Friday, March 1, 2013

अनाथ







मेरे पास कुछ नहीं बचा है -
सिवाए ....
उन दुआओं के जो 
माँ-पापा ने दी थीं 
कभी जब वो मेरे साथ थे 
या ......
मै उनके साथ था और मेरा हाथ उनके हाथ में था।

कैसे बिछड़ जाते हैं न हम सभी होले से अपनों से?
और ......
रह जाते हैं किस्से कहानियां सुनाने को-कि -
मम्मा-मेरे दादू कैसे थे ?
अच्छा ये मेरी दादी का चश्मा है?
मेरी नानी माँ क्या कहती थी?
या .....
तेरे नानाजी होते तो तुझे बहुत प्यार करते!

काश वो पल छिन दुबारा लौट कर आ जाएँ जहाँ-
मै पापा के पैर दबाऊँ 
माँ ने जो कपडे धोए है वो तार पे लटका दूँ 
और .....
होम-वर्क न करने पे या पहाड़े भूल जाने पे 
मिल जाए प्यारे पापा की थोड़ी सी पिटाई!

कैसे न?सब-कुछ बदल गया?
पापा के वो बक्से,वो फायलें वो कपडे;
वो ऊँच -नींच के बातें 
गाडी धीरे चलाने की हिदायतें 
सब…
वैसे कि वैसे हैं?
फिर भी ....
पापा के न रहने पे 
सब-कुछ अधुरा है।


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