम आने के लिए...
पर वक्त बित रहा है , कागज के टुकड़े कमाने के लिए !
कभी मिल सको तो बेवजाह मिलना...
वजह से मिलने वाले तो ना जाने हर रोज़ कितने मिलते है...
"कदर और इज़्ज़त करनी है,
तो जीतेजी करो,
क्योंकि अरथी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते है..."
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