Saturday, November 3, 2012

"सूरज को चुनौती देना?

"सूरज को चुनौती देना?
उसकी रौशनी को नापना?
उसके तेज़ को आंकना?
और उसकी उर्जा को जांचना?
सिर्फ एक विज्ञानिक क्रिया है
कोई-
सामाजिक,सांस्कृतिक या राजनैतिक प्रयोग नहीं
जिसके दम पर हम
कोई निष्कर्ष निकालने का प्रयास करें
और सन्देश दें-भावी मानवता को -
सूरज से बच कर रहने को!

आज हमारे देश में
सूरज-चन्द्रमा-और ध्रुव तारे पर  ;
सत्य-निष्ठां,ईमानदारी,कर्तव्य और जिम्मेदारी पर
 प्रश्न चिन्ह लगाना और
चुनौती देना इक आम बात हो गई है
और अगर हालात नहीं सुधरे तो वो दिन दूर नहीं
जब हम भगवान् पर भी प्रश्न -चिन्ह लगा देंगे
और
उसके अस्तित्व को ही चुनौती देने से भी नहीं डरेंगे ?

भ्रष्टाचार के तालाब में
अपनी अपनी जवानी के दिनों में
सभी ने गोता लगाया
किसी ने तर्क दिया कि -
वो डूबते को बचा रहा था
किसी ने कहा कि वो समुन्दर में गहरे पानी में गोता  लगा कर मोती ढूडने का प्रयास कर रहा था
और किसी ने कहा की-
वह तो बस खड़ा था;हवा कि  तेज़ आंधी आयी और पैर फिसल गया और तालाब में गिर गया

अपने अपने तर्क
अपनी अपनी सफाई

अपने अपने कुतर्क
अपनी अपनी जग-हंसाई

किसी ने इज्ज़त फंसाई
और किसी ने इज्ज़त गँवाई

हकीकत तो यह है कि -आजकल टीवी  पे
अपने देश के इन तथा-कथित कर्णधारों को देख कर बरबस याद आ जातें हैं-
महाभारत के शिखंडी और रामायण की शूर्पनखा और लगता है कि फिर कोई
श्री कृष्णा और श्री राम अवतरित हो कर -
इन सब को तार  कर -
पृथ्वी को प्रदुषण से मुक्त करें!

केजरीवाल को गाली देने से अथवा--
मनीष सिसोदिया को धमकाने से-
ख़त्म नहीं हो जाता-
इन कोरवों का पाप!
और देख लेना धरती माता अपने वजूद की रक्षा के लिए -
खुद थोडा सा हिलेंगी और-
भूकंप तथा सुनामी की आंधी ख़त्म कर देगी-
इन वजनदार सज्जन बोझिल लोगों को !"
  

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